महाराष्ट्र की राजनीति में महानगरपालिका चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी न केवल सत्ता में मजबूती से खड़ी है, बल्कि संगठनात्मक और वैचारिक स्तर पर भी उसने विपक्ष पर निर्णायक बढ़त बना ली है. इन चुनावों में भाजपा की ऐतिहासिक सफलता के केंद्र में दो नाम सबसे प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण. राजनीतिक गलियारों में इस जीत को ‘देवेंद्र–रविंद्र मॉडल' की सफलता के रूप में देखा जा रहा है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी चव्हाण की ताकत और कार्यशैली से भली-भांति परिचित हैं. 24 घंटे पार्टी को समर्पित अध्यक्ष के रूप में उनका महत्व फडणवीस अच्छी तरह जानते हैं. शहरी महाराष्ट्र की राजनीति का चव्हाण का अनुभव और उनकी हमेशा “इलेक्शन रेडी” रहने वाली कार्यशैली भाजपा के लिए बड़ी संपत्ति साबित हुई है. सार्वजनिक बांधकाम मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान पूरे महाराष्ट्र में किए गए दौरों और विकास कार्यों के जरिए उन्होंने जो नेटवर्क तैयार किया, वही आज भाजपा के लिए निर्णायक ताकत बनकर सामने आया है.
महानगरपालिका चुनावों में भाजपा की इस भव्य और ऐतिहासिक जीत के शिल्पकार के रूप में जहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का सशक्त नेतृत्व सामने आया है, वहीं प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की रणनीतिक क्षमता और दूरदर्शिता भी पूरी तरह उजागर हुई है. जैसे-जैसे पूरी जीत के आंकड़े सामने आएंगे, यह और स्पष्ट होगा कि महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा ने एक नई ऊंचाई हासिल कर ली है—और इसके केंद्र में हैं फडणवीस और चव्हाण की मजबूत, समन्वित और दूरदर्शी जोड़ी.














