मीरा रोड चाकू कांड मामले में चौंकाने वाला खुलासा, अमेरिका रिटर्न जैब जुबेर अंसारी के बेहद खतरनाक थे मंसूबे?

अमेरिका रिटर्न 31 वर्षीय आरोपी जैब जुबेर अंसारी के अमेरिका में बिताए गए 20 सालों (2000-2020) के रिकॉर्ड सुरक्षा एजेंसियां खंगाल रही हैं. मीरा रोड के नयानगर इलाके में चाकूबाजी के आरोपी के केस की जांच में जुटी एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि उसके कट्टरपंथी बनने की शुरुआत विदेशी धरती पर हुई थी या भारत लौटने के बाद हुई.

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SHOCKING REVELATION IN MIRA ROAD STABBING CASE

Mira Road Stab Case: मुंबई से सटे मीरा रोड के नयानगर इलाके में चाकूबाजी के मामले में गिरफ्तार जैब जुबेर अंसारी को लेकर जांच एजेंसियों ने गुरुवार को चौंकाने वाला खुलासे किए हैं. सूत्रों के अनुसार फॉरेंसिक जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी केवल कट्टरपंथी वीडियो ही नहीं देख रहा था, बल्कि वह मुंबई के संवेदनशील इलाकों के नक्शे और 'लोन वुल्फ' हमले के टैक्टिकल मैनुअल का गहराई से अध्ययन कर रहा था.

अमेरिका रिटर्न 31 वर्षीय आरोपी जैब जुबेर अंसारी के अमेरिका में बिताए गए 20 सालों (2000-2020) के रिकॉर्ड सुरक्षा एजेंसियां खंगाल रही हैं. मीरा रोड के नयानगर इलाके में चाकूबाजी के आरोपी के केस की जांच में जुटी एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि उसके कट्टरपंथी बनने की शुरुआत विदेशी धरती पर हुई थी या भारत लौटने के बाद हुई.

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निर्माणाधीन साइट पर आरोपी का गार्ड्स पर हमला केवल एक संयोग नहीं था

अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक आरोपी पेशे से केमिस्ट्री का विशेषज्ञ था, इसलिए महाराष्ट्र एटीएस इसकी भी गंभीरता से जांच कर रही है कि क्या वह चाकू के हमले से आगे बढ़कर किसी खतरनाक विस्फोटक या केमिकल डिवाइस बनाने की योजना पर काम कर रहा था. पुलिस सूत्रों का मानना है कि निर्माणाधीन साइट पर गार्ड्स पर हमला केवल एक संयोग नहीं था, बल्कि वह यह देखना चाहता था कि स्थानीय सुरक्षा तंत्र और पुलिस का रिस्पांस टाइम कितना तेज है.

जांच एजेंसियों को आरोपी ज़ैब जुबेर अंसारी के घर से एक गुप्त डायरी मिली है

केंद्रीय एजेंसियां अब उसके उन डिजिटल फुटप्रिंट्स की पहचान करने में जुटी हैं, जिनसे यह संकेत मिलते हैं कि वह सीमा पार बैठे 'वर्चुअल हैंडलर्स' के संपर्क में था, जिन्होंने उसे एक सामान्य शिक्षक से हमलावर में बदल दिया. जांच एजेंसियों को आरोपी ज़ैब अंसारी के घर से एक गुप्त डायरी मिली है, जिसमें उसने वैश्विक आतंकी संगठन के प्रति अपनी वफादारी का 'शपथ पत्र' लिखा था और इस हमले को अपने मिशन का पहला कदम बताया था.

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जांच में सामने आया था कि हमले के बाद आरोपी भागने की बजाय अपने घर लौटने का फैसला किया था. अधिकारियों का मानना है कि यह घबराहट में नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है. सूत्रों के अनुसार, वारदात के बाद घर पहुंचकर उसने चाकू को धोया, खून से सने कपड़े बदले और फिर काले रंग के कपड़े पहन लिए.

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हमले के बाद आरोपी जिम्मेदारी लेने वाला संदेश जारी करने की तैयारी में था

गौरतलब है जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या काले कपड़े पहनना किसी तरह की कट्टरपंथी सोच या प्रतीक से जुड़ा हुआ था. अधिकारियों का कहना है कि आतंकवादी संगठन आईएसआईएस (ISIS) से जुड़े प्रोपेगैंडा में अक्सर काले झंडे और काले कपड़ों का इस्तेमाल देखा जाता है. जांच में यह भी शक है कि आरोपी हमले के बाद वीडियो रिकॉर्ड करने या जिम्मेदारी लेने वाला संदेश जारी करने की तैयारी में था.

सबूत मिटाने के इरादे से आरोपी ने गिरफ्तारी से पहले मोबाइल किया फॉर्मेट

नयानगर पुलिस ने आरोपी के घर से चाकू और खून लगे आरोपी के कपड़े बरामद किए हैं, जिन्हें आगे की जांच के लिए एटीएस को सौंप दिया गया है. मामले की जांच में एक बड़ी चुनौती यह भी सामने आई है कि आरोपी ने गिरफ्तारी से पहले अपना मोबाइल फोन फॉर्मेट कर दिया था. एजेंसियों का मानना है कि ऐसा उसने सबूत मिटाने के इरादे से किया.

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 शक है कि आरोपी हमले के बाद वीडियो रिकॉर्ड करने या जिम्मेदारी लेने वाला संदेश जारी करने की तैयारी में था. माना जाता है इस तरह के मामलों में “लोन वुल्फ” हमलों को पहचान देने के लिए वीडियो या मैसेज जारी करना एक आम पैटर्न माना जाता है. हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले वह ऐसा कर पाया या नहीं, यह अभी साफ नहीं हो पाया है.

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आरोपी का दूसरा मोबाइल गायब, एटीएस ने लैपटॉप फॉरेंसिंक जांच के लिए भेजा

आरोपी का एक दूसरा मोबाइल फोन अभी तक गायब बताया जा रहा है. जांच एजेंसी को शक है कि उसने उसे कहीं फेंक दिया, ताकि जांच एजेंसियों को उसके डिजिटल कनेक्शन या किसी संभावित संपर्क का पता न चल सके. फिलहाल बरामद लैपटॉप और फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि डिलीट किया गया डेटा वापस हासिल किया जा सके.

आरोपी की ऑनलाइन गतिविधियों और डिजिटल नेटवर्क खंगाल रही जांच एजेंसियां

एजेंसियां अब आरोपी की ऑनलाइन गतिविधियों और डिजिटल नेटवर्क को खंगाल रही हैं. यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि वह वास्तव में अकेले काम कर रहा था या फिर उसे किसी तरह की ऑनलाइन गाइडेंस मिल रही थी. जांच का फोकस इस बात पर भी है कि कहीं वह किसी बड़े प्रोपेगैंडा नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं था, जो इस तरह के हमलों को बढ़ावा देता है.

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पूछताछ के दौरान आरोपी की मानसिक स्थिति भी जांच का अहम हिस्सा बन गई है. सूत्रों के मुताबिक, अंसारी एक अलग ही दुनिया में जीता हुआ नजर आ रहा है. उसे लगता है कि ISIS उसके हमले को स्वीकार कर चुका है और जल्द ही उसे छुड़ाने की कोशिश करेगा. उसकी यह सोच वास्तविकता से काफी अलग मानी जा रही है.

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गिरफ्तारी के दौरान शांत रहा आरोपी बार-बार हाथ धोने- नहाने की जिद कर रहा

हिरासत में भी आरोपी जैब जुबेर अंसारी का व्यवहार असामान्य बताया जा रहा है. वह बार-बार हाथ धोने और नहाने की जिद कर रहा है, यह कहते हुए कि उसके हाथ गंदे हैं. हालांकि, जांच एजेंसियों का कहना है कि वारदात के वक्त उसका व्यवहार पूरी तरह शांत और नियंत्रित था. उसने दो सिक्योरिटी गार्ड पर हमला बिना किसी घबराहट के किया और तीसरे गार्ड के बीच में आने पर ही प्रतिक्रिया दी.

सिक्योरिटी गार्ड और सुपरवाइजर पर चाकू से हमले के बाद पकड़ा गया था आरोपी

बीते 27 अप्रैल को तड़के जैब जुबैर अंसारी ने निहत्थे सिक्योरिटी गार्ड और उसके सुपरवाइजर पर चाकू से हमला कर दिया था. हमले से पहले आरोपी ने पूछा था हिंदू हो क्या? फिर कलमा पढ़ने को कहा. जब सुब्रोतो रमेश सेन और सुपरवाइजर राजकेशर मिश्रा नहीं पढ़ पाए तो चाकू से हमला कर दिया. एटीएस पकड़े गए आरोपी का मानसिक झुकाव, ऑनलाइन गतिविधियां और किसी नेटवर्क से संभावित कनेक्शन की पड़ताल कर रही है.

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