मीठी नदी की सफाई पर ब्रेक ! शर्तों में ढील के बाद भी ठेकेदारों ने BMC को दिखाया ठेंगा

Mumbai News: मीठी नदी विवाद का मुख्य केंद्र सफाई और कीचड़ निकालने के नाम पर हर साल होने वाला करोड़ों का खर्च है, जिसमें ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से बिना काम किए फर्जी बिल पास कराने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं.

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मीठी नदी की सफाई पर फिर लगा ब्रेक.
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  • मुंबई की मीठी नदी की सफाई के लिए बीएमसी द्वारा जारी टेंडर में ठेकेदारों ने कोई रुचि नहीं दिखाई है
  • ठेकेदारों द्वारा सफाई अधूरी छोड़ने के कारण नए ठेकेदार भी इस परियोजना से दूरी बना रहे हैं
  • नदी में जमा कीचड़ और कचरे से पानी की निकासी बाधित हो रही है जिससे मुंबई में जलभराव का खतरा बढ़ रहा है
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मुंबई:

मुंबई के लिए हमेशा से खास रही मीठी नदी लगातार ठेकेदारों की उपेक्षा का शिकार हो रही है. नदी की सफाई पर एक बार फिर ब्रेक लग गया है. बीएमसी की ढीली शर्तों के बावजूद भी ठेकेदार इसकी साफ-सफाई में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. उन्होंने मीठी नदी की सफाई करने से इनकार कर दिया है. बता दें कि बीएमसी ने 28 फरवरी को सफाई के लिए टेंडर निकाला था, जिसे दो बार विस्तार दिया गया. 17 मार्च की अंतिम समय सीमा खत्म होने के बावजूद एक भी टेंडर नहीं भरा गया.

नए ठेकेदारों ने भी सफाई प्रोजेक्ट से बनाई दूरी

दरअसल पिछले साल ठेकेदारों द्वारा काम अधूरा छोड़ने की वजह से नए ठेकेदारों ने भी इस प्रोजेक्ट से दूरी बना ली है.  मॉनसून से पहले नदी की सफाई न होने से मुंबई में जलभराव का खतरा बढ़ेगा. मीठी नदी मुंबई के जल निकासी का मुख्य जरिया है. अगर इसमें जमा कीचड़ नहीं निकाला गया, तो बारिश का पानी आगे नहीं बढ़ेगा और मुंबई के निचले इलाकों कुर्ला, सायन, कलिना में जलभराव की समस्या दिखने लगेगी.

सफाई का काम शुरू तो हुआ लेकिन बीच में ही छूट गया

सालों से कचरा और मलबा जमा होने के कारण नदी की गहराई कम हो गई है. सफाई से नदी की पानी सोखने की क्षमता बढ़ती है. पिछले साल कई ठेकेदारों ने काम तो शुरू किया लेकिन तकनीकी समस्याओं या पेमेंट के मुद्दों के कारण उसे बीच में ही छोड़ दिया. मीठी नदी विवाद का मुख्य केंद्र सफाई और कीचड़ निकालने के नाम पर हर साल होने वाला करोड़ों का खर्च है, जिसमें ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से बिना काम किए फर्जी बिल पास कराने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं.

मीठी नदी में हुआ 65 करोड़ का घोटाला

इस पूरे प्रोजेक्ट में कई तरह की अनियमितता सामने आई हैं. जानकारी के मुताबिक, काम सिर्फ कागज में हुआ और नदी में कोई भी काम नहीं किया गया. फर्जी बिल बनाकर भुगतान हुआ और जमकर लूट हुई. इसमें  65 करोड़ के घोटाले की बात सामने आई. इस मामले में पहले मुंबई पुलिस ने एसआईटी बनाई और इसके बाद मुंबई पुलिस की इकनॉमिक ऑफेंसेस विंग ने मामले को अपने पास लिया, बाद में ईडी की भी इसमें एंट्री हो गई.

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2005 में मीठी नदी ने मुंबई में मचाई थी तबाही

कुछ साल पहले तक इस नदी को लोग एक छोटे से नाले के तौर पर जानते थे, यानी ये दिखती तो थी, लेकिन लोग इसे नजरअंदाज कर देते थे. मुंबई के ज्यादातर लोगों को इसका नाम तक पता नहीं था, लेकिन 2005 में कुछ ऐसा हुआ कि इस नदी का नाम हर किसी की जुबां पर आ गया. 18 किमी लंबी ये मीठी नदी मुंबई के पवई से लेकर शहर के बीचोंबीच से होते हुए माहिम की खाड़ी तक बहती है.  26 जुलाई 2005 को इस नदी ने अपना तांडव दिखाया था. इस दिन मुंबई में सबसे खतरनाक बारिश हुई थी और इस नदी ने रौद्र रूप लेकर कई इलाकों को तहस नहस कर दिया था. इससे पूरे शहर को भारी नुकसान हुआ था. एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई और 14 हजार से ज्यादा घर बर्बाद हो गए थे, हजारों लोग बेघर हुए थे. इस जल प्रलय में 52 लोकल ट्रेनें, 4 हजार से ज्यादा टैक्सी, 37 हजार ऑटो रिक्शा और बेस्ट की 900 बसों को भारी नुकसान पहुंचा था. 

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