महाराष्ट्र निकाय चुनाव 2026: कहीं दोस्ती, कहीं कुश्ती! अजब-गजब' गठबंधनों ने घुमाया जनता का सिर

Maharashtra Election: जहां एक तरफ मुंबई में कांग्रेस ने वैचारिक मतभेदों और उत्तर भारतीय वोट बैंक के छिटकने के डर से राज ठाकरे की MNS के साथ मंच साझा करने से भी साफ इनकार कर दिया है और वहां वह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही है. वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र के कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में यही कांग्रेस MNS के साथ कंधे से कंधा मिलाकर गठबंधन में खड़ी है.

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महाराष्ट्र चुनाव में अजब-गजब गठबंधन.
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  • महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस, MNS और उद्धव सेना के गठबंधन अलग-अलग स्वरूप में नजर आ रहे हैं
  • मुंबई में कांग्रेस ने MNS के साथ मंच साझा नहीं कर अकेले चुनाव लड़ रही है, जबकि अन्य जिलों में सहयोग जारी है
  • बीजेपी-एकनाथ शिंदे की शिवसेना का गठबंधन मुंबई BMC में मजबूत है लेकिन कई अन्य शहरों में दोनों दल आमने-सामने हैं
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मुंबई:

महाराष्ट्र की राजनीति में 'कौन किसके साथ है?' इस सवाल का जवाब अब जलेबी से भी ज्यादा जटिल और घुमाऊ हो चुका है. साल 2026 के नगर निकाय चुनावों BMC और अन्य पालिकाओं के लिए जो समीकरण सामने आ रहे हैं, उन्हें देखकर राजनीति के बड़े-बड़े दिग्गज भी चकरा गए हैं. कहीं कट्टर दुश्मन गले मिल रहे हैं, तो कहीं पुराने साथी एक-दूसरे की जड़ें काटने में लगे हैं.

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MNS से नफरत सिर्फ़ कांग्रेस का दिखावा?

जहां एक तरफ मुंबई में कांग्रेस ने वैचारिक मतभेदों और उत्तर भारतीय वोट बैंक के छिटकने के डर से राज ठाकरे की MNS के साथ मंच साझा करने से भी साफ इनकार कर दिया है और वहां वह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही है. वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र के कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में यही कांग्रेस MNS के साथ कंधे से कंधा मिलाकर गठबंधन में खड़ी है.

  • पुणे में जब अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से हाथ मिलाया, तो कांग्रेस ने इसे राजनीतिक अवसरवाद मानते हुए उनके खिलाफ अपना अलग मोर्चा उद्धव सेना के साथ बना लिया. पुणे में कांग्रेस ने उद्धव सेना और MNS के साथ मिलकर एक औपचारिक गठबंधन बनाया है.
  • यही स्थिति नासिक में भी दिखाई देती है, जहां उद्धव सेना, MNS, शरद पवार और कांग्रेस ने बीजेपी-शिंदे गठबंधन के खिलाफ एक साझा मोर्चा खोल रखा है. 
  • इसी तरह उल्हासनगर और भिवंडी जैसे शहरों में भी कांग्रेस ने अपनी वैचारिक दूरियों को दरकिनार करते हुए उद्धव सेना और MNS के साथ गठबंधन किया है.
  • इचलकरंजी में तो कांग्रेस और MNS, शरद पवार की NCP के साथ मिलकर एक अलग त्रिकोणीय गठबंधन का हिस्सा हैं.
  • अमरावती में भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले मोर्चे में MNS एक सहयोगी की भूमिका में नजर आ रही है. 

बीजेपी-शिंदे की “कहीं दोस्ती कहीं कुश्ती”!

महाराष्ट्र निकाय चुनाव 2026 में बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का रिश्ता कहीं दोस्ती, कहीं कुश्ती जैसा नजर आ रहा है. जहां मुंबई BMC में दोनों दल मजबूती से साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं और सीटों का बंटवारा BJP 137 और शिवसेना 90 भी तय हो चुका है, वहीं राज्य के कई अन्य महत्वपूर्ण शहरों में ये दल एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं. 

  • नवी मुंबई में यह मुकाबला सबसे कड़ा है, जहां बीजेपी के गणेश नाईक और शिंदे सेना के बीच गठबंधन न हो पाने के कारण दोनों दल स्वतंत्र रूप से सभी सीटों पर आमने-सामने हैं.
  • उल्हासनगर में भी शिंदे सेना ने स्थानीय ओमी कलानी गुट के साथ हाथ मिलाया है, जबकि बीजेपी यहां स्वतंत्र चुनाव लड़ रही है.
  • अंबरनाथ और बदलापुर जैसे इलाकों में तो स्थिति इतनी तनावपूर्ण रही है कि यहां दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें भी हुई हैं और चुनाव के बाद बीजेपी ने शिंदे सेना को सत्ता से बाहर रखने के लिए स्थानीय स्तर पर कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर 'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' जैसा गठबंधन तक बना लिया था. 
  • इसके अलावा नासिक में भी बीजेपी स्वतंत्र लड़ रही है, जबकि शिंदे सेना ने यहां अजीत पवार की एनसीपी के साथ गठबंधन किया है. इन टकरावों के पीछे मुख्य कारण स्थानीय वर्चस्व की लड़ाई और जमीनी स्तर पर पार्टी कैडर का आपसी विरोध है, जिसके चलते शीर्ष नेतृत्व की गठबंधन की कोशिशें कई नगर निगमों में सफल नहीं हो पाईं.

चाचा-भतीजे का प्यार भी बस पुणे तक सीमित?

पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ को छोड़कर, अधिकांश अन्य शहरों में चाचा-भतीजे गुट अलग-अलग या प्रतिद्वंद्वी गठबंधनों का हिस्सा हैं.

मुंबई BMC: यहां दोनों गुट पूरी तरह अलग हैं. शरद पवार की NCP (SP) उद्धव सेना और MNS के साथ गठबंधन में है, जबकि अजीत पवार की NCP यहाँ स्वतंत्र चुनाव लड़ रही है.

ठाणे: यहां भी शरद पवार गुट उद्धव सेना और MNS के मोर्चे में शामिल है, जबकि अजीत पवार गुट अकेले मैदान में हैं.

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नवी मुंबई: इस शहर में स्थिति और भी बिखरी हुई है, जहां शरद पवार गुट और अजित पवार गुट दोनों ही एक-दूसरे और अन्य दलों के खिलाफ स्वतंत्र चुनाव लड़ रहे हैं.

नासिक और नागपुर: इन क्षेत्रों में शरद पवार गुट 'महा विकास अघाड़ी' के बैनर तले लड़ रहा है, जबकि अजित पवार गुट कई जगहों पर 'महायुति' का हिस्सा है या स्वतंत्र लड़ रहा है.

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इस राजनीतिक सर्कस के पीछे कुछ बड़े कारण

  • अस्तित्व की लड़ाई: उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे जानते हैं कि अगर मुंबई हाथ से गई, तो वजूद संकट में आ जाएगा. इसलिए पुरानी कड़वाहट भुलाकर 'ठाकरे ब्रांड' को एक किया गया है.
  •  स्थानीय जरूरत; यह चुनाव राज्य का नहीं, गली-मोहल्ले का है. कई जिलों में स्थानीय नेताओं के आपसी संबंध पार्टी की विचारधारा से बड़े हो गए हैं. यही वजह है कि पुणे में जो दोस्त हैं, वो मुंबई में दुश्मन.
  • वोटों का बिखराव रोकना; विपक्षी दलों को समझ आ गया है कि अगर वे अलग-अलग लड़े, तो बीजेपी-शिंदे गठबंधन को हराना नामुमकिन होगा. इसलिए 'दुश्मन का दुश्मन दोस्त' वाला फॉर्मूला भी कई जगह अपनाया गया है.
  • महाराष्ट्र की जनता अब इस बात से भ्रमित है कि वह जिसे वोट दे रही है, वह चुनाव के बाद किस पाले में खड़ा होगा. यह चुनाव विचारधारा से ज़्यादा 'जोड़-तोड़ की गणित' का है, पर जनता तय करेगी 'असली' कौन है.


 

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