ठाणे में असली शिवसेना कौन? एक तरफ शिंदे की सरदारी और दूसरी तरफ उद्धव-राज ठाकरे का अस्तित्व दांव पर

2017 के चुनाव में शिवसेना और बीजेपी अलग-अलग लड़े थे. तब अविभाजित शिवसेना ने 67 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था, जबकि बीजेपी 23 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर थी. NCP ने 34 और कांग्रेस ने 3 सीटें जीती थीं. लेकिन अब बहुत कुछ बदल चुका है.

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महाराष्ट्र निकाय चुनाव में असली शिवसेना को लेकर ठाणे में गजब की सियासत चल रही है.
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  • ठाणे नगर निगम चुनाव एकनाथ शिंदे के राजनीतिक दबदबे की परीक्षा माना जा रहा है.
  • महायुति गठबंधन में शिवसेना (शिंदे गुट) 87 सीटों पर मुकाबला कर रही है जबकि BJP को 40 सीटें मिली हैं.
  • उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की MNS ने गठबंधन किया है जिसमें NCP भी शामिल है.
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ठाणे:

Maharashtra Municipal Corporation Elections 2026: महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनाव के लिए मुंबई से सटा ठाणे शहर इस वक्त राज्य की राजनीति का बड़ा अखाड़ा बन चुका है. यहाँ सिर्फ एक नगर निगम का चुनाव नहीं है, बल्कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के वजूद और दबदबे की अग्निपरीक्षा है. शिवसेना के कद्दावर और दबंग नेता और एकनाथ शिंदे के राजनीतिक गुरु आनंद दीघे की विरासत और शिंदे के प्रभाव वाले इस शहर में इस बार समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं. शिवसेना की टूट ने ठाणे की गलियों में दो फाड़ कर दिए हैं, जिससे यह लड़ाई अपनों के ही बीच दिखती है! ठाणे में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का पलड़ा भारी है, यही वजह है कि महायुति के गठबंधन में शिवसेना (शिंदे गुट) बड़े भाई की भूमिका में है. 

131 में से 87 सीटों पर ताल ठोक रही शिंदे गुट वाली शिवसेना

कुल 131 सीटों में से शिवसेना 87 सीटों पर ताल ठोक रही है, जबकि बीजेपी के हिस्से 40 सीटें आई हैं. 4 सीटें मुंब्रा विकास आघाड़ी के लिए छोड़ी गई हैं. शिंदे का दबदबा ऐसा है कि अविभाजित शिवसेना के 67 में से 60 से अधिक पूर्व पार्षद उनके साथ होने का दावा है. बीजेपी के लिए ठाणे हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है, लेकिन शिंदे के साथ आने से उसकी ताकत बढ़ी है.

साथ चुनाव लड़ रहे उद्धव और राज ठाकरे

ठाणे में सबसे दिलचस्प उलटफेर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच देखने को मिल रहा है. ठाकरे ब्रांड को बचाने के लिए शिवसेना (उद्धव गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने हाथ मिलाया है. इस गठबंधन में शरद पवार की NCP भी साथ है. इस खेमे में शिवसेना (UBT) लगभग 67 सीटों पर, NCP (SP) 37 और MNS 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. 

उद्धव ठाकरे के लिए यह चुनाव यह साबित करने का है कि क्या वे बिना शिंदे के अपने पुराने गढ़ में सेंध लगा सकते हैं. वहीं, राज ठाकरे की MNS यहाँ अपनी खोई हुई जमीन तलाश रही है.

कांग्रेस की एकला चलो की नीति

वहीं कांग्रेस ने ठाणे में 'एकला चलो रे' की रणनीति अपनाई है. कांग्रेस 96 सीटों पर अकेले दम पर लड़ रही है. शहर के कुछ खास पॉकेट्स में कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक है, लेकिन शिवसेना और बीजेपी के दोतरफा हमले के बीच कांग्रेस के लिए अपनी सीटें बचाना किसी चुनौती से कम नहीं है.

ठाणे में पिछले चुनाव में कैसा रहा था नतीजा

2017 के चुनाव में शिवसेना और बीजेपी अलग-अलग लड़े थे. तब अविभाजित शिवसेना ने 67 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था, जबकि बीजेपी 23 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर थी. NCP ने 34 और कांग्रेस ने 3 सीटें जीती थीं.

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अब 2026 में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि शिवसेना दो टुकड़ों में है. एकनाथ शिंदे के पास 'धनुष-बाण' और पार्षद दोनों हैं, जबकि उद्धव ठाकरे के पास सहानुभूति और 'मशाल' की उम्मीद है.

असली शिवसैनिक कौन, तय करेंगे नतीजे 

इस बार का सबसे बड़ा एक्स-फैक्टर है शिंदे बनाम ठाकरे की सीधी जंग. ठाणे की जनता के लिए ये तय करना मुश्किल है कि असली शिवसैनिक कौन है, वो जो सत्ता में है या वो जो संघर्ष कर रहा है! इसके अलावा, बीजेपी का बढ़ता ग्राफ और MNS-उद्धव गुट का साथ आना नए समीकरण पैदा कर रहा है. अगर शिंदे ठाणे हारते हैं, तो उनके नेतृत्व पर सवाल उठेंगे, और अगर उद्धव यहाँ नहीं जीत पाए, तो ठाणे से ठाकरे नाम का प्रभाव कम हो सकता है.

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