- महाराष्ट्र के जालना जिले में ईंधन की कालाबाजारी रोकने के लिए किसानों को प्रामाणिकता साबित करनी होगी
- पेट्रोल या डीजल लेने के लिए ट्रैक्टर की आरसी बुक की मूल प्रति या स्वयं प्रमाणित फोटोकॉपी दिखानी अनिवार्य है
- फार्मर आईडी न होने पर किसानों को हर बार पेट्रोल पंप पर आधार, मोबाइल नंबर और नाम दर्ज करना होगा
महाराष्ट्र के जालना जिले में ईंधन की कालाबाजारी और अवैध भंडारण को रोकने के लिए प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है. जिला प्रशासन के नए आदेश के मुताबिक, अब किसानों को पेट्रोल-डीजल पंपों से ईंधन लेते समय अपनी प्रामाणिकता साबित करनी होगी. बिना जरूरी दस्तावेजों के किसी भी किसान को पंप से डीजल या पेट्रोल नहीं दिया जाएगा. प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईंधन केवल जरूरतमंद और वास्तविक किसानों तक ही पहुंचे.
ये दस्तावेज दिखाना हुआ अनिवार्य
नए नियमों के अनुसार, ईंधन खरीदने के लिए आने वाले किसानों के पास उनके ट्रैक्टर की आरसी बुक (RC Book) की मूल प्रति (ओरिजिनल) या फिर स्वयं प्रमाणित (Self-Attested) फोटोकॉपी होना अनिवार्य है. इसके साथ ही, किसानों को अपना 'फार्मर आईडी' (किसान पहचान पत्र) भी दिखाना होगा.
पहचान पत्र न होने पर क्या करें?
प्रशासन ने उन किसानों के लिए भी विकल्प रखा है जिनके पास फिलहाल फार्मर आईडी उपलब्ध नहीं है. ऐसे किसानों को हर बार ईंधन खरीदते समय पेट्रोल पंप पर रखे विशेष रजिस्टर में अपना [Aadhaar Redacted], मोबाइल नंबर, पूरा नाम दर्ज करना होगा और वहां अपने हस्ताक्षर करने होंगे.
तहसीलदार की टीम करेगी औचक जांच
इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने और नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए प्रशासन ने सख्त निगरानी तंत्र तैयार किया है. पेट्रोल पंपों पर दर्ज की जाने वाली सभी जानकारियों और रजिस्टरों के रिकॉर्ड की सीधी जांच तहसीलदार की टीम द्वारा की जाएगी. अगर किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन के इस कदम से जहां कालाबाजारी पर लगाम लगेगी, वहीं वास्तविक किसानों को बिना किसी परेशानी के ईंधन मिल सकेगा.
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