80 फीसदी बर्बाद हुई कोंकण के मशहूर हापूस आम का फसल, मुआवजे को लेकर किसानों ने मुंबई-गोवा हाईवे पर किया चक्काजाम

सिंधुदुर्ग के आम हाफूस यानी अल्फांसो और काजू उत्पादकों को इस साल प्रकृति की मार के कारण भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. बेमौसम बारिश, नवंबर-दिसंबर में देर तक रही गर्मी और फिर अचानक आई शीत लहर के कारण आम के पेड़ों पर मोहर आने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई.

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मुंबई-गोवा राष्ट्रीय हाईवे पर सिंधुदुर्ग में नांदगांव के पास आज यानी 23 मार्च को आम उत्पादक किसानों ने चक्काजाम किया है. हाफूस आम के फसल बर्बाद होने के बाद उचित मुआवजा के लिए किसानों ने 'रास्ता रोको आंदोलन' किया है. वहीं चक्काजाम के कारण हाईवे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है. स्थिति को देखते हुए सिंधुदुर्ग पुलिस का भारी अमला मौके पर पहुंच गया है. 

किसानों ने दावा किया है कि कोंकण के मशहूर हाफूस आम का फसल 80 प्रतिशत बर्बाद हो गया है. जानकारी के मुताबिक, इस साल कोंकण में लगभग 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आम के बाग प्रभावित हुए हैं. हाफूस अल्फांसो आम को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जिससे उत्पादक किसान भारी कर्ज और आर्थिक तंगी में हैं. स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी भी इस आंदोलन में शामिल हुए हैं.

हाफूस आम को भारी नुकसान

बेमौसम बारिश, खराब मौसम और कीड़ों के हमले के कारण इस साल महाराष्ट्र में हाफूस आम के उत्पादन में करीब 80% तक की भारी गिरावट का दावा किया गया है. कोंकण क्षेत्र यानी रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग सबसे अधिक प्रभावित है, जहां आम के पेड़ से फूल झड़ने से उत्पादन पिछले साल की तुलना में काफी कम हो गया है. 

स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी भी इस आंदोलन में शामिल हुए हैं. इस दौरान उन्होंने कहा, 'जब तक आम उत्पादक किसानों को उनके नुकसान का उचित मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक वो सड़क से नहीं हटेंगे.'

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आम-काजू के फसल पर रोगों और कीटों का हमला

बता दें कि सिंधुदुर्ग के आम हाफूस यानी अल्फांसो और काजू उत्पादकों को इस साल प्रकृति की मार के कारण भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. बेमौसम बारिश, नवंबर-दिसंबर में देर तक रही गर्मी और फिर अचानक आई शीत लहर के कारण आम के पेड़ों पर मोहर आने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई. अधिक उमस और बदलते तापमान की वजह से आम और काजू की फसल पर विभिन्न रोगों और कीटों का हमला हुआ, जिससे फूल झड़ गए. कृषि विभाग और कोंकण कृषि विद्यापीठ की रिपोर्ट के अनुसार, सिंधुदुर्ग में इस साल आम का उत्पादन औसतन से काफी हद तक तक घट गया है. जहां पहले रोजाना 50-60 ट्रक आम मुंबई भेजे जाते थे, अब केवल 2-3 ट्रक ही जा पा रहे हैं.

किसानों का दावा- 80 प्रतिशत तक फसल बर्बाद

साल  2025 में राज्य में 5.19 लाख टन आम का उत्पादन हुआ, जिसमें रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग का संयुक्त रूप से औसत 250,845 टन का योगदान रहा. इनमें से अल्फोंसो आम का हिस्सा 225,756 टन था. अब लगभग 80% के संभावित नुकसान के साथ आम उत्पादक गंभीर रूप से प्रभावित होंगे. आम की खेती इन दोनों जिलों में बड़ी संख्या में किसानों के लिए आय का प्रमुख स्रोत है.

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उचित मुआवजे की मांग

किसान नेता राजू शेट्टी के नेतृत्व में किसान सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं. आंदोलन कर रहे किसानों का कहना कि आम के लिए 5,000 रुपये प्रति पेड़ या 5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा दिया जाए. वहीं काजू के लिए 3 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की आर्थिक सहायता मिले. किसानों ने संकट में फंसे बागवानों के लिए पुराने कर्ज की माफी और नई कर्ज सीमा को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 6 लाख रुपये करने की मांग की है. 

किसानों का कहना है कि पिछले 50-60 वर्षों में उन्होंने कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी, जहां बाग पूरी तरह खाली हो गए हों, इसलिए वो इसे प्राकृतिक आपदा घोषित कर तत्काल मदद की मांग कर रहे हैं.

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