- अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में दोनों एनसीपी के विलय को लेकर मतभेद सामने आए हैं
- अजित पवार गुट विलय के पक्ष में जल्दबाजी नहीं चाहता जबकि शरद पवार गुट में विलय को लेकर तेजी देखी जा रही है
- शशिकांत शिंदे, जयंत पाटिल और राजेश टोपे विलय के समर्थक हैं, जबकि तटकरे, प्रफुल्ल पटेल और मुंडे असमंजस में हैं
अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा हो गया है कि दोनों एनसीपी का क्या अब विलय हो जाएगा? सूत्रों की मानें तो दोनों NCP के विलय पर फिलहाल मतभेद है. अजित पवार गुट के नेताओं में दोनों एनसीपी के विलय को लेकर अलग-अलग राय है. हालांकि, सभी का कहना है कि विलय की प्रक्रिया में सुनेत्रा पवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी. इस बीच एक सवाल ये भी खड़ा हो रहा है कि अजित पवार के बदले मंत्रिमंडल में एनसीपी की ओर से कौन होगा?
विलय के पक्ष में कौन-कौन?
अजित गुट का मानना है कि राजनीतिक फायदे के लिए इतनी जल्द विलय का मुद्दा उठाया जा रहा है. अजित पवार के नेता फौरन विलय नहीं चाहते, लेकिन शरद पवार गुट में इसे लेकर जल्दबाजी देखने को मिल रही है. शशिकांत शिंदे, जयंत पाटिल और राजेश टोपे विलय के पक्ष में हैं. लेकिन तटकरे, प्रफुल्ल पटेल, मुंडे और भुजबल विलय को लेकर अभी असमंजस में हैं.
कौन लेगा NCP में विलय का फैसला?
हालांकि, कहा जा रहा है कि एनसीपी के भविष्य पर 'पवार परिवार' का फैसला ही अंतिम होगा. दोनों एनसीपी के विलय को लेकर शरद पवार और सुप्रिया सुले समेत पूरे परिवार की सहमति जरूरी होगी. विलय की प्रक्रिया में सुनेत्रा पवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी. लेकिन प्रफुल्ला पटेल ने बताया कि हमने सुनेत्रा पवार के नाम पर कोई चर्चा नहीं की है. यह हमारी पार्टी का आंतरिक मामला है.
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CM फडणवीस से मिलने के बाद प्रफुल्ल पटेल बोले- जल्द लेना होगा फैसला
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने के बाद एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि हम सब अभी दुख में हैं. आज तीसरा दिन है और सारे रीति-रिवाज पूरे करने हैं. लेकिन हम महायुति अलायंस के पार्टनर हैं. इसलिए हमें जल्द से जल्द डिप्टी सीएम के तौर पर अजित पवार की जगह भरने का सही फैसला लेना होगा. लेकिन साथ ही मैं यह साफ करना चाहता हूं कि कोई भी फैसला लेने से पहले हमें अपने लोगों की 'जन भावना' पर भी सोचना होगा. हमें परिवार को दुख से उबरने के लिए कुछ समय देना होगा. हम जल्द ही सुनेत्रा पवार और परिवार से पार्टी के आगे के कदम के बारे में बात करेंगे.
क्या अजित पवार ले चुके थे विलय का फैसला
इससे पहले खबर आ रही थी कि अजित पवार और शरद पवार की दोनों NCP को एक साथ लाने के लिए 14 मीटिंग हुईं. ये मीटिग अजित पवार ने की थीं. 8 फरवरी को यह घोषणा होनी थी कि दोनों पार्टी एक साथ आ गई हैं. बीजेपी के सीनियर नेताओं को मीटिंग की जानकारी दी गई थी. जिला परिषद चुनाव के नतीजों के अगले दिन दोनों पार्टियों के विलय की घोषणा करने का फैसला किया गया, इसलिए उम्मीदवारों को 'बिगुल' के बजाय 'घड़ी' पर चुनाव लड़ाने का फैसला किया गया. नेशनलिस्ट पार्टी के मर्जर के लिए अजित पवार, जयंत पाटिल, सुप्रिया सुले और अमोल कोल्हे के बीच 14 मीटिंग हुईं. आखिरी मीटिंग के बाद, अजित पवार ने शरद पवार से मुलाकात की और उन्हें मीटिंग में हुई बातचीत के बारे में बताया. उस मीटिंग में शरद पवार ने दोनों पार्टियों के मर्जर को हरी झंडी दे दी थी. उसके बाद ही उम्मीदवारों ने बिगुल के बजाय घड़ी पर चुनाव लड़ने का फैसला किया.
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