- देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महायुति ने महाराष्ट्र में निगम चुनावों में बीजेपी की प्रचंड जीत हासिल की है
- फडणवीस ने मुंबई में मराठी वोटों पर ठाकरे परिवार के दावों को चुनौती देते हुए मजबूत पकड़ बनाई है
- सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे और स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता देने से चुनाव रणनीति सफल रही है
मेरा पानी उतरता देख, मेरे किनारे पर घर मत बना लेना, मैं समुंदर हूं, लौट कर वापस आऊंगा... 2019 के विधानसभा चुनाव में अपने नारे ‘मैं वापस आऊंगा' का मजाक बनाने पर देवेंद्र फडणवीस ने यह शेर विधानसभा में बतौर नेता प्रतिपक्ष सुनाया था. तब से आज तक हर बार उन्होंने इसे सही साबित कर दिखाया है.आज महाराष्ट्र में निगम चुनावों में बीजेपी की प्रचंड जीत का सेहरा फडणवीस के सिर पर ही बाँधा जा रहा है. उनकी अगुवाई में महायुति ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया. विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत को निगम चुनावों में जारी रख बीजेपी ने साबित कर दिया कि राज्य की जनता का विश्वास उस पर और ज़्यादा बढ़ा है.
फडणवीस की चुनावी कामयाबी का एक पहलू एनसीपी की बड़ी हार के रूप में सामने आया है. पुणे में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की और पिंपरी-चिंचवड़ में भी फिर से सत्ता पर क़ाबिज़ हुई. इसके गहरे राजनीतिक अर्थ हैं. बीजेपी की यह जीत एनसीपी के अजित पवार और शरद पवार गुटों के साथ आने के बावजूद हुई है. इनमें न केवल सीटों का तालमेल हुआ बल्कि साझा घोषणापत्र भी आया. बीजेपी पर तीखे हमले भी किए गए. इसे परिवार की एकता बताया गया. लेकिन यह दाँव नहीं चला.
अब महायुति सरकार पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है. कभी कांग्रेस के प्रभुत्व वाला यह क्षेत्र पूरी तरह से बीजेपी के प्रभावक्षेत्र में आ चुका है.वहीं, फडणवीस महायुति के निर्विवादित नेता के रूप में भी स्थापित हुए हैं. आज की जीत से उन्होंने साबित किया कि विधानसभा चुनाव का प्रचंड बहुमत संयोग नहीं था. वे अब अधिक आत्मविश्वास के साथ फ़ैसले करेंगे. यह उनके सरकार को भी स्थायित्व प्रदान करेगा. सहयोगी दलों को भी स्पष्ट संदेश है कि सभी तरह के विकल्प खुले हुए हैं.
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