भिवंडी में मेयर पद को लेकर घमासान, कठघरे में सपकाल, राहुल गांधी तक पहुंचा विवाद

Bhiwandi Mayoral Election: भिवंडी मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस में विवाद, पूर्व विधायक मोमिन ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि हर्षवधर्न सपकाल भाजपा को लाभ पहुंचाने की खेल कर रहे हैं.

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  • भिवंडी जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर महाराष्ट्र पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए
  • कांग्रेस और एनसीपी के पास भिवंडी नगर निगम में कुल 42 सीटें हैं, जिससे वे मेयर पद के करीब हैं
  • मोमिन का आरोप- राज्य नेतृत्व ने भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में 42 पार्षदों का समर्थन मोड़ने का निर्णय लिया
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मुंबई:

भिवंडी मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी में बड़ा विवाद सामने आया है. भिवंडी जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व विधायक एडवोकेट अब्दुल राशिद ताहिर मोमिन ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र राज्य कांग्रेस नेतृत्व ने भाजपा को लाभ पहुंचाने वाला समझौता किया है. भिवंडी में कांग्रेस और एनसीपी मिलकर बहुमत के आंकड़े से सिर्फ कुछ ही कदम दूर हैं. निर्दलीयों को मिलाकर यहां कांग्रेस मेयर पद हासिल कर सकती है, लेकिन अंदरूनी फूट से मामला बिगड़ता हुआ नजर आ रहा है.  

कांग्रेस नेता कर रहे बीजेपी का समर्थन!

मोमिन के अनुसार, राज्य नेतृत्व ने समाजवादी पार्टी के एक विधायक के साथ मिलकर कथित तौर पर 42 पार्षदों (30 कांग्रेस और 12 राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के) का समर्थन भाजपा उम्मीदवार नारायण रतन चौधरी के पक्ष में मोड़ने का फैसला किया है. उन्होंने आगे आरोप लगाया है कि 18 फरवरी 2026 को एक आधिकारिक व्हिप जारी किया गया था, जिसमें पार्षदों पर बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने का दबाव डाला गया था, जबकि कांग्रेस के पास अपना महापौर चुनने के लिए पर्याप्त संख्या बल था.

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मतदाताओं के साथ विश्वासघात... 

90 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस और एनसीपी के पास कुल 42 सीटें हैं. मोमिन का तर्क है कि पांच निर्दलीय विधायकों के समर्थन से कांग्रेस मेयर का पद आसानी से जीत सकती है. इसलिए उन्होंने भाजपा को समर्थन देने के कथित कदम को "राजनीतिक सौदेबाजी" करार दिया है और राज्य नेतृत्व पर पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है.

ये है सीटों का गणित 

इस विवाद ने भिवंडी में आक्रोश पैदा कर दिया है, जो अल्पसंख्यक बहुल शहर है. यहां 48 पार्षद अल्पसंख्यक समुदाय से हैं. आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि जो पार्टियां सार्वजनिक रूप से खुद को धर्मनिरपेक्ष और भाजपा विरोधी बताती हैं, वे एक महत्वपूर्ण स्थानीय चुनाव में भाजपा उम्मीदवार का समर्थन क्यों करेंगी? पिछले महीने हुए भिवंडी-निजामपुर नगर निगम चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी कांग्रेस अब अपना महापौर और उप-महापौर बनाने के लिए तैयार दिख रही है. इस चुनाव में कांग्रेस को सर्वाधिक 30 सीटें मिली. उसके बाद भाजपा (22), शिवसेना (12), राकांपा-एसपी (12), समाजवादी पार्टी (6), कोणार्क विकास अघाड़ी (4) और भिवंडी विकास अघाड़ी (3) का स्थान रहा. एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी जीत दर्ज की थी.

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