Ujjain Land Scam: मध्यप्रदेश के उज्जैन में जमीन की खरीद-फरोख्त के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जहां असली किसान की जमीन पर नकली पहचान बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी की गई. आरोपियों ने असली जमीन मालिक के नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए अपने फोटो लगाकर फर्जी आधार कार्ड तैयार किया और 1 करोड़ 40 लाख रुपये में जमीन का सौदा कर लिया. 36 लाख रुपये की पहली किस्त भी ले ली गई, लेकिन दूसरी किश्त लेने से पहले ही पूरे मामले का खुलासा हो गया. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है.
फर्जी मालिक बनकर 1.40 करोड़ में किया सौदा
घटना के मुताबिक मानपुरा निवासी किसान रविंद्र सिंह को दलाल मंगल सिंह ने एक व्यक्ति से मिलवाया, जिसने खुद को दिलीप सिंह बताया. उसने सलामता गांव में करीब 12 बीघा जमीन बेचने की बात कही. खसरा और दस्तावेज दिखाकर भरोसा जीतते हुए 1 करोड़ 40 लाख रुपये में सौदा तय किया गया.
फर्जी आधार कार्ड से बनाई पहचान
आरोपियों ने इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया. उन्होंने असली जमीन मालिक के नाम और पते का इस्तेमाल कर अपने फोटो के साथ फर्जी आधार कार्ड तैयार करवाया. इसी नकली पहचान के आधार पर एग्रीमेंट कर लिया गया और 9 मई को रविंद्र से 36 लाख रुपये ले लिए.
जमीन दिखाने पर खुला राज
जब रविंद्र सिंह अपने परिजनों को जमीन दिखाने ले गए, तब असली मालिक से मुलाकात हुई. इस दौरान खुलासा हुआ कि जिस व्यक्ति से उन्होंने सौदा किया था, वह असली दिलीप सिंह नहीं बल्कि एक नकली व्यक्ति था. इसके बाद पीड़ित ने तुरंत माधवनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई.
दूसरी किश्त के जाल में फंसे आरोपी
मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस ने रणनीति बनाई. आरोपियों को दूसरी किश्त के 35 लाख रुपये लेने के बहाने बुलाया गया. जैसे ही दोनों मौके पर पहुंचे, पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
आरोपी की असली पहचान सामने आई
टीआई गजेंद्र पचौरिया के अनुसार, जो व्यक्ति खुद को दिलीप सिंह बता रहा था, उसका असली नाम भैरूसिंह है, जो खेड़ा चितावलिया गांव का निवासी है. वह फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोगों को ठगने वाले अंतरजिला गिरोह से जुड़ा हुआ है. वहीं उसका साथी मंगल सिंह रलायती गांव का रहने वाला है.
तीसरे खाते में डाला गया चेक
जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम को छिपाने के लिए तीसरे व्यक्ति का इस्तेमाल किया गया. रविंद्र द्वारा दिए गए 25 लाख रुपये के चेक को किसी अन्य दिलीप सिंह के बैंक खाते में जमा कराया गया था. इससे इस गिरोह की सुनियोजित साजिश का पता चलता है.
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
पुलिस ने दोनों आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है. फर्जी दस्तावेजों और आधार कार्ड बनाने वाले नेटवर्क की भी जांच की जा रही है. पुलिस का कहना है कि जल्द ही गिरोह के अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जाएगा.
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