Success Story: सफलता उम्र की मोहताज नहीं... 44 साल की रश्मि रावत बनीं पावरलिफ्टिंग चैंपियन, जीता गोल्ड मेडल

कहते हैं कि उम्र सिर्फ एक संख्या होती है और इसे सच कर दिखाया है मध्य प्रदेश के सागर की रहने वाली रश्मि रावत ने. 44 साल की उम्र में रश्मि रावत ने पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल जीता है.

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44 की उम्र में जीता गोल्ड मेडल

Rashmi Rawat Success Story: सागर की रहने वाली रश्मि रावत ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर स्टेट लेवल पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन किया है. ग्वालियर में आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रदेशभर से खिलाड़ी शामिल हुए थे, जिसमें सागर की रश्मि रावत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया और पावरलिफ्टिंग चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया.

सूबेदार के पद पर पदस्थ है रश्मि रावत

रश्मि रावत वर्तमान में सागर स्थित जवाहरलाल नेहरू पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में सूबेदार के पद पर पदस्थ हैं. पुलिस विभाग की कठिन और जिम्मेदारी भरी नौकरी के साथ-साथ घर और बच्चों की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने जिस तरह अपने सपने को पूरा किया, वह महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया है.

रश्मि मूल रूप से पन्ना जिले की रहने वाली हैं. उनकी शादी सागर में हुई, जिसके बाद उन्होंने अपने नए जीवन की शुरुआत की. बचपन से ही उन्हें खेलों और विशेष रूप से पावरलिफ्टिंग में रुचि थी, लेकिन पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों के चलते वे अपने इस शौक को आगे नहीं बढ़ा सकीं. समाज की परंपरागत सोच और महिलाओं को सीमित दायरे में रखने वाली मानसिकता के बीच उन्होंने अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया.

44 साल की उम्र में पूरा हुआ सपना

रश्मि बताती हैं कि बचपन से ही उन्हें अक्सर यह कहा जाता था कि लड़कियों को चारदीवारी में रहना चाहिए और घर-परिवार तक ही सीमित रहना चाहिए, लेकिन उन्होंने इन रूढ़िवादी सोच को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. शादी और नौकरी के बाद भी उन्होंने अपने सपने को जीवित रखा और सही समय आने पर उसे पूरा करने की ठानी.

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उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग में नौकरी लगने के बाद उन्होंने जिम ज्वाइन किया और यहीं से उनके पावरलिफ्टिंग सफर की असली शुरुआत हुई. शुरुआत आसान नहीं थी. एक तरफ नौकरी का दबाव, दूसरी तरफ परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी, ऐसे में खुद के लिए समय निकालना बेहद मुश्किल था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और रोजाना नियमित अभ्यास जारी रखा.

कई बार मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा

रश्मि दो बच्चों की मां हैं और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य को पाने के लिए दिन-रात मेहनत की. कई बार उन्हें थकान और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने खुद को कभी टूटने नहीं दिया. उनका कहना है कि यदि इंसान के अंदर कुछ करने का जुनून हो तो उम्र और परिस्थितियां कभी बाधा नहीं बनतीं.

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सागर की जवाहरलाल नेहरू पुलिस ट्रेनिंग सेंटर की सूबेदार रश्मि रावत बनीं पावरलिफ्टिंग चैंपियन

रश्मि का सपना 40 साल की उम्र के बाद जाकर पूरा हुआ है. उन्होंने साबित कर दिया कि सपनों को पूरा करने के लिए उम्र मायने नहीं रखती, बल्कि जरूरी है आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत. उनकी इस उपलब्धि से न केवल पुलिस विभाग बल्कि पूरा सागर जिला गौरवान्वित महसूस कर रहा है.

स्टेट लेवल पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में जीता गोल्ड मेडल

ग्वालियर में आयोजित स्टेट लेवल पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में रश्मि ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया. प्रतियोगिता में प्रदेशभर से आए खिलाड़ियों के बीच मुकाबला काफी कठिन था, लेकिन रश्मि ने अपने आत्मविश्वास और मजबूत तैयारी के दम पर जीत दर्ज की. रश्मि की सफलता आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो जिम्मेदारियों और सामाजिक बंधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देती हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि हौसले मजबूत हों तो हर मुश्किल आसान हो जाती है.

रश्मि रावत की इस उपलब्धि पर पुलिस विभाग, उनके परिवार और शुभचिंतकों ने खुशी जताई है. लोगों का कहना है कि रश्मि ने न केवल अपने सपने को साकार किया, बल्कि समाज की सोच बदलने का भी काम किया है.

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