Shankaracharya Avimukteshwarananda Controversy: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला मध्य प्रदेश में गरमाता जा रहा है. प्रयागराज के माघ मेले में हुए विवाद के बाद एमपी के कई शहरों जबलपुर, नीमच और उज्जैन में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं. कहीं मशाल जुलूस निकाला गया तो कहीं ज्ञापन सौंपा गया. संत समाज, ब्राह्मण समाज और राजनीतिक दलों ने इस घटना को साधु‑संतों का अपमान बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं.
जबलपुर में कांग्रेस ने निकाला मशाल जुलूस
जबलपुर में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के रथ रोकने का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. कांग्रेस ने मशाल जुलूस निकालकर विरोध जताया. रैली मालवीय चौक से लार्डगंज चौक तक निकाली गई. प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने यूपी सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की.
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि माघ मेले में शंकराचार्य को संगम तट पर स्नान करने से रोका गया, जो साधु‑संतों का अपमान है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.
नीमच में गौड़ ब्राह्मण समाज ने सौंपा ज्ञापन
नीमच में भी इस घटना को लेकर नाराजगी दिखाई दी. गौड़ ब्राह्मण समाज की महिला समिति के नेतृत्व में लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और तहसीलदार संजय मालवीय को ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में समाज ने आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अपने शिष्यों के साथ गंगा स्नान को जा रहे थे. तभी मेले में तैनात अधिकारियों ने उन्हें रोका और कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया.
समाजजनों का कहना है कि यह घटना न सिर्फ संत समाज की गरिमा पर चोट है, बल्कि इससे सनातन धर्मावलंबियों की भावनाएं भी आहत हुई हैं. महिला समिति ने शंकराचार्य से सार्वजनिक माफी, और भविष्य में संतों को मेले में सम्मानपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि सम्मान से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई तो विरोध तेज होगा.
उज्जैन में सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन
उज्जैन में मंगलवार को ब्राह्मण समाज, साधु‑संतों और पंडित‑पुजारियों ने रामघाट पर विशेष ‘सद्बुद्धि यज्ञ' किया. यज्ञ का उद्देश्य माघ मेला प्रशासन को “सद्बुद्धि” प्रदान करने की प्रार्थना बताई गई.
इस दौरान उपस्थित लोगों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से माफी मांगने की अपील की. घटना में शामिल अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की.
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, ये पूरा मामला प्रयागराज के माघ मेले से जुड़ा है. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि उन्हें नहान के समय संगम तट पर जाने से रोका गया. उनके साथ प्रशासनिक अधिकारियों ने अभद्रता की. उनके अनुयायियों के साथ मारपीट भी की गई. इसी घटनाक्रम के विरोध में एमपी के तीनों शहरों में विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन किए और इसे “दमनात्मक कार्रवाई” बताया.














