- मध्य प्रदेश के सतना जिले के किसान राम लौटन कुशवाहा अपनी जीवित रहते हुए तेरहवीं और वर्षी का आयोजन कर रहे हैं
- राम लौटन कुशवाहा दुर्लभ प्रजाति के पौधों और जड़ी-बूटियों के संरक्षण के लिए पूरे देश में पहचाने जाते हैं
- प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में किसान के कार्यों की प्रशंसा कर लोगों को प्रेरणा लेने की अपील की है
Unique Farmer Own Death Feast: मध्य प्रदेस के सतनाा जिले के उचेहरा क्षेत्र में एक ऐसा अनोखा आयोजन होने जा रहा है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है. यहां अतरबेदिया निवासी राम लौटन कुशवाहा अपने जीते जी अपनी तेरहवीं और वर्षी का आयोजन करने जा रहे हैं. ये किसान कोई मामूली किसान नहीं, बल्कि अनोखा किसान हैं, जिनकी प्रशंसा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी 'मन की बात' कार्यक्रम में चुके हैं.
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किसान ने 13 मई तय की है अपनी मृत्युभोज की तिथि, इलाके में चर्चा का विषय बना शोक संदेश कार्ड
दुर्लभ प्रजाति के पौधों और जड़ी-बूटियों के संरक्षण के लिए पूरे देश- प्रदेश में पहचाने जाने वाले किसान रामलोटन अपने छोटे से परिसर में दहीमन, भटकटैया, लौकी समेत कई विलुप्त होती वनस्पतियों को संरक्षित कर मिसाल बन चुके हैं. उनके कार्यों से देश के प्रधानमंत्री भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके, लेकिन वो अपनों के बीच हार गए, जिसके चलते उन्हें जीते जी अपना मृत्युभोज करना पड़ रहा है, जिसकी तिथि 13 मई निश्चित की की गई है.
अपनी अनोखी खेती से चर्चा में आए सतना जिले के किसान राम लौटन कुशवाहा
जैव विविधता संरक्षण के लिए सम्मानित किसान की “मन की बात” में पीएम मोदी कर चुके हैं तारीफ
गौरतबब है किसान राम लौटन कुशवाहा जैव विविधता संरक्षण के लिए किए गए कार्यों के लिए कई राज्यस्तरीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं. उनके कार्यों से प्रभावित होकर प्रधानमंत्री नरेंद मोदी अपने लोकप्रिय रेडिया कार्यक्रम 'मन की बात' में उनकी तारीफ कर चुके हैं. प्रधानमंत्री ने किसान राम लौटन कुशवाहा की कार्यों की प्रशंसा करते हुए लोगों को उनसे प्रेरणा लेन की अपील की है.
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बड़ा सवाल है किसान राम लौटन कुशवाहा जिंदा रहते हुए क्यों कर रहे हैं अपनी मृत्युभोज का आयोजन?
रिपोर्ट के मुताबिक किसान राम लौटन कुशवाहा जीवित रहते हुए अपनी मृत्युभोज का अनोखा आयोजन भावनात्मक और सामाजिक कारण से कर रहे हैं. दरअसल, कुछ समय पहले किसान ने शासकीय मेडिकल कॉलेज सतना में देहदान का संकल्प लिया था, जैसे ही यह बात गांव और रिश्तेदारों तक पहुंची, लोगों ने ताना देना शुरू कर दिया और कहा कि उन्होंने तेरहवीं और वर्षी का खर्च बचाने के लिए देहदान का फैसला लिया है.
देहदान के बाद मिले सामाजिक तानों के बाद किसान द्वारा छपवाया गया मृत्यु भोज का निमंत्रण पत्र
किसान राम लौटन कुशवाहा को अपने अनोखे कार्यों के लिए दो साल पहले मिला था जैव विविधता सम्मान
उल्लेखनीय है जड़ी बूटियों और दुर्लभ प्रजाति के पौधों को संरक्षित राम लौटन कुशवाहा के देशी म्यूजियम को देखने दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं. उनके अद्भुत कार्यों के लिए किसान राम लौटन कुशवाहा को साल 2024 में जैव विविधता प्रोत्साहन का प्रथम श्रेणी का पुरस्कार दिया जा चुका है. राजधानी भोपाल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्हें ट्रॉफी और पुरुस्कार राशि का चेक प्रदान किया गया था.
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