शादी के बाद भोज नहीं कराया, तो दंपत्ति को समाज से निकाला; कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

सागर जिले से सामाजिक बहिष्कार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां विधवा महिला से विवाह करने और समाज को भोज न कराने पर दंपत्ति को गांव और आसपास के इलाकों से बाहर कर दिया गया. पीड़ित परिवार को मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins

Widow Marriage Controversy: मध्य प्रदेश के सागर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक द्वारा विधवा महिला से शादी करना और उसके बाद समाज को भोज न कराना, दंपत्ति के लिए भारी पड़ गया. आरोप है कि समाज के कथित मुखिया ने इस बात से नाराज होकर दंपत्ति का सामाजिक बहिष्कार कर दिया. अब पीड़ित पति‑पत्नी न्याय की आस में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे हैं और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है.

यह मामला सागर जिले के ग्राम चितौरा का है. यहां रहने वाले राजेंद्र पटेल ने बताया कि करीब आठ माह पहले उन्होंने मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना के तहत एक विधवा महिला से विवाह किया था. महिला के पहले पति का निधन हो चुका था और उसकी एक छोटी बच्ची भी है.

पत्नी के साथ बच्ची को भी अपनाया

राजेंद्र ने बताया कि शादी के बाद उन्होंने न केवल महिला को पत्नी के रूप में स्वीकार किया, बल्कि उसकी बच्ची को भी अपनी संतान की तरह अपनाया. वे एक सामान्य परिवार की तरह साथ‑साथ रह रहे थे और अपनी नई जिंदगी को सकारात्मक रूप से आगे बढ़ा रहे थे.

समाज के मुखिया की शर्त बनी मुसीबत

पीड़ित युवक का आरोप है कि गांव के कुछ दबंग और समाज के कथित मुखिया को यह विवाह पसंद नहीं आया. शादी के बाद उनसे कहा गया कि समाज में स्वीकार्यता पाने के लिए पहले “कच्चा भोजन” और फिर “पक्का भोजन” पूरे समाज को कराना होगा.

Advertisement

भोज न कराने पर किया सामाजिक बहिष्कार

राजेंद्र के अनुसार, जब उन्होंने यह शर्त मानने से इनकार किया, तो समाज के मुखिया ने दंपत्ति के सामाजिक बहिष्कार का फरमान सुना दिया. उन्हें न सिर्फ अपने गांव में बल्कि आसपास के सीमावर्ती गांवों में भी अलग‑थलग कर दिया गया.

बच्ची तक को झेलनी पड़ रही परेशानी

दंपत्ति का कहना है कि इस बहिष्कार का सबसे ज्यादा असर उनकी पत्नी की छोटी बच्ची पर पड़ रहा है. उसे गांव के अन्य बच्चों के साथ खेलने नहीं दिया जाता. परिवार को किसी भी सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रम में बुलाया नहीं जाता, जिससे उनका जीवन बेहद कठिन हो गया है.

Advertisement

मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना का आरोप

पीड़ित परिवार का कहना है कि समाज के इस फैसले के कारण उन्हें लगातार मानसिक तनाव और सामाजिक अपमान झेलना पड़ रहा है. वे डर और दबाव में जीने को मजबूर हैं, जबकि उनका कोई दोष नहीं है.

मंगलवार को राजेंद्र पटेल अपनी पत्नी के साथ सागर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें समाज में सम्मान और सुरक्षा के साथ रहने का अधिकार दिलाया जाए.

Featured Video Of The Day
Bengal Elections 2026: Yogi के 'सिंघम' IPS Ajay Pal Sharma पर युध्द शुरू! | Sucherita Kukreti