मध्य प्रदेश: सागर में गेहूं खरीदी में बड़ा घोटाला, 600 बोरियों में गेहूं की जगह निकली मिट्टी

मध्य प्रदेश के सागर में 600 बोरियों में गेहूं की जगह मिट्टी निकलने से हड़कंप मच गया. जानकारी के मुताबिक, संदिग्ध बोरियां गोदाम में रखी जा रही थी. इसी दौरान कर्मचारियों को इन बोरियों को लेकर संदेह हो गया, जिसके बाद जांच की गई.

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मध्य प्रदेश के सागर जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी और भंडारण व्यवस्था में बड़ा घोटाला (Wheat Procurement Scam) सामने आया है. जिले के गंभीरिया स्थित लक्ष्मी नगर के श्री देव प्रभा वेयर हाउस में गेहूं की जगह मिट्टी से भरी बोरियां पहुंचने का मामला उजागर हुआ है. मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है. शुरुआती जांच में करीब 600 बोरियों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है. यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब प्रदेश सरकार किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी को लेकर पारदर्शिता और सख्ती के दावे कर रही है.

बोरियां खुली तो उड़ गए होश

जानकारी के अनुसार, शनिवार को हर्षिता स्व सहायता समूह केंद्र से ट्रक क्रमांक एमपी 15 जेडआर 9190 में भरकर करीब 600 बोरियां श्री देव प्रभा वेयर हाउस पहुंचाई गई थीं. ट्रक से बोरियां उतारकर गोदाम में रखी जा रही थीं. करीब 100 से अधिक बोरियां गोदाम में रखी जा चुकी थीं. इसी दौरान वेयरहाउस के कर्मचारियों को कुछ बोरियों में संदेह हुआ. जब बोरियों की जांच की गई तो सभी के होश उड़ गए. बोरियों में गेहूं की जगह बड़ी मात्रा में मिट्टी भरी हुई थी. कुछ बोरियों में नाम मात्र का गेहूं था, जबकि अधिकांश हिस्सा मिट्टी और खराब सामग्री से भरा मिला.

वापस भेजा गया 

कर्मचारियों ने तत्काल इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी. मामला सामने आते ही वेयरहाउस में अफरा-तफरी मच गई. इसके बाद जिन बोरियों को उतारा गया था, उन्हें दोबारा ट्रक में लोड कराया गया और पूरा माल वापस भेज दिया गया. यदि समय रहते जांच नहीं होती तो पूरा माल वेयरहाउस में जमा हो जाता और संभवतः यह गड़बड़ी कभी सामने नहीं आती.

इस पूरे मामले ने सरकारी गेहूं खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. लोगों का कहना है कि जब खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के गृह जिले में खरीदी और भंडारण की यह स्थिति है तो प्रदेश के अन्य जिलों में क्या हालात होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

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सूत्रों के अनुसार इस मामले की जड़ें बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रही हैं. संभावना जताई जा रही है कि खरीदी केंद्र पर पहले अच्छी गुणवत्ता का गेहूं खरीदा गया होगा, लेकिन बाद में उसे बदलकर अमानक और मिट्टी मिश्रित गेहूं भेजा गया. सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि खरीदी के दौरान गुणवत्ता जांच सही तरीके से हुई थी, तो इतना खराब गेहूं परिवहन तक कैसे पहुंच गया. वहीं यदि जांच नहीं हुई तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है.

अमानक गेहूं आने की लगातार आ रही शिकायत

बताया जा रहा है कि गंभीरिया स्थित श्री देव प्रभा वेयर हाउस को वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन की सांईखेड़ा शाखा द्वारा करीब एक माह पहले अधिग्रहित किया गया था. वेयरहाउस संचालक आरपी सुहाने ने बताया कि अधिग्रहण के बाद गोदाम में रखे जाने वाले माल की गुणवत्ता जांच वे नहीं करते हैं. उन्हें केवल गोदाम किराए पर देना होता है. हालांकि बीते कुछ दिनों से कर्मचारियों द्वारा लगातार अमानक गेहूं आने की शिकायत की जा रही थी. इस संबंध में शाखा प्रबंधक को भी सूचना दी गई थी और माल की जांच कराने की मांग की गई थी.

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जिला प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश

वेयरहाउस संचालक का कहना है कि शनिवार को जब संदिग्ध बोरियां गोदाम में रखी जा रही थीं, तब कर्मचारियों ने मौके पर ही जांच की और गड़बड़ी पकड़ में आई. इसके बाद संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई. मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच के निर्देश दिए हैं. सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि मामला गंभीर है और वेयरहाउस में रखे गए माल की जांच के लिए टीम भेजी जाएगी. यदि जांच में गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

जिला आपूर्ति नियंत्रक ज्योति बघेल ने कहा कि यह गेहूं हर्षिता स्व सहायता समूह से भेजा गया था. सूचना मिलते ही अमानक गेहूं को वापस कर दिया गया है और संबंधित समूह से सही गुणवत्ता वाला गेहूं मंगाया जाएगा. दूसरी ओर जिला प्रबंधक नान रोहित बघेल ने कहा कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं था. जानकारी मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल इस पूरे मामले ने समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही फसलों की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और परिवहन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच के बाद इस घोटाले में किन अधिकारियों, कर्मचारियों और समूहों की भूमिका सामने आती है और प्रशासन क्या कार्रवाई करता है.

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