प्रमाण दो या रावण दहन बंद करो; उज्जैन महाकाल मंदिर के पुजारी का 4 संस्थाओं को नोटिस, शास्त्रार्थ की चुनौती

दशहरे से पहले उज्जैन में रावण दहन को लेकर नई बहस छिड़ गई है. महाकाल मंदिर से जुड़े पुजारी महेश पुजारी ने चार आयोजक संस्थाओं को नोटिस भेजकर धार्मिक ग्रंथों के आधार पर शास्त्रार्थ की चुनौती दी है और कहा है कि प्रमाण मिलने पर ही वह अपना विरोध वापस लेंगे.

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उज्जैन में रावण दहन पर छिड़ी नई बहस, महेश पुजारी ने भेजे कानूनी नोटिस
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  • रावण दहन को लेकर उज्जैन में धार्मिक बहस तेज
  • रावण दहन के आयोजकों को नोटिस, शास्त्रार्थ की तैयारी में महेश पुजारी
  • 15-20 राज्यों से समर्थन मिलने का दावा, रावण दहन पर बढ़ी चर्चा
उज्जैन:

धर्म नगरी उज्जैन में दशहरा पर्व से पहले रावण दहन को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. महाकाल मंदिर से जुड़े पुजारी महेश पुजारी ने रावण दहन की परंपरा पर सवाल उठाते हुए इसे बंद कराने का अभियान शुरू कर दिया है. उनका दावा है कि वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस सहित प्रमुख धार्मिक ग्रंथों में रावण वध का वर्णन तो मिलता है, लेकिन रावण दहन का कहीं उल्लेख नहीं है. इसी आधार पर उन्होंने चार आयोजक संस्थाओं को नोटिस भेजे हैं और शास्त्रार्थ के माध्यम से इस विषय पर निर्णय की मांग की है.

रावण दहन को लेकर फिर उठी बहस

दशहरे पर देशभर में रावण दहन की परंपरा लंबे समय से निभाई जाती रही है. इसे भगवान श्रीराम द्वारा रावण पर विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. हालांकि उज्जैन में इस परंपरा को लेकर महाकाल मंदिर के पुजारी महेश पुजारी ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं.

महेश पुजारी का कहना है कि धार्मिक परंपराओं के नाम पर होने वाले आयोजनों का आधार शास्त्रों में होना चाहिए. यदि किसी परंपरा का उल्लेख प्रमुख धार्मिक ग्रंथों में नहीं मिलता है तो उस पर चर्चा और पुनर्विचार होना चाहिए.

उनका कहना है कि सनातन धर्म की व्यवस्था और धार्मिक मान्यताओं का अपमान होने पर उसका विरोध करना आवश्यक हो जाता है. इसी उद्देश्य से उन्होंने रावण दहन के खिलाफ अभियान छेड़ा है.

रावण दहन के विरोध में इस तरह के पोस्टर लगाए गए हैं उज्जैन में
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रावण दहन के विरोध में क्या हैं तर्क?

महेश पुजारी का दावा है कि वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास कृत रामचरितमानस में रावण वध का विस्तार से वर्णन मिलता है, लेकिन रावण दहन की परंपरा का कोई उल्लेख नहीं है.

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उनके अनुसार भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था, लेकिन वर्तमान समय में जिस प्रकार रावण के विशाल पुतले बनाकर सार्वजनिक दहन किया जाता है, उसके धार्मिक आधार को स्पष्ट किया जाना चाहिए.

महेश पुजारी ने रावण को विद्वान, महाज्ञानी और ब्राह्मण बताते हुए कहा कि स्वयं भगवान श्रीराम ने भी रावण के ज्ञान का सम्मान किया था. उनका कहना है कि धार्मिक कथाओं और आधुनिक समय में किए जाने वाले आयोजनों के बीच अंतर को समझना जरूरी है. उन्होंने कहा कि राम-रावण युद्ध धार्मिक और आध्यात्मिक प्रसंग है, जिसे केवल मनोरंजन या सार्वजनिक आयोजन तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि यह उनके व्यक्तिगत धार्मिक और वैचारिक तर्क हैं.

पुजारी की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस
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चार संस्थाओं को भेजे कानूनी नोटिस, शास्त्रार्थ करने की चुनौती

महेश पुजारी ने बताया कि इस वर्ष उन्होंने रावण दहन करने वाली चार संस्थाओं को कानूनी नोटिस भेजे हैं. उनका कहना है कि अब वे इन संस्थाओं के जवाब का इंतजार कर रहे हैं.  उन्होंने कहा कि यदि नोटिस का जवाब आता है तो वह संबंधित संस्थाओं को शास्त्रार्थ के लिए आमंत्रित करेंगे. उनका उद्देश्य विवाद पैदा करना नहीं बल्कि शास्त्रों के आधार पर विषय की स्पष्टता प्राप्त करना है. महेश पुजारी का कहना है कि यदि आयोजक धार्मिक ग्रंथों में रावण दहन का प्रमाण प्रस्तुत कर देते हैं तो वह अपना विरोध समाप्त कर देंगे. लेकिन यदि ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता है तो रावण दहन की परंपरा को बंद किया जाना चाहिए.

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नोटिस की प्रति
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पोस्टर लगाकर चलाया जागरूकता अभियान

रावण दहन के विरोध को लेकर महेश पुजारी सिर्फ नोटिस भेजने तक सीमित नहीं रहे हैं. उन्होंने शहर में पोस्टर लगाकर भी लोगों तक अपना संदेश पहुंचाने का प्रयास किया है. इन पोस्टरों के माध्यम से वह लोगों से रावण दहन की धार्मिक वैधता पर विचार करने की अपील कर रहे हैं. उनका कहना है कि वे भगवान और सनातन परंपरा में आस्था रखते हैं तथा शास्त्रों के अनुरूप धार्मिक आचरण के पक्षधर हैं. उनके मुताबिक यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि धार्मिक प्रश्नों के समाधान के लिए चलाया जा रहा है.

आयोजकों को नोटिस
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पिछले साल भी किया था विरोध

महेश पुजारी ने बताया कि यह पहला अवसर नहीं है जब उन्होंने रावण दहन का विरोध किया हो. इससे पहले भी वह इस विषय को उठा चुके हैं. उनका दावा है कि पिछले वर्ष उन्होंने रावण दहन के विरोध में मटकियां फोड़ी थीं. उन्होंने यह भी दावा किया कि उस समय बारिश के कारण कई स्थानों पर रावण दहन नहीं हो पाया था, जिसे वह ईश्वर की कृपा और अपने अभियान को मिला समर्थन मानते हैं. अब इस वर्ष उन्होंने कानूनी और धार्मिक दोनों स्तर पर अभियान को आगे बढ़ाया है.

15 से 20 राज्यों से समर्थन मिलने का दावा

महेश पुजारी का दावा है कि उनके अभियान को देशभर से समर्थन मिल रहा है. उनके अनुसार उन्हें 15 से 20 राज्यों से पत्र प्राप्त हुए हैं. उन्होंने कहा कि राजपूत, दलित, धोबी और आदिवासी समाज सहित विभिन्न वर्गों के लोगों ने उन्हें समर्थन पत्र भेजे हैं. महाराष्ट्र के आदिवासी समुदाय की ओर से भी बड़ी संख्या में पत्र मिलने का दावा उन्होंने किया. हालांकि विभिन्न राज्यों और सामाजिक संगठनों से मिले समर्थन की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है और यह दावा महेश पुजारी द्वारा किया गया है.

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