20-25 दिन तक सड़ता रहा वनराज का शव; पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ का कंकाल मिलने से हड़कंप, टाइगर स्टेट पर सवाल

Tiger Death in Panna: पन्ना टाइगर रिजर्व में वयस्क नर बाघ का कंकाल मिला. शव 20–25 दिन पुराना, मुख्य मार्ग से 100 मीटर दूर. हाईटेक निगरानी पर उठे सवाल. पढ़िए पूरी खबर.

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पन्ना टाइगर रिजर्व में बड़ा खुलासा: 20 दिन तक सड़क किनारे पड़ा रहा बाघ का शव

Tiger Death in Panna: मध्य प्रदेश, जिसे गर्व के साथ ‘टाइगर स्टेट' कहा जाता है, वहीं से वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली खबर सामने आई है. पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) के गंगऊ अभ्यारण्य क्षेत्र में एक वयस्क नर बाघ का कंकाल मिलने से हड़कंप मच गया है. हैरानी की बात यह है कि यह बाघ 20 से 25 दिन पहले मर चुका था और उसका शव एक मुख्य मार्ग से महज 100 मीटर की दूरी पर सड़ता रहा, लेकिन इतने दिनों तक पार्क का ‘हाईटेक' निगरानी तंत्र और मुस्तैद अमला इसे देख तक नहीं सका. पन्ना से NDTV के लिए विवेक सोनी की रिपोर्ट.

कटरिया बीट में मिला नर बाघ का कंकाल

यह मामला गंगऊ अभ्यारण्य के कटरिया बीट, वन कक्ष क्रमांक P-278 का है. यहां मंगलवार 21 अप्रैल को एक पूर्ण वयस्क नर बाघ का कंकाल बरामद किया गया. अधिकारियों के अनुसार मृत बाघ की उम्र लगभग 5 से 6 वर्ष आंकी जा रही है. बाघ का शव पूरी तरह सड़ चुका था और केवल कंकाल ही शेष बचा था, जिससे साफ है कि उसकी मौत करीब 20 से 25 दिन पहले हो चुकी थी.

मुख्य मार्ग से सिर्फ 100 मीटर दूर थी लाश

सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जहां बाघ का शव मिला, वह मनौर–मझगवां (हिनौता) मुख्य मार्ग से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित है. इसी रास्ते से रोजाना वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और पेट्रोलिंग वाहन गुजरते हैं. भीषण गर्मी में इतने दिनों तक शव सड़ता रहा, लेकिन किसी को दुर्गंध तक महसूस नहीं हुई, यह सवाल अब हर किसी के मन में है.

Tiger Death in Panna: पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ का कंकाल मिला

ग्रामीण की सूचना से खुला मामला

पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन लगातार सघन निगरानी और आधुनिक तकनीक के दावे करता रहा है, लेकिन इस घटना ने उन दावों की पोल खोल दी. बाघ के शव की जानकारी तब सामने आई, जब महुआ बीनने गए एक ग्रामीण की नजर कंकाल पर पड़ी. ग्रामीण की सूचना के बाद वन अमला हरकत में आया.

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हाईटेक सिस्टम क्यों रहा फेल

बताया जाता है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में कैमरा ट्रैप, पेट्रोलिंग और मॉनिटरिंग के आधुनिक इंतजाम हैं. बावजूद इसके 20-25 दिन तक एक वयस्क बाघ का शव सड़क के पास पड़ा रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी. इससे न केवल निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं, बल्कि बीट स्तर पर लापरवाही के आरोप भी लग रहे हैं.

शिकार या आपसी संघर्ष, जांच जारी

बाघ की मौत को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है. यह शिकार का मामला है या बाघों के आपसी संघर्ष में मौत हुई, इसका पता अब जांच के बाद ही चलेगा. बाघ का शव जिस अवस्था में मिला है, उससे मामला संदिग्ध माना जा रहा है.

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अधिकारियों ने दी जानकारी

पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक बृजेंद्र श्रीवास्तव ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि शव काफी पुराना है और पीटीआर के डॉक्टर ने मौके का निरीक्षण कर प्रारंभिक जांच की है. उन्होंने बताया कि स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की टीम भी मामले की जांच में जुटाई गई है. सूचना मिलते ही गंगऊ अभ्यारण्य के रेंजर सागर शुक्ला भी वन अमले के साथ मौके पर पहुंचे.

उठ रहे बड़े सवाल

इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने को मजबूर कर दिया है कि जब मुख्य मार्ग के पास सिस्टम ‘अंधा' हो सकता है, तो जंगल के अंदरूनी इलाकों में वन्यजीव कितने सुरक्षित हैं. अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और जिम्मेदारों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है.

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