Naxal Network India 2026: देश में नक्सलवाद के खात्मे के लिए 31 मार्च 2026 की तय डेडलाइन से पहले सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है. 22 फरवरी 2026 को नक्सल संगठन के शीर्ष नेता देवजी और मल्ला राजिरेड्डी ने तेलंगाना पुलिस के सामने हथियार डाल दिए. इन दोनों को लंबे समय से संगठन की रणनीतिक कमान संभालने वाला माना जाता था.
अब सवाल उठ रहा है कि क्या देश में नक्सल नेटवर्क अंतिम दौर में पहुंच चुका है और आखिर कितने सक्रिय नक्सली अभी भी बचे हुए हैं.
नक्सलवाद की शुरुआत और प्रभाव वाले राज्य
देश में नक्सल आंदोलन की शुरुआत 1967 में नक्सलबाड़ी (पश्चिम बंगाल) से हुई थी. इसके बाद आंदोलन झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और तेलंगाना में फैल गया. सबसे अधिक प्रभाव छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में देखने को मिला. बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा, कांकेर और दंतेवाड़ा जिले लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहे. इसके अलावा झारखंड का पश्चिम सिंहभूम और ओडिशा का कंधमाल जिला भी प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं.
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देश में अब कितने नक्सली बचे?
सुरक्षा एजेंसियों के आंतरिक आकलन के अनुसार देशभर में करीब 250 से 300 सक्रिय नक्सली बचे होने का अनुमान है. सबसे अधिक सक्रियता अब भी छत्तीसगढ़ में बताई जा रही है.
- झारखंड: लगभग 70
- छत्तीसगढ़: 90 से 100
- ओडिशा: 25 से 30
- तेलंगाना: करीब 60 (एक बटालियन स्तर) और 20 TSC सदस्य
2025 में मारे गए शीर्ष माओवादी नेता
वर्ष 2025 में सुरक्षा बलों ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के खिलाफ बड़े अभियान चलाए. इस दौरान संगठन की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो से जुड़े कई शीर्ष नेताओं को ढेर किया गया.
- 19 जनवरी 2025 – गरियाबंद (छत्तीसगढ़): जयराम उर्फ चलपति (केंद्रीय समिति सदस्य)
- 21 अप्रैल 2025 – झारखंड: विवेक मांझी (केंद्रीय समिति सदस्य)
- 21 मई 2025 – नारायणपुर: बसवा राजू उर्फ नंबाला केशव राव (महासचिव / पोलित ब्यूरो सदस्य)
- 05 जून 2025 – बीजापुर: नरसिम्हा चलम उर्फ सुधाकर उर्फ रामाराजू (केंद्रीय समिति सदस्य)
- 18 जून 2025 – आंध्र प्रदेश: उदय उर्फ गजरला रवि (केंद्रीय समिति सदस्य)
- 11 सितंबर 2025 – गरियाबंद: मनोज उर्फ मोडेम बालकृष्णन (केंद्रीय समिति सदस्य)
- 14 सितंबर 2025 – झारखंड: सहदेव सोरेन (केंद्रीय समिति सदस्य)
- 22 सितंबर 2025 – नारायणपुर: राजू उर्फ कट्टा रामचंद्र रेड्डी (केंद्रीय समिति सदस्य)
- 22 सितंबर 2025 – नारायणपुर: कोसा उर्फ कादरी सत्यानारायण रेड्डी (केंद्रीय समिति सदस्य)
- 18 नवंबर 2025 – अल्लूरी सीतारामा राजू (आंध्र प्रदेश): मडवी हिडमा (केंद्रीय समिति सदस्य)
क्या खत्म होने की कगार पर है लाल आतंक?
टॉप नेतृत्व के मारे जाने और अब देवजी व मल्ला राजिरेड्डी के सरेंडर के बाद माओवादी संगठन की कमान कमजोर पड़ती दिख रही है. हालांकि सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि बस्तर क्षेत्र में जमीनी स्तर पर संगठन की उपस्थिति पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है. 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले अभियान और तेज किए जाने की तैयारी है. ऐसे में आने वाले महीनों में नक्सल नेटवर्क पर और बड़े प्रहार देखने को मिल सकते हैं.
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