MP Police Training New Syllabus:मध्यप्रदेश पुलिस की ट्रेनिंग… अब सिर्फ ड्रिल, कानून और हथियारों तक सीमित नहीं रह गई है… बल्कि इसमें जुड़ गया है एक नया अध्याय—श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र का पाठ. आदेश के मुताबिक, रंगरूटों के दिन की शुरुआत अब इसी स्तोत्र से होगी. बता दें कि इससे पहले गीता और रामचरितमानस के पाठ को लेकर भी विवाद हो चुका है. सवाल सीधा है—क्या यह नैतिक प्रशिक्षण है या पुलिस व्यवस्था में एक खास सोच को जगह देने की कोशिश? संविधान, धर्मनिरपेक्षता और पुलिस सुधार—इन तीनों के बीच खड़े इस फैसले पर NDTV ने मध्यप्रदेश पुलिस ट्रेनिंग के मुखिया एडीजी राजा बाबू सिंह से सीधी बातचीत की.
सवाल: आपने पुलिस ट्रेनिंग में क्या नवाचार किए हैं?
जवाब: प्रधानमंत्री जी का विजन है कि हम सभी लोग विजन एट द रेट 2047 को ध्यान में रखकर अपनी सारी तैयारी करें.आप कल्पना कीजिए कि 2047 में हमारा समाज कितना बदला हुआ होगा. अभी इंटरनेट ऑफ थिंग्स आ गया, एआई आ गया, चैटजीपीटी आ गया और करीब 60 प्रतिशत अपराध डिजिटल स्पेस में हो रहा है. इसे देखते हुए मैंने मध्यप्रदेश पुलिस की ट्रेनिंग में आमूलचूल परिवर्तन की जरूरत महसूस की. पहले कंप्यूटर ज्ञान एक छोटा सा पेपर था, उसे इतना विस्तार दिया कि अब उसके दो वॉल्यूम का सिलेबस है, जिसमें साइबर सिक्योरिटी, डार्क वेब, साइबर फ्रॉड सब शामिल है. हमारे कांस्टेबल फिजिकली फिट हों, इसके लिए पहले 5 किलोमीटर दौड़ का स्टैंडर्ड था, अब उन्हें 42 किलोमीटर फुल मैराथन तक तैयार किया जा रहा है. मध्यप्रदेश पुलिस के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि रिक्रूट बेसिक ट्रेनिंग के दौरान फुल मैराथन दौड़ रहे हैं.
सवाल: और क्या नवाचार या प्रस्ताव हैं?
जवाब: मैंने पुलिस मुख्यालय को प्रस्ताव दिया है कि ट्रेनिंग को एआई-इनेबल्ड बनाया जाए. अभी सब कुछ मैन्युअल है, लेकिन अगर इसे एआई बेस्ड किया जाए तो कम समय में बेहतर परिणाम मिलेंगे. वेपन सिमुलेटर के लिए ऑगमेंटेड रियलिटी और वर्चुअल रियलिटी का भी प्रस्ताव दिया है. 1086 साइबर योद्धा तैयार किए हैं, जिन्हें साइबर सिक्योरिटी वर्टिकल में पोस्ट किया जाएगा.
सवाल: क्या राज्य की पुलिस को आध्यात्मिक बनाना आपकी प्राथमिकता है या पेशेवर और संवैधानिक रूप से सक्षम बनाना?
जवाब: देश आजाद होने के बाद हमें कॉलोनियल लेगसी से जूझना पड़ा. अंग्रेजों ने भारत में आयरिश कांस्टेबल मॉडल दिया—डंडा, 303 राइफल और दमनकारी पुलिसिंग. आपने दांडी मार्च के दौरान देखा होगा कि किस तरह लोगों के सिर फोड़े गए. हमने धीरे-धीरे पुलिस को मानवीय और संवैधानिक बनाने की कोशिश की है, लेकिन आज भी कई घटनाएं सामने आती हैं—चाहे सिवनी का मामला हो या गुना का. इसलिए मैंने सोचा कि 9 महीने की ट्रेनिंग में फोरेंसिक,डिजिटल फोरेंसिक के साथ-साथ पुलिसकर्मी का ओवरऑल पर्सनैलिटी मेकअप भी जरूरी है.
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सवाल: आप गीता,रामचरितमानस,दक्षिणामूर्ति स्तोत्र पढ़वा रहे हैं—क्या कल कुरान, बाइबिल, गुरु ग्रंथ साहिब भी पढ़वाएंगे?
जवाब: मैं सेक्टेरियन सोच नहीं रखता हूं और न ही कोई ऐसा मंतव्य है. लेकिन अगर हमें नैतिक मूल्यों की प्रेरणा लेनी है, तो हम अपनी समृद्ध सनातन और वैदिक परंपरा से ही लेंगे. हर देश अपनी सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा लेता है.
सवाल: लेकिन भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है…
जवाब: देखिए, मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता. मैं एक पुलिस अधिकारी हूं, सिविल सर्विस कंडक्ट रूल से बंधा हूं. मैंने संविधान की शपथ ली है. मेरा उद्देश्य सिर्फ एक कमिटेड, प्रोफेशनल, स्मार्ट और संवेदनशील पुलिसकर्मी तैयार करना है.
सवाल: Article 28(1) कहता है कि सरकारी संस्थानों में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती—क्या यह उसका उल्लंघन नहीं है?
जवाब: यह धार्मिक शिक्षा नहीं है. यह अच्छा इंसान बनने का मार्ग है. श्रीमद्भागवत गीता सभी धर्मों से ऊपर उठकर मानवता का मार्गदर्शन करती रही है. दुनिया भर में इसका सम्मान है. यह व्यक्तित्व के अच्छे पक्ष को विकसित करने का माध्यम है.
सवाल: क्या आपने इस आदेश से पहले कोई कानूनी सलाह ली थी?
जवाब: इसमें किसी कानूनी सलाह की जरूरत नहीं थी. यह एक प्रशासनिक निर्णय था और ट्रेनिंग को बेहतर करने के लिए लिया गया है.
सवाल: क्या पुलिस को संविधान से संचालित होना चाहिए या शास्त्रों से?
जवाब: जब आप अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए युवाओं को 9 महीने में ट्रेन करते हैं, तो उन्हें ड्रिल,कानून,वेपन हैंडलिंग,फोरेंसिक और व्यवहार सब सिखाना होता है. शुरुआत में उन्हें रेजिमेंट करना जरूरी होता है. यह नई कंडीशनिंग है, ताकि उनका व्यक्तित्व परिष्कृत हो सके.
सवाल: मदरसे में जाकर आपने गीता पढ़ने की बात कही—क्या आप अन्य धर्मग्रंथों के लिए भी यही कहेंगे?
जवाब: जब मौलाना साहब ने कहा कि आप बच्चों को संबोधित करें, तो मैंने कहा कि गीता का पाठ किया जाए। उन्होंने भी कहा कि यह अच्छी बात है, इससे लोग सहिष्णु बनेंगे और नैतिक जीवन जीएंगे.
सवाल: यह “मोरल पुलिसिंग” है या “पुलिस रिफॉर्म”?
जवाब: हम मोरल वैल्यूज़ के जरिए एक संवेदनशील और पब्लिक-फ्रेंडली पुलिस बनाना चाहते हैं. इसके लिए दक्षिणामूर्ति स्तोत्र, गीता, पंचतंत्र और नीति शतक जैसी चीजों से प्रेरणा ली जा रही है. साथ ही हर ट्रेनिंग स्कूल ने आसपास के गांव को गोद लिया है, जहां रिक्रूट जाकर लोगों की समस्याएं समझते हैं.
सवाल: अगर यह आदेश कोर्ट में चुनौती दी जाती है तो?
जवाब: मैं इस पर कुछ नहीं कहूंगा.मैं एक कमिटेड पुलिस अधिकारी हूं और अपना काम कर रहा हूं.
सवाल: व्यक्तिगत तौर पर आपकी आस्था क्या इस फैसले को प्रभावित करती है?
जवाब: मैं प्रैक्टिसिंग हिंदू हूं, फिलॉसफी का छात्र रहा हूं और सभी धर्मग्रंथों का अध्ययन किया है.लेकिन मैं संविधान की शपथ लेकर काम कर रहा हूं. मेरा उद्देश्य सिर्फ एक बेहतर पुलिस बल तैयार करना है.
सवाल रिटायरमेंट के बाद—भक्ति या राजनीति?
जवाब: मेरा पूरा जीवन भगवान की इच्छा के अनुसार चला है.आगे भी वही होगा. मेरा स्वभाव समाज की भलाई करना है. चाहे उसे निष्काम कर्म कहें या कुछ और, मेरी इच्छा सिर्फ लोगों का भला करने की है.
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