MP में शराब सिंडिकेट की मनमानी पर लगेगी लगाम; वाइन शॉप पर QR कोड जरूरी, स्कैन करते ही दिखेगी बोतल की सही कीमत

Wine Shop Rules: मध्य प्रदेश में शराब दुकानों की मनमानी रोकने के लिए QR कोड अनिवार्य. ग्राहक मोबाइल से स्कैन कर MSP‑MRP की जांच कर सकेंगे. पढ़िए आबकारी विभाग ने क्या कुछ दिशा निर्देश जारी किए.

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MP की शराब दुकानों पर QR कोड अनिवार्य, अब मोबाइल से मिलेगी सही कीमत (प्रतीकात्मक AI फोटो)

Liquor Shop QR Code MP: मध्य प्रदेश में शराब खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब शराब दुकानों पर न ज़्यादा पैसे वसूले जा सकेंगे और न ही नियमों से सस्ती शराब बेची जा सकेगी. आबकारी विभाग ने प्रदेश भर में शराब दुकानों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए एक नया और सख्त कदम उठाया है. अब हर मदिरा दुकान पर क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है. उपभोक्ता अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर तुरंत जान सकेंगे कि बोतल का सही दाम क्या है. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ता ठगे जाने से बचेंगे.

शराब दुकानों पर सामने आई अनियमितताएं

आबकारी विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई जिलों में शराब दुकानों पर तय कीमत से ज़्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं. कहीं एमआरपी से ज्यादा दाम मांगे जा रहे थे तो कहीं प्रतिस्पर्धा के नाम पर न्यूनतम तय कीमत यानी एमएसपी से भी कम पर शराब बेची जा रही थी. विभाग ने इसे नियमों की खुली अनदेखी माना और अब इस पर सख्ती करने का फैसला लिया है.

Wine Shop Rules: मध्य प्रदेश में शराब दुकान पर QR कोड जरूरी

हर दुकान पर अनिवार्य होगा क्यूआर कोड

आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने साफ निर्देश दिए हैं कि अब प्रदेश की हर शराब दुकान पर ई-आबकारी पोर्टल से निकला क्यूआर कोड लगाया जाएगा. जैसे ही ग्राहक इसे अपने स्मार्टफोन से स्कैन करेगा, उसके मोबाइल पर उसी जिले की शराब की पूरी रेट लिस्ट खुल जाएगी. इससे ग्राहक मौके पर ही यह जांच ले सकेगा कि दुकानदार सही दाम ले रहा है या नहीं.

गलत दाम पर बिक्री करने वालों पर सख्त कार्रवाई

आयुक्त सक्सेना ने बताया कि अगर कोई दुकानदार तय एमएसपी से कम या एमआरपी से ज्यादा दाम पर शराब बेचता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. नियमों के तहत न सिर्फ भारी जुर्माना लगेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुकान का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है. उन्होंने साफ कहा कि उपभोक्ताओं से किसी भी तरह की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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28 अप्रैल से 10 दिन का विशेष जांच अभियान

इस व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए प्रदेश भर में 28 अप्रैल 2026 से 7 मई 2026 तक विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है. इन 10 दिनों में अधिकारी सभी दुकानों की जांच करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि हर दुकान पर क्यूआर कोड सही तरीके से लगा हो. इस अभियान की पूरी रिपोर्ट 11 मई तक विभाग को सौंपना अनिवार्य किया गया है.

क्यूआर कोड लगाने के लिए जारी किए गए साफ निर्देश

आबकारी विभाग ने क्यूआर कोड लगाने को लेकर भी स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है. क्यूआर कोड ए-3 साइज के मोटे स्टिकर पेपर पर प्रिंट होंगे, ताकि वे आसानी से न निकलें. हर दुकान के लिए पांच क्यूआर कोड दिए जाएंगे. इनमें से तीन ग्राहकों की नजर में आने वाली जगहों पर लगाए जाएंगे और दो सुरक्षित रखे जाएंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर बदले जा सकें.

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मैदान स्तर पर भी होगी जांच

दुकान पर क्यूआर कोड लगाने के बाद संबंधित अधिकारी खुद उसे स्कैन करके देखेंगे कि सही जानकारी आ रही है या नहीं. साथ ही दुकानों की फोटो लेकर रिपोर्ट भी बनाई जाएगी. जब सभी दुकानों पर यह काम पूरा हो जाएगा, तब इसकी कार्यपूर्णता रिपोर्ट आबकारी आयुक्त कार्यालय को भेजी जाएगी.

उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा फायदा

अधिकारियों का कहना है कि इस नई व्यवस्था से सबसे ज्यादा फायदा आम लोगों को होगा. अब उन्हें शराब खरीदते समय बहस या शक की जरूरत नहीं होगी. मोबाइल से एक स्कैन में सही दाम सामने होगा. यही नहीं, यह कदम शराब बाजार में पारदर्शिता लाएगा और दुकानदारों की मनमानी पर पूरी तरह रोक लगाएगा.

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