Mohan Yadav Viral Statement: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (CM Dr Mohan Yadav) के हालिया बयानों ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Chief) जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि कृषि संबंधी दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते और किसानों की समस्याओं को समझे बिना ऐसे वक्तव्य देना हास्यास्पद है. मुख्यमंत्री ने हाल ही में एक कार्यक्रम में “दूध का रकबा बढ़ाने” की बात कही, जिस पर विपक्ष ने नाराजगी जताई.
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पटवारी ने क्या कहा?
पटवारी ने कहा कि खेती‑किसानी कठिन परिश्रम और व्यवहारिक ज्ञान का विषय है, जिसे आउटसोर्स या शब्दों के खेल से नहीं समझा जा सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने किसानों से संवाद नहीं किया और खेती के वास्तविक तौर‑तरीकों से अनभिज्ञ हैं. पटवारी का कहना है कि यदि सरकार किसानों के बीच समय बिताती, उनकी परेशानियाँ सुनती, तो इस तरह के बयान देने की नौबत नहीं आती.
अब गुड़ की खेती पर बयान, विपक्ष ने बताया ‘जानकारी का अभाव'
बैतूल में किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि क्षेत्र का गुड़ देशभर में प्रसिद्ध है और गुड़ उत्पादन को बढ़ाने के लिए क्लस्टर मॉडल अपनाया जाना चाहिए. उन्होंने यहां तक पूछा कि “कौन‑कौन गुड़ लगाता है”, जिसके बाद विपक्ष ने सवाल उठाए कि गुड़ खेत में नहीं उगता, बल्कि यह गन्ने से संबंधित प्रसंस्करण का उत्पाद है.
कांग्रेस का कहना है कि ऐसे वक्तव्य किसानों की समझ को ठेस पहुँचाते हैं और शासन को बुनियादी कृषि प्रक्रियाओं की जानकारी हासिल करनी चाहिए.
1 बीघा में 50 क्विंटल गेहूं उत्पादन वाले बयान पर भी उठे सवाल
इससे पहले मुख्यमंत्री ने एक किसान से बातचीत के दौरान दावा किया था कि उन्नत किस्म के बीज तैयार किए जा रहे हैं जिनसे 1 बीघा में सामान्यतः 10–12 क्विंटल होने वाली गेहूं की पैदावार 50 क्विंटल तक बढ़ाई जा सकती है. यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और कई किसानों ने सीएम हेल्पलाइन पर फोन कर ऐसे बीज उपलब्ध कराने की मांग की. कृषि विशेषज्ञों ने इस दावे पर संदेह जताया और कहा कि पैदावार बढ़ोतरी वैज्ञानिक और व्यवहारिक सीमाओं पर निर्भर करती है.
कृषि आधारित बयानों को लेकर लगातार चर्चा
मुख्यमंत्री के लगातार दिए जा रहे कृषि संबंधी बयानों के बाद विपक्ष और किसान संगठनों का कहना है कि सरकार को जमीनी समस्याओं पर अधिक फोकस करना चाहिए. वहीं, सत्तापक्ष का कहना है कि सरकार नई तकनीक और प्रसंस्करण मॉडल के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयासरत है.
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