MP Budget Loss 2026: संसद में बजट के दौरान भले ही तालियां गूंजी हों और बीजेपी शासित राज्यों में जश्न मनाया गया हो, लेकिन जब राज्यों के हिस्से के पैसे की बात आई, तो मध्य प्रदेश के लिए आंकड़े कुछ और ही कहानी कह रहे हैं. दरअसल, 16वें वित्त आयोग ने इस बार पैसा बांटने का तरीका बदल दिया है. अब तक यह देखा जाता था कि कौन सा राज्य कितना पिछड़ा है या उसे कितनी मदद की जरूरत है, जिसे तकनीकी भाषा में 'इक्विटी' कहते हैं. लेकिन इस बार एक नया पैमाना जोड़ा गया है— 'इकोनॉमिक एफिशिएंसी' यानी आर्थिक कुशलता. इसका सीधा मतलब यह है कि जो राज्य अपना टैक्स कलेक्शन मजबूत रखेंगे और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करेंगे, उन्हें ज्यादा पैसा मिलेगा. इस नए फॉर्मूले में कर्नाटक सबसे ज्यादा फायदा पाने वाला राज्य बन गया है, जबकि मध्य प्रदेश इस सूची में सबसे नीचे पायदान पर खिसक गया है.
एमपी को करोड़ों का नुकसान और बढ़ता वित्तीय बोझ
आंकड़ों की नजर से देखें तो मध्य प्रदेश को तगड़ा झटका लगा है. केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी जो पहले 7.85 प्रतिशत थी, वह अब घटकर 7.35 प्रतिशत रह गई है. प्रतिशत में यह बदलाव छोटा लग सकता है, लेकिन रुपयों में यह बहुत बड़ी रकम है. इस कटौती की वजह से प्रदेश को मिलने वाली राशि अब करीब 7,677 करोड़ रुपये कम हो गई है. इस साल तो सीधे तौर पर 2,314 करोड़ रुपये का घाटा होगा ही, साथ ही अगले पांच सालों तक हर साल राज्य को लगभग 7,500 करोड़ रुपये कम मिलेंगे. एक तरफ आमदनी घट रही है और दूसरी तरफ लाड़ली बहना जैसी बड़ी योजनाओं को चलाने के लिए सरकार को अपने संसाधनों से ज्यादा पैसा जुटाना होगा, जिससे प्रदेश पर कर्ज और वित्तीय बोझ बढ़ना तय है.
विपक्ष का हमला: 'मायका' कहने वाली पार्टी ने किया भेदभाव?
राज्य को मिलने वाले फंड में हुई इस कटौती पर राजनीति भी गर्मा गई है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीधे सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी मध्य प्रदेश को अपना 'मायका' कहती है और यहां की जनता ने उसे 29 की 29 लोकसभा सीटें जिताई हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्य के साथ भेदभाव किया जा रहा है. सिंघार का कहना है कि केंद्रीय कर में कटौती करना प्रदेश की जनता और यहां के सांसदों का अपमान है. वहीं दूसरी तरफ, उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ मेले के लिए भी सरकार की उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं. राज्य ने 2026 के सिंहस्थ के लिए 20,000 करोड़ रुपये का पैकेज मांगा था, लेकिन बजट में इस पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा.
तस्वीर का दूसरा पहलू: टियर-2 शहरों और महिलाओं के लिए उम्मीद
हालांकि, बजट पूरी तरह निराशाजनक भी नहीं है. तस्वीर का एक सकारात्मक पहलू यह है कि केंद्र सरकार ने टियर-2 और टियर-3 शहरों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 12 लाख करोड़ रुपये की बड़ी सहायता का ऐलान किया है. जानकारों का मानना है कि इससे मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे करीब 10 शहरों को फायदा मिल सकता है. भोपाल को देश की उन पांच जगहों में शामिल किया जा सकता है जहां 'यूनिवर्सिटी टाउनशिप' बनेगी. इसके अलावा, भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहर अब विकास कार्यों के लिए 'AMRUT बॉन्ड' जारी कर सकेंगे.
अमृत मित्र और शी-मार्ट: सामाजिक सुरक्षा का नया ढांचा
पानी और स्वच्छता के मोर्चे पर भी कुछ नई पहल हुई है. इंदौर के भागीरथपुरा जैसे हादसों से सबक लेते हुए अब 10,000 ‘महिला अमृत मित्र' तैनात की जाएंगी, जो पीने के पानी की गुणवत्ता पर नजर रखेंगी ताकि दूषित पानी से किसी की जान न जाए. महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में 'लखपति दीदी' योजना के साथ-साथ अब ‘शी-मार्ट' की शुरुआत की जा रही है, जिससे प्रदेश की 16 लाख से अधिक महिलाओं को सीधे तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद है. वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इन योजनाओं की तारीफ करते हुए इसे प्रदेश के विकास के लिए बेहतर बताया है.














