कूनो में जन्मी मादा चीता KGP-11 घायल मिली; मुरैना में रेस्क्यू, पालपुर में इलाज जारी

कूनो में जन्मी मादा चीता KGP-11 मुरैना में घायल मिली. वन विभाग ने रेस्क्यू कर पालपुर केंद्र में इलाज शुरू किया, हालत स्थिर. पढ़िए पूरी खबर.

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भारत में जन्मी चीता KGP-11 पर खतरा, इलाज के लिए रखा क्वारंटाइन में
(फाइल फोटो : वन विभाग मध्य प्रदेश)

Kuno National Park News: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क की महत्वाकांक्षी चीता पुनर्स्थापन परियोजना के बीच एक चिंताजनक खबर सामने आई है. भारत में जन्मी 27 महीने की मादा चीता KGP-11 मुरैना जिले के पहाड़गढ़ क्षेत्र में घायल अवस्था में पाई गई. नियमित निगरानी के दौरान उसकी गतिविधियों में असामान्यता देखी गई, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया. फिलहाल चीता का इलाज पालपुर स्थित पशु चिकित्सा केंद्र में विशेषज्ञों की निगरानी में जारी है. हालांकि अधिकारियों ने उसकी स्थिति स्थिर बताई है, लेकिन इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण और चीता पुनर्वास परियोजना पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

ट्रैकिंग के दौरान सामने आई असामान्यता

कूनो राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन के अनुसार, नियमित ट्रैकिंग के दौरान KGP-11 की गतिविधियों में बदलाव देखा गया. मॉनिटरिंग टीम को लगा कि चीता सामान्य व्यवहार नहीं कर रही है, जिसके बाद तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई.

मौके पर पहुंची वन और मेडिकल टीम

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सक मौके पर पहुंचे. प्रारंभिक जांच में मादा चीता के शरीर पर चोट के निशान पाए गए, जिसके बाद तुरंत उसे रेस्क्यू कर पालपुर स्थित पशु चिकित्सा केंद्र ले जाया गया.

पालपुर में चल रहा इलाज, स्थिति स्थिर

फिलहाल KGP-11 को क्वारंटाइन बोमा में रखा गया है, जहां विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है. अधिकारियों के मुताबिक, चीता की हालत फिलहाल स्थिर है और वह उपचार पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रही है. संक्रमण से बचाव के लिए उसे अन्य चीतों से अलग रखा गया है.

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भारत में जन्मे चीतों में शामिल है KGP-11

KGP-11 उन चीतों में से है, जिनका जन्म भारत में कूनो राष्ट्रीय उद्यान के भीतर हुआ था. मार्च 2025 में उसे जंगल में छोड़ा गया था, ताकि वह प्राकृतिक वातावरण में शिकार करना और स्वतंत्र रहना सीख सके.

चीता पुनर्स्थापन परियोजना का अहम हिस्सा

कूनो नेशनल पार्क में चीतों को बसाने की योजना भारत की महत्वाकांक्षी वन्यजीव परियोजनाओं में से एक है. इस परियोजना के तहत जन्मे शावकों को धीरे-धीरे जंगल में छोड़ा जा रहा है, ताकि देश में चीता आबादी को स्थायी रूप से स्थापित किया जा सके.

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घटना से बढ़ी विशेषज्ञों की चिंता

मादा चीता के घायल मिलने की घटना ने वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. अधिकारियों का कहना है कि चोट लगने के कारणों की जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.

रेडियो कॉलर से हो रही निगरानी

चीता KGP-11 सहित सभी चीतों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रेडियो कॉलर और ट्रैकिंग सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है. इसके माध्यम से टीम को हर समय उनके मूवमेंट और स्वास्थ्य की जानकारी मिलती रहती है.

अन्य चीते सुरक्षित, निगरानी जारी

कूनो प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पार्क में मौजूद अन्य सभी चीते फिलहाल पूरी तरह स्वस्थ हैं. उनकी नियमित निगरानी और स्वास्थ्य जांच लगातार जारी है.

संरक्षण के लिए सतर्कता जरूरी

यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि वन्यजीव संरक्षण परियोजनाओं में निरंतर सतर्कता बेहद जरूरी है. वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों की गहन जांच और तुरंत उपचार से चीतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है.

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जांच के बाद स्थिति होगी स्पष्ट

फिलहाल वन विभाग इस घटना की पूरी जांच में जुटा हुआ है. चोट के कारणों और संभावित जोखिमों का पता लगाकर भविष्य में सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है.

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