गर्मी में नहाते हुए इंदौर चिड़ियाघर पहुंचेगा हिप्पो, 709 किमी लंबे सफर के लिए किए जा रहे खास इंतजाम

कानपुर से करीब 709 किमी का सफर तय कर हिप्पो सतीश इंदौर चिड़ियाघर पहुंचेगा. गर्मी के मौसम में हिप्पो को नम रखने के लिए रास्ते भर उस पर पानी की बौछार की जाएगी.

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कानपुर का हिप्पो सतीश इंदौर चिड़ियाघर की बनेगा शान. (फाइल फोटो)

कानपुर और इंदौर चिड़ियाघर के बीच एनिमल एक्सचेंज हो रहा होने जा रहा है. जिसके तहत कानपुर चिड़ियाघर से एक दरियाई घोड़ा यानी हिप्पो सतीश इंदौर आएगा, जबकि इंदौर चिड़ियाघर की शेरनी वीरा कानपुर जाएगी. इस एनिमल एक्सचेंज को लेकर खास तैयारी चल रही है. कानपुर से इंदौर की दूरी करीब 709 किलोमीटर है, ऐसे में हिप्पो को वहां से लाने के लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं. लंबे सफर के दौरान हिप्पो के शरीर को ठंडा रखने के लिए 20 हजार लीटर पानी खर्च होगा. सफर के दौरान उस पर लगातार पानी की बौछार की जाएगी. 

इंदौर जू में किए जा रहे खास इंतजाम 

दरअसल, कानपुर और इंदौर के बीच हो रहे इस एनिमल एक्सचेंज की तैयारी अंतिम चरण में है. इंदौर चिड़ियाघर  हिप्पो सतीश के लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं. उसके लिए 8 बाई 5 का एक पिंजड़ा बनाया जा रहा है, जिसमें हिप्पो आसानी से रह सकेगा. 

अधिकतर समय पानी में गुजारते हैं हिप्पो.

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कानुपर से इंदौर कैसे लगाया जाएगा हिप्पो सतीश ? 

  • दरियाई घोड़ा (हिप्पो) एक उभयचर प्राणी है जो जमीन और पानी दोनों पर रहता है, लेकिन यह अपना अधिक समय पानी में ही गुजारता है, जो इसे लगातार ठंडा रखता है. 
  • एक बड़ा कारण यह भी है कि बारिश के मौसम को एनिमल एक्सचेंज के लिए चुना गया है, जिससे हिप्पो को लाने में आसानी होगी.  
  • इसके अलावा भी उसे कानपुर से इदौर लाने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं. कानपुर से इंदौर तक की करीब 709 किलोमीटर है, अपनी यात्रा के दौरान हिप्पो करीब 20 हजार लीटर पानी से नहाता हुआ जाएगा.
  • हिप्पो को जिस ट्रक से इंदौर ले जाया जाएगा उस पर दो वॉटर टैंक रखे जाएंगे. इस पानी की बौछार उस पर रास्ते भर की जाएगी. पानी खत्म होने पर रास्ते में वॉटर टैंक को भरा जाएगा.   

क्या है इंदौर के कमला नेहरू चिड़ियाघर का इतिहास 

इंदौर चिड़ियाघर की स्थापना 1974 में नगर निगम द्वारा की गई थी. भारत के पहले पीएम पंडित जवाहरलाल नेहरू की पत्नी के नाम पर इस नाम कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय रखा गया. इसका उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और जनता के लिए मनोरंजक शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किया गया था. 51 एकड़ में नवलाखा के पास बने इस चिड़ियाघर में शेर, बाघ, तेंदुए, मगरमच्छ, लकड़बग्घे और कई विदेशी प्रजातियों समेत विभिन्न प्रकार के स्तनधारी और पक्षी हैं.

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