इंदौर दूषित पानी त्रासदी: भागीरथपुरा का पानी सुरक्षित, कैलाश विजयवर्गीय ने शेयर की लैब रिपोर्ट

Indore Water Report: इंदौर के भागीरथपुरा से लिए गए पानी के पांच सैंपल आरटी-पीसीआर जांच में खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस से मुक्त पाए गए हैं. क्लोरीनेशन के बाद हालात सुधरे हैं, लेकिन प्रशासन ने एहतियात बरतने की सलाह जारी रखी है.

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Indore Water Report: भागीरथपुरा का पानी सुरक्षित, कैलाश विजयवर्गीय ने शेयर की लैब रिपोर्ट.
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Indore Water Report: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली त्रासदी के बीच 4 जनवरी 2026 को राहत की खबर सामने आई है. इंदौर की श्री औरोबिंदो मेडिकल कॉलेज और पीजी इंस्टीट्यूट की ताजा लैब रिपोर्ट में इलाके से लिए गए पानी के सैंपल सुरक्षित पाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, जांच किए गए पांचों सैंपल में पानी से फैलने वाली खतरनाक बीमारियों के कीटाणु नहीं मिले हैं.

कैलाश विजयवर्गीय ने शेयर की रिपोर्ट

मध्‍य प्रदेश की भाजपा सरकार में शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस रिपोर्ट को अपने ‘एक्स' हैंडल पर साझा किया. उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में, इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव और संभागायुक्त डॉ. सुदाम पी खाड़े के नेतृत्व में भागीरथपुरा में पानी की शुद्धता को लेकर किए गए क्लोरीनेशन और अन्य सुधारात्मक उपायों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं.  

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Indore Water Report 

वायरल पैथोजन भी नेगेटिव पाए गए

सेंट्रल क्लिनिकल मॉलिक्यूलर लेबोरेटरी की 4 जनवरी की रिपोर्ट में आरटी-पीसीआर तकनीक से भागीरथपुरा से लिए गए पानी के सैंपल का विश्लेषण किया गया. साफ बोतलों में लिए गए 25-25 मिलीलीटर के सभी पांच सैंपल (S-01 से S-05) में ई. कोलाई O157, जेनेरिक ई. कोलाई, विब्रियो कोलेरा, साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया के साथ-साथ रोटावायरस और एंटरोवायरस जैसे वायरल पैथोजन भी नेगेटिव पाए गए.

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि आरटी-पीसीआर जांच के दौरान जिन बैक्टीरियल और वायरल पैथोजन को टारगेट किया गया था, वे किसी भी सैंपल में मौजूद नहीं हैं. हालांकि, पानी की गुणवत्ता की पूरी पुष्टि के लिए आगे कल्चर-बेस्ड माइक्रोबायोलॉजिकल जांच और नियमित फिजिको-केमिकल टेस्ट कराने की सलाह भी दी गई है. 

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इंदौर दूष‍ित पानी कांड क्‍या है? 

गौरतलब है कि यह संकट दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुआ था, जब पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवेज मिलने की बात सामने आई थी. आरोप है कि एक पुलिस चौकी के टॉयलेट के पास लीकेज और सेप्टिक टैंक की खामी के कारण यह स्थिति बनी. स्थानीय लोगों ने लंबे समय से बदबूदार और गंदे नल के पानी की शिकायत की थी. 

इस घटना के बाद इलाके में डायरिया और उल्टी के मामले तेजी से बढ़े, जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई. हालांक‍ि इंदौर ज‍िला प्रशासन ने दूष‍ित पानी से 6 मौतों की पुष्‍ट‍ि की है. 200 से ज्यादा लोगों के बीमार होने की पुष्टि हुई थी. कई मरीजों को आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा. प्रशासन ने लीकेज को ठीक कर टैंकर से पानी की सप्लाई शुरू की, कुछ अधिकारियों को सस्पेंड किया गया और पूरे मामले की जांच भी जारी है.

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हालांकि, इससे पहले की कुछ जांचों में बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि हुई थी, लेकिन इंदौर के प्रमुख संस्थान की इस एडवांस्ड आरटी-पीसीआर रिपोर्ट ने फिलहाल राहत दी है. स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात के तौर पर लोगों से अभी भी पानी उबालकर पीने या टैंकर के पानी का उपयोग करने की अपील की है. 

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