1000 से ज्यादा बच्चों को सेना और पुलिस में दिलाई नौकरी, बेरोजगारों के मसीहा बने ये रिटायर्ड सैनिक

Indian Army Recruitment: रमेश तिवारी 2020 से अभी तक लगभग 1000 बच्चों को नौकरी दिलाने में मदद कर चुके हैं. यह सारे युवा इस वक्त सेना और पुलिस में काम कर रहे हैं. वर्तमान में उनकी एकेडमी में लगभग 100 बच्चे ऐसे हैं, जो पुलिस की भर्ती परीक्षा में पास हो चुके हैं, अब उनका फिजिकल होना है. जिसकी ये युवा यहां  ट्रेनिंग कर रहे हैं.

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Indian Army Training: देश के युवाओं में जज्बा है, हौसला है और देश के लिए कुछ करने का जुनून भी है, बस उनको सही दिशा और सही गाइडेंस की जरूरत है. इस सोच के साथ भारतीय सेना से रिटायर्ड नायब सूबेदार रमेश तिवारी काम कर रहे हैं. रिटायर होने के बाद रमेश तिवारी ने रीवा में आर्मी एंड सिविल सर्विसेज अकैडमी की स्थापना की. यहां पर उन्होंने सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों में जाने वाले बच्चों की ट्रेनिंग शुरू की.

खास तौर से अग्नि वीर और पुलिस के लिए उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहित करना शुरू किया. अपनी इस मुहिम के तहत रमेश तिवारी 2020 से अभी तक लगभग 1000 बच्चों को नौकरी दिलाने में मदद कर चुके हैं. यह सारे युवा इस वक्त सेना और पुलिस में काम कर रहे हैं. वर्तमान में उनकी एकेडमी में लगभग 100 बच्चे ऐसे हैं, जो पुलिस की भर्ती परीक्षा में पास हो चुके हैं, अब उनका फिजिकल होना है. जिसकी ये युवा यहां  ट्रेनिंग कर रहे हैं. रमेश तिवारी को उनके इसी कारनामे की वजह से पिछले दिनों जयपुर में आयोजित 78 में थल सेना दिवस पर सम्मानित किया गया.

हर वर्ष देशभर में 6 लोगों को किया जाता है सम्मानित

गौरतलब है कि ये सम्मान देशभर के 6 ऐसे लोगों को दी जाती है, जो सेना से रिटायर होने के बाद अच्छा काम कर रहे हैं. इस आयोजन में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल, मुख्यमंत्री राजस्थान, सहित कई प्रदेश के राज्यपाल पहुंचे थे. चुने हुए लोगों में लेफ्टिनेंट जनरल, ब्रिगेडियर, कमांडिंग ऑफिसर, ऑर्डिनरी कैप्टन, नायब सूबेदार और नायक को सम्मानित किया गया था. इस मौके पर देश के थल सेना प्रमुख से रमेश तिवारी बताया कि सेना में नौकरी के दौरान पाए गए अनुभव को पूरी तरीके से अपने बच्चों पर लागू करते हैं.

"दृढ़ इच्छा शक्ति से कोई भी काम किया जा सकता है"

रमेश तिवारी का कहना है कि सेना से मिला अनुशासन बहुत काम आया. अनुशासन से नेतृत्व क्षमता का विकास होता है. अथक परिश्रम, दृढ़ इच्छा शक्ति से कोई भी काम किया जा सकता है, जो आज के युवाओं के पास सभी तरह की क्षमता है, बस जरूरत उन्हें सही तरीके से गाइड करने की है. वही काम मैं कर रहा हूं.  

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रमेश तिवारी की बात की जाए, तो 7 जनवरी 2002 को सेना में भर्ती हुए थे और 31 जनवरी 2018 को लगभग साढ़े 16 साल की नौकरी के बाद रिटायर हो गए. सेना से रिटायर होने के बाद, आर्मी और सिविल सर्विसेज में जाने वाले बच्चों को तैयारी करानी शुरू की. इस प्रकार अब तक लगभग 1000 से ज्यादा बच्चों को अग्नि वीर, सेना, पुलिस व सुरक्षाबलों के लिए होने वाली परीक्षा में पास करवा कर नौकरी दिलवा चुके हैं. उन्होंने अपनी इस नेक कोशिश से इलाके के हजारों परिवारों के लोगों के चेहरे पर के मुस्कान लाने का काम किया है. 

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