सिस्टम ने मार डाला: जिंदा बुजुर्ग पोर्टल पर मृत घोषित; हरदा में 6 महीने से दफ्तरों के काट रहा चक्कर

हरदा में पोर्टल की गलती से जिंदा बुजुर्ग को मृत दिखाया गया. 6 महीने से योजनाओं से वंचित पीड़ित ने कलेक्टर से लगाई गुहार. जानिए क्या है मामला.

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Digital Record Mistake: मध्यप्रदेश के हरदा जिले से सरकारी सिस्टम की लापरवाही का हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक जिंदा बुजुर्ग को सरकारी पोर्टल पर मृत घोषित कर दिया गया. इस तकनीकी गलती की वजह से 58 वर्षीय दिव्यांग करणसिंह सावनेर पिछले छह महीनों से सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं और लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं. मामला तब सामने आया जब बुजुर्ग ने संबल योजना के लिए आवेदन किया और पोर्टल में खुद को मृत पाया. अब थक-हारकर उन्होंने कलेक्टर से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है. यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था और डिजिटल डेटा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है. हरदा से NDTV के लिए आनंद गौर की रिपोर्ट.

टिमरनी तहसील का मामला, पोर्टल पर ‘मृत' दर्ज

हरदा जिले की टिमरनी तहसील के ग्राम अहलवाड़ा निवासी करणसिंह सावनेर अपने बेटे के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने बताया कि वे पूरी तरह जीवित हैं, लेकिन सरकारी पोर्टल पर उनका नाम मृतक के रूप में दर्ज कर दिया गया है.

Digital Record Mistake: दिव्यांग पीड़ित बुजुर्ग

संबल योजना समेत कई लाभों से वंचित

करणसिंह का कहना है कि इस एक गलती की वजह से उन्हें संबल योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग होने के कारण वे इन योजनाओं पर निर्भर हैं, लेकिन सिस्टम की त्रुटि उन्हें लगातार परेशान कर रही है.

बीमारी और दिव्यांगता के बाद बढ़ी परेशानी

करणसिंह ने बताया कि करीब एक वर्ष पहले शुगर की बीमारी के कारण उनके पैर में गंभीर संक्रमण हो गया था, जिसके चलते जिला अस्पताल में उनका पैर काटना पड़ा. बाद में उन्होंने कृत्रिम पैर लगवाया, लेकिन इस बीच उनकी स्थिति और ज्यादा कठिन हो गई.

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Digital Record Mistake: शिकायती पत्र

आवेदन के दौरान खुली पोल

करीब सात महीने पहले उन्होंने संबल योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया, तभी यह सामने आया कि पोर्टल पर उनका नाम पहले से मृत दर्ज है. इसके बाद से वह लगातार अपने रिकॉर्ड में सुधार करवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं.

6 महीने से दफ्तरों के चक्कर

पीड़ित बुजुर्ग का आरोप है कि वह पिछले छह महीनों से अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि अधिकारी हर बार आश्वासन देते हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है.

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उम्र सीमा का भी खतरा, समय पर सुधार जरूरी

करणसिंह ने चिंता जताई कि यदि जल्द ही रिकॉर्ड में सुधार नहीं किया गया, तो 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद वह संबल योजना सहित कई लाभों से स्थायी रूप से वंचित रह सकते हैं.

जनसुनवाई में लगाई न्याय की गुहार

आखिरकार परेशान होकर करणसिंह सावनेर ने जनसुनवाई में आवेदन देकर प्रशासन से न्याय की मांग की है. उन्होंने कहा कि एक तकनीकी गलती ने उनका जीवन पूरी तरह प्रभावित कर दिया है.

प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा

सहायक श्रम अधिकारी मनीष चौरसिया ने बताया कि मामले की जानकारी मिल गई है और संबंधित पोर्टल व रिकॉर्ड की जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि तकनीकी कारणों और ओटीपी सत्यापन प्रक्रिया की जांच के बाद त्रुटि का कारण स्पष्ट किया जाएगा और आवश्यक सुधार कराया जाएगा.

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