Jiwaji University Gwalior: ग्वालियर नैक से A डबल प्लस का दर्जा अपने पास रखने वाली मध्य प्रदेश की इकलौती ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी हमेशा से गड़बड़ी और फर्जीवाड़े के लिए सुर्खियों मे रहती है. पहले फर्जी मार्कशीट और फिर फर्जी कॉलेजों को संबद्धता देने के लिए चर्चित रहा. वहीं अब जीवाजी विश्वविद्यालय (JU) में ‘नंबर स्कैम' का मामला सामने आया है.
फेल छात्र को कर दिया गया पास
दरअसल, जीवाजी यूनिवर्सिटी में फेल छात्र की ओएमआर शीट में टेंपरिंग कर बढ़े हुए नंबर देकर पास करा दिया गया. मामला उजागर होने के बाद हंगामा मच गया. हालांकि विवि इसे दबाने में लगा है.
मूल्यांकनकर्ता ने लिखा था- 'बकवास'
बता दें कि जीवाजी विश्वविद्यालय में M.SC माइक्रोबायोलॉजी थर्ड सेमेस्टर के एक छात्र की मार्कशीट से हड़कंप मचा हुआ है. दिसंबर 2025 में हुई परीक्षा में छात्र को मूल्यांकन करने वाले प्रोफेसर ने सिर्फ 02 नंबर दिए थे. साथ ही आंसर शीट (कॉपी) पर 'बकवास' शब्द भी लिखा था, क्योंकि छात्र ने कॉपी में कुछ लिखा ही नहीं था, लेकिन साल 2026 में जब मार्कशीट सामने आई तो छात्र को 32 नंबर मिले थे. वो फेल से पास हो गया. इस मामले में गोपनीय शाखा में शिकायत की गई, जिसके बाद एक जांच कमेटी बनाई गई.ॉ
प्रोफेसर ने दिए थे सिर्फ 02 नंबर
हालांकि जांच टीम ने भी 'सिंगल केस' की जांच कर मामले को रफा दफा कर दिया, जबकि जो गड़बड़ी पकड़ी गई है, उसमें यूनिवर्सिटी के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से OMR शीट में टेंपरिंग (ब्लेड से खुरच कर) हेरफेर किया गया है. आशंका है कि इस तरह की गड़बड़ी बड़े स्तर पर हुई है. यदि जांच का दायरा बढ़ता तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता था. इससे पहले भी अन्य परीक्षाओं में भी अंकों की गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं, जिन्हें शिकायतों के बाद सुधार गया था.
कुलगुरु डॉ राजकुमार आचार्य ने स्वीकार किया कि नंबर टेम्परिंग का एक मामला सामने आया था, जिस पर तत्काल कार्रवाई की गई. इसमें एक जांच समिति बनाई गई है, जो विस्तृत जांच कर रही है. ये पहला मामला है और आगे ऐसा न हो सके इस दिशा मे भी ठोस कदम उठाये जा रहे हैं.














