Grand Master Open Chess: 6 साल की अमायरा खान बनीं चेस चैंपियन, सागर की बेटी ने विश्व स्तर पर पाया 13वां स्थान

Grand Master Open Chess Championship: तमिलनाडु में आयोजित ग्रैंड मास्टर ओपन चेस प्रतियोगिता में अमायरा खान ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोवा के एक फिडे रेटेड खिलाड़ी को हराया. इस जीत के साथ ही उन्होंने 1450 की अंतरराष्ट्रीय फिडे रेटिंग हासिल की है, जो इस उम्र में बेहद बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. इसके अलावा अमायरा ने गर्ल्स कैटेगरी में ऑल ओवर वर्ल्ड में 13वां स्थान प्राप्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है.

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Grand Master Open Chess Championship winner: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर (Sagar) शहर की रहने वाली 6 वर्षीय नन्हीं प्रतिभा अमायरा खान ने शतरंज की दुनिया में बड़ी उपलब्धि हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है. इतनी कम उम्र में जहां बच्चे सामान्य खेलों में व्यस्त रहते हैं. वहीं, अमायरा ने चेस जैसे बौद्धिक खेल में अपनी शानदार क्षमता का प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है.

हाल ही में तमिलनाडु में आयोजित ग्रैंड मास्टर ओपन चेस प्रतियोगिता में अमायरा खान ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोवा के एक फिडे रेटेड खिलाड़ी को हराया. इस जीत के साथ ही उन्होंने 1450 की अंतरराष्ट्रीय फिडे रेटिंग हासिल की है, जो इस उम्र में बेहद बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. इसके अलावा अमायरा ने गर्ल्स कैटेगरी में ऑल ओवर वर्ल्ड में 13वां स्थान प्राप्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है.

तीन साल की उम्र से ही शतरंज खेलना कर दिया था शुरू

अमायरा की यह सफलता और भी खास इसलिए है, क्योंकि उन्होंने मात्र 3 साल की उम्र से ही शतरंज खेलना शुरू कर दिया था. छोटी सी उम्र में ही उन्होंने खेल के प्रति गहरी रुचि और लगन दिखाई, जिसका परिणाम आज सबके सामने है. अब तक अमायरा 50 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेकर शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं.

ऐसे विकसित हुई चेस की समझ और रणनीति

अमायरा की मां साजिया खान बताती हैं कि उनकी बेटी की शतरंज में रुचि एक खास मौके से शुरू हुई. उन्होंने बताया कि अमायरा के जन्मदिन पर उनके दादा ने उन्हें एक चेस बोर्ड उपहार में दिया था. इसके बाद वह अक्सर अपने दादा के साथ बैठकर शतरंज खेला करती थीं. खेल-खेल में ही उनकी समझ और रणनीति विकसित होती गई.

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4 वर्ष की उम्र में अमायरा ने खेला था पहला मुकाबला

जब परिवार को यह महसूस हुआ कि अमायरा का झुकाव शतरंज की ओर अधिक है, तब उन्हें एक चेस एकेडमी में दाखिला दिलाया गया. वहां नियमित प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने से उनके खेल में लगातार निखार आता गया. महज 4 साल की उम्र में ही अमायरा ने अपना पहला मुकाबला जीत लिया था, जिसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

पूरे जिले का बढ़ाता मान

इसके बाद अमायरा ने एक के बाद एक कई प्रतियोगिताओं में जीत दर्ज की और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाती चली गयी. आज उनकी मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि उन्होंने विश्व स्तर पर 13वां स्थान हासिल किया है, जिससे पूरा सागर गौरवान्वित महसूस कर रहा है.

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परिजनों का कहना है कि अमायरा को आगे भी इसी तरह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा. उनका सपना है कि अमायरा भविष्य में देश का प्रतिनिधित्व करे और भारत का नाम विश्व स्तर पर और ऊंचा करें. अमायरा की इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर बच्चों को सही दिशा, प्रोत्साहन और अवसर मिले, तो वे कम उम्र में भी बड़ी से बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं. सागर की यह नन्हीं शतरंज खिलाड़ी आज कई बच्चों के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

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