ट्विशा शर्मा की मौत मामले में आरोपी सास गिरिबाला और पति समर्थ को जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट मिलने के मामले ने जब तूल पकड़ा तो जेल प्रबंधन हरकत में आ गया. फिर दोनों को जेल अस्पताल वार्ड से बैरक में शिफ्ट कर दिया गया. उधर, कोर्ट के आदेश के बाद जेल में गिरिबाला की सुरक्षा को लेकर जेल प्रबंधन भी अलर्ट पर है. सुरक्षा को देखते हुए अतिरिक्त प्रहरी तैनात किए गए हैं और सीसीटीवी कैमरों की भी संख्या बढ़ाई है.
गिरिबाला सिंह और बेटे समर्थ सिंह को सुरक्षा देने की वजह भी सामने आ गई है. दरअसल, गिरिबाला ने जज रहते हुए जिन आरोपियों को सजा सुनाई थी, उनमें से 29 कैसी इसी जेल में सजायाफ्ता हैं. बता दें कि गिरिबाला सिंह भोपाल जिला कोर्ट में 15 जुलाई 2021 से 28 फरवरी 2023 तक जज रही थीं.
पुलिस की लापरवाही भी आई सामने
ट्विशा शर्मा की मौत मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आई है. बताया जा रहा है कि जिस फंदे से ट्विशा की मौत हुई थी, उस लिगेचर (फांसी का फंदा) की जब्ती बिना निशानदेही के की गई थी. अब सवाल उठ रहा कि पुलिस ने जो लिगेचर जब्त किया क्या वह असली ही फंदा था. इस तरह अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.
12 मई को ट्विशा की मौत के बाद 13 मई को पहुंचे कटारा हिल्स थाने के एसआई दिनेश शर्मा ने मृतका का लैपटॉप, फोन जब्त किया था. उसी समय लिगेचर भी जब्त किया गया था, जबकि उस समय दो गवाह यानी सास गिरिबाला सिंह और ट्विशा का पति समर्थ भी मौजूद थे, लेकिन उनसे निशानदेही नहीं ली गई थी. अगर लिगेचर (फांसी का फंदा) जब्त करना होता है तो उसकी निशानदेही जरूर होती है.
गाड़ी में लेकर फंदा घूमते रहे एसआई
हैरानगी की बात तो ये है जब पता चला कि एसआई दिनेश शर्मा दो दिन तक इसी लिगेचर को अपनी गाड़ी में डालकर घूमता रहे. जब ट्विशा का पहला पोस्टमॉर्टम कराया गया था तब भी उसने लिगेचर उपलब्ध नहीं कराया गया था, क्योंकि एसआई उसे कार में डाले पड़ा था.
जब सीबीआई सीन रिक्रिएशन करने पहुंची तो देखा कि जहां ट्विशा का शव लटका था उसी जगह एक और जिम्नास्टिक की हुक भी लटकी थी, जिस पर भी वैसा ही जिम्नास्टिक हुक लटका था, जैसा पुलिस ने ट्विशा के फांसी के फंदे का दावा किया गया. ट्विशा के वकील और परिजनों ने भी इन सबूतों को सीबीआई को सौंपने की तैयारी कर ली है.
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