Dhar Bhojshala: बसंत पूजा के बीच ‘डमी नमाज़’, क्या मुस्लिम समाज के लोगों को 16 घंटे रोका गया? जानें पूरा विवाद

धार के भोजशाला-कमाल मौलाना परिसर में बसंत पंचमी और जुमे की नमाज़ शांतिपूर्ण रही, लेकिन ‘डमी नमाज़’ के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. प्रशासन पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिखावटी पालन करने का आरोप लगा है. जानिए क्या है पूरा मामला

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पश्चिमी मध्य प्रदेश के सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील धार में जिस दिन को प्रशासन ने शांति और संवैधानिक जिम्मेदारी के पालन की मिसाल बताया, उसी दिन ‘डमी नमाज़' के गंभीर आरोपों ने नए विवाद को जन्म दे दिया. शहर की गुलमोहर कॉलोनी निवासी इमरान ख़ान के आरोपों के बाद यह मामला तूल पकड़ गया. इमरान का आरोप है कि जिला प्रशासन और पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिखावटी पालन करते हुए कुछ लोगों से “डमी नमाज़” करवाई, जबकि स्थानीय मुस्लिमों को नमाज़ अदा करने नहीं दी गई.

इमरान ख़ान ने लगाए गंभीर आरोप

इमरान ख़ान का दावा है कि गुरुवार रात प्रशासन और पुलिस के अधिकारी उन्हें और अन्य मुस्लिमों को सुरक्षा के नाम पर अपने साथ ले गए और भरोसा दिलाया कि शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच उन्हें एएसआई संरक्षित भोजशाला-कमाल मौलाना परिसर में नमाज़ अदा करने दी जाएगी. लेकिन, ऐसा कुछ नहीं हुआ. “1.40 का वक्त हो गया था, लेकिन कोई भी प्रशासन का आदमी ना हमसे मिलने आया ना नमाज़ के बारे में कुछ पूछा, रोशनी पाटीदार मैडम और आनंद तिवारी साहब हमको रात में लेकर आए थे कि आपको नमाज पढ़ाएंगे, समाज के वरिष्ठ लोगों को उनके साथ पहुंचाया था. उन्होंने आरोप लगाया कि डमी नमाज की वीडियो बनाए गए. किन लोगों को लाकर नमाज पढ़ाई गई, कुछ नहीं पता. प्रशासन ने हमारे साथ बड़ा धोखा किया है. हमने खुद के लिए नए कुर्ते पैजामे लाकर रखे थे, हमारे साथ गलत हुआ है. हम 15-20 लोग थे, प्रशासन ने कोर्ट का आदेश नहीं माना है”.   

16 घंटे तक रोके रखा  

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दो बिल्कुल विरोधाभासी दावे सामने आए हैं. जिला प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के 22 जनवरी के आदेश के अनुसार, भोजशाला परिसर में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से तय स्थान पर नमाज़ अदा की. वहीं गुलमोहर कॉलोनी के निवासियों का आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर रोशनी पाटीदार और डीएसपी आनंद तिवारी ने उन्हें और उनके साथियों को करीब 16 घंटे तक कमाल मौलाना मस्जिद में रोके रखा, लेकिन उन्हें नमाज़ पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई. उनका यह भी कहना है कि बाद में मस्जिद के पिछले हिस्से में कुछ लोगों से नमाज़ करवा कर उसका वीडियो बनाया गया, ताकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन का दावा किया जा सके.

स्थानीय लोग थे या बाहर से लाए गए 

इसी बीच, एक अलग वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कुछ लोग कमाल मौलाना मस्जिद में प्रवेश करते और नमाज़ की तैयारी करते दिख रहे हैं. खास बात यह है कि इस वीडियो में दिख रहे लोग पीले रंग की वॉलंटियर जैकेट पहने हुए नजर आ रहे हैं, जिससे यह सवाल और गहरा गया है कि ये स्थानीय लोग थे या बाहर से लाए गए वॉलेटियर.

तब हिंसा का बना था कारण 

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब बसंत पंचमी और जुमे की नमाज़ का संयोग जो 2013 और 2016 में हिंसा का कारण बना था, इस बार पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हजारों हिंदू श्रद्धालु बड़े-बड़े जुलूसों में धार पहुंचे और सूर्योदय से सूर्यास्त तक भोजशाला-कमाल मौलाना परिसर में अखंड पूजा-अर्चना की. हिंदू पक्ष इस स्थल को 11वीं शताब्दी का भोजशाला मंदिर और संस्कृत महाविद्यालय मानता है, जो परमार वंश के राजा भोज द्वारा देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित बताया जाता है. वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौलाना मस्जिद के रूप में देखता है.

बिना किसी व्यवधान के नमाज अदा की

धार में तैनात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि 15 से 17 मुस्लिम पुरुषों को एंटी-रायट वाहन में सुरक्षित तरीके से परिसर तक ले जाया गया और उन्होंने दोपहर 1 से 3 बजे के बीच तय स्थान पर बिना किसी व्यवधान के नमाज़ अदा की. जब पत्रकारों ने इमरान ख़ान और गुलमोहर कॉलोनी के निवासियों के आरोपों पर सवाल किया, तो धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया. 

मैं टिप्पणी नहीं करना चाहता

कलेक्टर ने कहा, “मैं इस तरह के आरोपों पर टिप्पणी नहीं करना चाहता. मैं आधिकारिक तौर पर इतना कहना चाहूंगा कि नियत स्थान पर शांतिपूर्वक तरीके से मुस्लिम समुदाय ने नमाज पढ़ी है. अनुमानित संख्या 15-17 है जो व्यवस्था सर्वोच्च अदालत ने बनाई थी, समुदाय ने पहले भी सांकेतिक नमाज की चर्चा की थी. मुझे नहीं लगता समुदाय में, किसी भी फैसले में इस बात का वर्णन था कि लोग कहां के रहने वाले हैं. सर्वोच्च न्यायलय के आदेश में संख्या बतानी थी कि कितनी संख्या है, जिन लोगों ने नाम दिए उस आधार पर कार्रवाई हुई.”

सीएम यादव ने की सराहना 

राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए एक ही परिसर में, अलग-अलग स्थानों पर दोनों समुदायों की पूजा और नमाज़ शांतिपूर्वक संपन्न हुई. दशकों से भोजशाला आंदोलन से जुड़े गोपाल शर्मा और अशोक जैन जैसे हिंदू संगठनों के नेताओं ने प्रशासन और सरकार का आभार जताया कि एक दशक बाद बसंत पंचमी पर अखंड पूजा संभव हो सकी. हालांकि, ‘डमी नमाज़' के आरोप, सामने आए वीडियो और परस्पर विरोधी दावों ने यह साफ कर दिया है कि भले ही उस दिन एक भी पत्थर नहीं चला, लेकिन भोजशाला-कमाल मौलाना विवाद की दरारें अब भी जस की तस बनी हुई हैं. 
 

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