पश्चिमी मध्य प्रदेश के सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील धार में जिस दिन को प्रशासन ने शांति और संवैधानिक जिम्मेदारी के पालन की मिसाल बताया, उसी दिन ‘डमी नमाज़' के गंभीर आरोपों ने नए विवाद को जन्म दे दिया. शहर की गुलमोहर कॉलोनी निवासी इमरान ख़ान के आरोपों के बाद यह मामला तूल पकड़ गया. इमरान का आरोप है कि जिला प्रशासन और पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिखावटी पालन करते हुए कुछ लोगों से “डमी नमाज़” करवाई, जबकि स्थानीय मुस्लिमों को नमाज़ अदा करने नहीं दी गई.
इमरान ख़ान ने लगाए गंभीर आरोप
16 घंटे तक रोके रखा
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दो बिल्कुल विरोधाभासी दावे सामने आए हैं. जिला प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के 22 जनवरी के आदेश के अनुसार, भोजशाला परिसर में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से तय स्थान पर नमाज़ अदा की. वहीं गुलमोहर कॉलोनी के निवासियों का आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर रोशनी पाटीदार और डीएसपी आनंद तिवारी ने उन्हें और उनके साथियों को करीब 16 घंटे तक कमाल मौलाना मस्जिद में रोके रखा, लेकिन उन्हें नमाज़ पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई. उनका यह भी कहना है कि बाद में मस्जिद के पिछले हिस्से में कुछ लोगों से नमाज़ करवा कर उसका वीडियो बनाया गया, ताकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन का दावा किया जा सके.
स्थानीय लोग थे या बाहर से लाए गए
तब हिंसा का बना था कारण
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब बसंत पंचमी और जुमे की नमाज़ का संयोग जो 2013 और 2016 में हिंसा का कारण बना था, इस बार पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हजारों हिंदू श्रद्धालु बड़े-बड़े जुलूसों में धार पहुंचे और सूर्योदय से सूर्यास्त तक भोजशाला-कमाल मौलाना परिसर में अखंड पूजा-अर्चना की. हिंदू पक्ष इस स्थल को 11वीं शताब्दी का भोजशाला मंदिर और संस्कृत महाविद्यालय मानता है, जो परमार वंश के राजा भोज द्वारा देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित बताया जाता है. वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौलाना मस्जिद के रूप में देखता है.
बिना किसी व्यवधान के नमाज अदा की
धार में तैनात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि 15 से 17 मुस्लिम पुरुषों को एंटी-रायट वाहन में सुरक्षित तरीके से परिसर तक ले जाया गया और उन्होंने दोपहर 1 से 3 बजे के बीच तय स्थान पर बिना किसी व्यवधान के नमाज़ अदा की. जब पत्रकारों ने इमरान ख़ान और गुलमोहर कॉलोनी के निवासियों के आरोपों पर सवाल किया, तो धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया.
मैं टिप्पणी नहीं करना चाहता
सीएम यादव ने की सराहना
राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए एक ही परिसर में, अलग-अलग स्थानों पर दोनों समुदायों की पूजा और नमाज़ शांतिपूर्वक संपन्न हुई. दशकों से भोजशाला आंदोलन से जुड़े गोपाल शर्मा और अशोक जैन जैसे हिंदू संगठनों के नेताओं ने प्रशासन और सरकार का आभार जताया कि एक दशक बाद बसंत पंचमी पर अखंड पूजा संभव हो सकी. हालांकि, ‘डमी नमाज़' के आरोप, सामने आए वीडियो और परस्पर विरोधी दावों ने यह साफ कर दिया है कि भले ही उस दिन एक भी पत्थर नहीं चला, लेकिन भोजशाला-कमाल मौलाना विवाद की दरारें अब भी जस की तस बनी हुई हैं.














