अमेरिका-इजरायल और ईरान में युद्ध (Israel-USA and Iran War) के चलते मिडिल ईस्ट (Middle East) यानी खाड़ी देश भी प्रभावित हुए हैं. इसका असर पर भारत में भी देखने को मिल रहा है. इस युद्ध के चलते एलपीजी गैस और खजूर-मेवे पर भी असर पड़ रहा है. इजरायल-इरान में जारी युद्ध सीधे आम लोगों की जेब पर असर डाल रहा है. अब रमजान के महीने में इस्तेमाल होने वाले मेवों की कीमतों में अचानक तेज उछाल आ गया है. पिस्ता और खजूर जैसे जरूरी मेवे अब रोजेदारों की पहुंच से दूर होते नजर आ रहे हैं.
रमजान का महीना में मुस्लिम समुदाय इफ्तार में खजूर और मेवों का विशेष रूप से इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इस बार मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध का असर बाजारों में साफ दिखाई दे रहा है. दरअसल, खजूर और पिस्ता सहित कई मेवे बड़े पैमाने पर मिडिल ईस्ट के देशों से आयात किए जाते हैं. युद्ध की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है. बाजार में पिस्ता और खजूर के दामों में काफी बढ़ोतरी हो गई है.
पिछले साल की तुलना में इस बार खजूर और पिस्ता काफी महंगे हो गए हैं. बाहर से माल कम आ रहा है, इसलिए दाम बढ़ गए हैं. ग्राहक भी कम मात्रा में खरीद रहे हैं.
क्या कह रहे दुकानदार
मंडला में एक दुकानदार ने बताया कि रमजान में रोजा खोलते समय खजूर खाना एक परंपरा मानी जाती है, लेकिन बढ़ती कीमतों ने कई रोजेदारों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कई लोग अब कम मात्रा में या सस्ते विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं. रमजान में खजूर जरूरी होता है, लेकिन इस बार दाम बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं. पहले जितना लेते थे उतना लेना मुश्किल हो गया है.
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व्यापारियों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले दिनों में मेवों की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है. यानी अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब स्थानीय बाजारों तक पहुंच चुका है. रमजान के पवित्र महीने में जहां खजूर और मेवे रोजेदारों की थाली का अहम हिस्सा होते हैं, वहीं बढ़ती कीमतों ने लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है.














