रहस्यमयी बेहोशी!: एक महीने से सरकारी स्कूल में गिर रहीं बच्चियां, जांच रिपोर्ट नॉर्मल, क्या मास हिस्टीरिया है कारण? 

छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ छुईखदान गंडई जिले के एक प्राथमिक स्कूल में बीते एक महीने से बच्चियां अचानक बेहोश होकर गिर रही हैं. उनकी स्वास्थ्य जांच में सब कुछ नॉर्मल है, इसके बाद भी उनका बेहोश होना प्रशासन और अभिभावकों दोनों के लिए गंभीर चिंता का कारण बना हुआ है. ऐसे में अब मास हिस्टीरिया की आशंका जताई जा रही है.  

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CG News: एक महीने से अचानक बेहोश होकर गिर रही हैं बच्चियां.

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव संभाग के खैरागढ़ छुईखदान गंडई जिले के छुईखदान क्षेत्र अंतर्गत प्राथमिक शाला खैरबना इन दिनों चर्चा में है. यहां पढ़ने वाली बच्चियां स्कूल में अचानक बेहोश होकर गिर जा रही हैं. जानकारी के अनुसार, प्रार्थना के बाद सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच बच्चियां अचानक बेहोश हो जाती हैं.

इस गंभीर समस्या से 15 से 20 बच्चियां जूझ रही हैं. इस स्कूल में कक्षा पहली से पांचवीं तक की पढ़ाई संचालित होती है. स्कूल में कुल 130 बच्चों में 74 बालक और 56 बालिकाएं अध्ययनरत हैं. खास बात यह है कि यह समस्या सिर्फ बच्चियों में ही देखी जा रही है. बालकों में इस तरह के कोई लक्षण सामने नहीं आए हैं. NDTV की ने टीम स्कूल पहुंचकर इस पूरे मामले की पड़ताल की, जानिए क्या सामने आया?

मेडिकल कैंप लगाकर जांच

बच्चियों के लगातार बेहोश होकर गिरने के कारण जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया. स्कूल परिसर में मेडिकल कैंप लगाया गया और बच्चियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया. खैरागढ़ जिला अस्पताल में भी कुछ बच्चों की विस्तृत जांच की गई, लेकिन सभी रिपोर्ट सामान्य पाई गईं. कलेक्टर ने स्वयं स्कूल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. लेकिन, जांच रिपोर्ट नॉर्मल आने पर यह मामला चिंता का कारण बन गया है. 

चक्कर, घबराहट और बेहोशी 

NDTV से बात करते हुए पीड़ित बच्ची की मां आरती साहू ने बताया कि बेटी को घर में इस तरह की कोई परेशानी नहीं होती है. स्कूल में प्रार्थना के बाद उसे चक्कर आना और घबराहट होने लगती है, जिसके बाद वह बेहोश हो जाती है. इसी तरह की शिकायत अन्य बच्चियों को भी हो रही है. इस घटना को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं भी हो रही हैं. कुछ लोग इसे अदृश्य शक्तियों (भूत-प्रेत) से जोड़कर देख रहे हैं, जिससे डर और भ्रम का माहौल बन रहा है.

मास हिस्टीरिया की आशंका 

जिला पंचायत सीईओ प्रेम कुमार पटेल ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर यह मामला मास हिस्टीरिया का लग रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार कई बार डर, तनाव या किसी एक घटना की चर्चा पूरे समूह पर मानसिक असर डाल देती है. एक बच्ची को देखकर दूसरी बच्ची में भी वही लक्षण उभर आते हैं, जबकि शरीर में कोई वास्तविक बीमारी नहीं होती.

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सतर्कता बरतने के निर्देश

फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर लगातार नजर रखे हुए हैं. स्कूल प्रबंधन को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं. यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि बच्चियों में किसी तरह का भय न फैले और माहौल सामान्य बना रहे. हालांकि, बच्चियों को स्थिति से कब राहत मिलेगी, ऐसे लेकर अभी तक कुछ साफ नहीं है.  

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