छोले वाली मैया की अद्भुत कहानी: 450 साल पहले यज्ञ से प्रकट हुई थी पांच मुख वाली माता, पूरी होती यहां हर मनोकामना

Chaitra Navratri 2026: कहा जाता है कि कई साल पहले गांव में महामारी फैली थी और लोग मरने लगे थे. उसी समय एक संत गांव में आए और लोगों से यज्ञ करने के लिए कहा. यज्ञ के सातवें दिन छोले के पेड़ के नीचे जमीन फटी और पांच मुख वाली माता की प्रतिमा प्रकट हुई. इसके बाद गांव में महामारी खत्म हो गई और तब से लोग माता की पूजा श्रद्धा भाव से करने लगे.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins

Chaitra Navratri 2026: भारत हमेशा से आस्था और अध्यात्म की पवित्र भूमि रहा है, जहां हर कोने में भक्ति की एक अलग ही ऊर्जा महसूस होती है. खासकर नवरात्रि के दौरान देवी के मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है. कहते हैं इन नौ दिनों में माता रानी के दर्शन और पूजा आराधना से हर तरह का कष्ट दूर होता है. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे मध्य प्रदेश के मशहूर मंदिर के बारे में, जहां पर दर्शन के लिए भीड़ लगती है. अगर आप भी मध्य प्रदेश में हैं तो इस मंदिर में दर्शन कर सकते हैं. यहां दर्शन करने से हर मनोकामना पूरी होती है. 

यहां देश के कोने-कोने से पहुंचते हैं श्रद्धालु 

दरअसल, मध्य प्रदेश के रायसेन जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर ग्राम खंडेरा में आस्था का एक अद्भुत केंद्र स्थित है. मां छोले वाली का पावन दरबार... मान्यता है कि पिछले 450 वर्षों से यहां विराजमान मां अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी कर रही हैं. यही वजह है कि न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

माता रानी ने महामारी का किया था अंत

सागर-भोपाल मार्ग पर बसे ग्राम खंडेरा में स्थित मां छोले वाली का यह दरबार श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक बना हुआ है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, करीब 450 साल पहले इस क्षेत्र में एक भयंकर महामारी फैली थी. हालात इतने भयावह हो गए थे कि एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार कर लौटते-लौटते दूसरे की मृत्यु हो जाती थी.

गांव में मातम और भय का माहौल था. इसी दौरान एक दिन ग्रामीणों को रास्ते में एक साधु मिले. जब ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा बताई, तो साधु ने उपाय बताया कि यदि यहां सूखे नारियल का यज्ञ किया जाए, तो महामारी से मुक्ति मिल सकती है. ग्रामीणों के अनुरोध पर साधु महात्मा ने यज्ञ संपन्न कराया.

Advertisement

छोले के पेड़ से प्रकट हुईं पांच मुख वाली देवी

मान्यता है कि यज्ञ के बाद मां स्वयं पांच पिंडी स्वरूप में एक छोले के पेड़ से प्रकट हुईं. तभी से यह स्थान मां छोले वाली के दरबार के रूप में प्रसिद्ध हो गया और मां पांच पिंडियों के रूप में यहां विराजमान हैं. आज भी यह दरबार चमत्कारों और अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. भक्त दूर-दूर से यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और मां के चरणों में हाजिरी लगाते हैं. विशेषकर नवरात्रि के दौरान यहां आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है, जब सैकड़ों श्रद्धालु नंगे पैर पैदल चलकर मां के दरबार तक पहुंचते हैं. 

कहा जाता है कि जिन महिलाओं की गोद सूनी होती है, वे यहां सच्चे मन से अर्जी लगाती हैं तो मां उनकी झोली खुशियों से भर देती हैं और जिनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं, वो मां के दरबार में चुनरी चढ़ाकर अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं.

Advertisement

ये भी पढ़ें: Chaitra Navratri: जहां 12 महीने खिलता है नीम… तालाब का पानी नहीं होता खराब! जानिए शक्तिनगर स्थित ज्वालामुखी मंदिर की कहानी

Featured Video Of The Day
Iran Israel War: ट्रंप के 'गुरुर' पर सबसे बड़ा हमला | War News | Iran | Bharat Ki Baat Batata Hoon
Topics mentioned in this article