बुरहानपुर के बहादरपुर गांव में एक निजी स्कूल संचालिका दीपिका सोनी ने अनूठी पहल शुरू की है. जिन बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है, ऐसे बच्चों को स्कूल में कक्षा नर्सरी से लेकर कक्षा-8वीं तक मुफ्त शिक्षा देने की बात कही है. दरअसल, जिन बच्चों के पिता का बचपन में ही असमय निधन हो जाता है, ऐसी माताओं के सामने अपने बच्चों का ख्याल रखने के साथ उन्हें शिक्षा दिलाना एक बड़ी चुनौती बन जाती है. इसलिए स्कूल ने ऐसा कदम उठाया है.
यह पहल केवल एक घोषणा भर नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत भी हो चुकी है. स्कूल ने ऐसे दो बच्चों का प्रवेश पूरी तरह निशुल्क कर लिया है और उनकी कक्षा 8वीं तक की पढ़ाई का पूरा खर्च स्वयं उठाने का निर्णय लिया है.
पत्नी को बिना पति के बच्चों को पालना हो जाता है मुश्किल
संचालिका दीपिका सोनी का कहना है कि पिता के निधन के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है. ऐसे समय में बच्चों की पढ़ाई जारी रखना कई परिवारों के लिए कठिन हो जाता है. उन्होंने बताया कि कई बार मां अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर परेशान रहती है, क्योंकि घर की जिम्मेदारी और सीमित संसाधनों के बीच शिक्षा का खर्च उठाना आसान नहीं होता. इसी स्थिति को देखते हुए उन्होंने यह पहल शुरू करने का निर्णय लिया.
शिक्षा बदल सकती है बच्चों का भविष्य
दीपिका सोनी का मानना है कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो किसी भी बच्चे का भविष्य बदल सकती है. यदि ऐसे बच्चों को समय पर सही शिक्षा और सहारा मिल जाए तो वे भी समाज में आगे बढ़कर एक बेहतर जीवन बना सकते हैं. उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास केवल पढ़ाई करवाना नहीं है, बल्कि इन बच्चों को आत्मविश्वास और सुरक्षित भविष्य देना भी है.
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि यह योजना आगे भी जारी रहेगी और जरूरतमंद बच्चों को इसका लाभ देने की कोशिश की जाएगी. यदि किसी परिवार में पिता का देहांत हो चुका है और वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं तो ऐसे बच्चों को स्कूल में प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा. इसके साथ ही उनकी शिक्षा से संबंधित सभी आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा.
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स्थानीय लोगों की सराहना
स्थानीय लोगों ने भी स्कूल की इस पहल की सराहना की है. उनका कहना है कि आज के समय में जब शिक्षा का खर्च लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में किसी स्कूल द्वारा जरूरतमंद बच्चों के लिए इस प्रकार का निर्णय लेना वास्तव में प्रशंसनीय है. यह पहल न केवल बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद करेगी, बल्कि समाज में मानवीय संवेदना और सहयोग की भावना को भी मजबूत करेगी.














