भोपाल के पुलिस कमिश्नर ऑफिस में एक ऐसा पल आया, जब कुछ मिनटों की सूझबूझ और तत्परता ने एक व्यक्ति की जान बचा ली. वेटिंग रूम में बैठा एक शख्स अचानक कुर्सी से गिर गया. मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बिना देर किए सीपीआर देकर उसे नई जिंदगी दे दी.
दरअसल, भोपाल के पुलिस कमिश्नर कार्यालय में एक शख्स वेटिंग एरिया में बैठकर अपने काम के लिए इंतजार कर रहा था. जैसे ही वह नीचे गिरा और तड़पने लगा, वहां मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
पुलिसकर्मियों ने तुरंत संभाला मोर्चा
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए कुछ पुलिसकर्मी तुरंत आगे आए. उन्हें अंदेशा हुआ कि युवक को हार्ट अटैक आया है. ऐसे में आरक्षक मुकेश साहू और रंजीत रघुवंशी ने बिना समय गंवाए उसे सीपीआर देना शुरू किया. दोनों पुलिसकर्मी लगातार कई मिनट तक उसे सीपीआर देते रहे, ताकि उसकी सांस और धड़कन दोबारा लौट सके.
कुछ ही मिनटों में लौटी सांसें
करीब पांच मिनट की लगातार कोशिश के बाद युवक की हालत में सुधार होने लगा. उसकी सांस और धड़कन धीरे-धीरे सामान्य हुई, जिससे मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली. पुलिसकर्मियों की तत्परता और समझदारी यहां साफ तौर पर नजर आई.
युवक को तुरंत अस्पताल पहुंचाया
सीपीआर देने के बाद पुलिस ने समय बर्बाद किए बिना युवक को अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया. मौके पर मौजूद आरआई जयसिंह तोमर ने अपने वाहन से देवेंद्र सक्सेना को निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया. डॉक्टरों ने भी माना कि समय पर अस्पताल पहुंचना और उससे पहले दिया गया सीपीआर ही देवेंद्र की जिंदगी बचाने में सबसे अहम साबित हुआ. फिलहाल उनकी हालत स्थिर है और वे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं.
संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की मिसाल
यह पूरी घटना पुलिसकर्मियों की संवेदनशीलता और ड्यूटी के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दर्शाती है. अगर कुछ मिनट की देरी हो जाती, तो नतीजा कुछ और भी हो सकता था. इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आपात स्थिति में तुरंत निर्णय और सही मदद किसी की जान बचा सकती है.