MP Government Schemes 2026: आहार अनुदान योजना का उद्देश्य था कि विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद मिले, ताकि वे बुनियादी जरूरतें आसानी से पूरी कर सकें. लेकिन योजना शुरू हुए कई साल बीत गए और मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की हजारों महिलाओं तक यह लाभ अब भी नहीं पहुंच पाया है. लगभग छह हजार की जनसंख्या वाले इन परिवारों में उम्मीद के नाम पर केवल आश्वासन ही रह गया है.
योजना शुरू हुई, लाभ नहीं पहुंचा
दरअसल, 2017 में मध्यप्रदेश शासन ने विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया और सहरिया की मुखिया महिलाओं को आहार अनुदान योजना के तहत ₹1500 प्रतिमाह देने की शुरुआत की थी. लेकिन सिवनी जिले में स्थिति बिल्कुल उलट है. यहां योजनाओं का लाभ कागजों में तो दिखता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई भी हितग्राही इसका हकदार नहीं बन पाया.
86 गांव प्रभावित, हजारों महिलाएं वंचित
जिले में कुल 86 गांव ऐसे हैं, जहां ये जनजातियां निवास करती हैं. इनकी कुल जनसंख्या 5973 है और इनमें 1630 महिलाएं परिवार की मुखिया हैं. शासन के नियमों के मुताबिक इन्हें हर महीने आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए थी, लेकिन आज तक किसी को भी एक रुपया तक नहीं मिला. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से सिर्फ इंतजार चल रहा है.
गांवों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव
जब टीम गांवों में पहुंची तो पता चला कि योजनाओं से वंचित रहने के अलावा इन जनजातियों को मूलभूत सुविधाओं की भी भारी कमी झेलनी पड़ रही है. कई महिलाओं को लाड़ली बहना योजना का लाभ मिल रहा है, तो कई को नहीं. स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क जैसी जरूरी सुविधाएं भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं. लोगों का कहना है कि वे आज भी शासन की योजनाओं के लिए चक्कर काट रहे हैं.
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का लगातार प्रयास
कांग्रेस नेता और जनपद उपाध्यक्ष राजेंद्र नामदेव ने बताया कि वे इस मामले में जिला प्रशासन से लगातार पत्राचार और बैठकें करते रहे हैं. उनका कहना है कि शासन की इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ यहां की महिलाओं तक तुरंत पहुंचना चाहिए, क्योंकि ये समुदाय पहले से ही आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर स्थिति में है.
प्रशासन का जवाब: सर्वे हुआ, जांच जारी
जब प्रशासनिक अधिकारियों से बात की गई, तो जानकारी मिली कि 2025 में जिले में सर्वे किया गया है और फिलहाल पात्रता की जांच की जा रही है. लेकिन सवाल यह है कि जब मध्यप्रदेश के 55 जिलों में यह योजना लागू है, तो सिवनी जिला अब तक इससे दूर क्यों रहा? सिर्फ सर्वे कर देना पर्याप्त नहीं है, जबकि महिलाएं अभी भी लाभ से वंचित हैं.
जितेंद्र भारद्वाज की रिपोर्ट














