हमारी सुंदरता को बढ़ाने ही नहीं बल्कि दांत हमारे सेहत और आर्थिक स्थिति का एक साफ संकेत बनते जा रहे हैं. गरीब लोगों के दांत अक्सर खराब होते हैं, और इसके लिए समाज उन्हें उनकी आदतों या लापरवाही का दोष देता है. लेकिन सच्चाई यह है कि कई बार खराब दांत गरीबी और महंगी चिकित्सा व्यवस्था का परिणाम होते हैं. आज के समय में चमकदार, सफेद और सीधे दांत एक स्टेटस सिंबल बन गए हैं. जिन लोगों के पास पैसा है, वे महंगे डेंटल ट्रीटमेंट करवा सकते हैं. वहीं गरीब लोग इलाज नहीं करवा पाते, जिससे उनके दांत खराब होते जाते हैं. इससे उन्हें नौकरी और सामाजिक अवसर भी कम मिलते हैं.
एयॉन पत्रिका के लिए लिखे एक निबंध में, अमेरिकी पत्रकार सारा स्मार्श इन्हें "बेकार दांत" कहती हैं. 1970 के दशक में, जब मेडिकेयर के पूर्ववर्ती को डिजाइन किया गया था, तब दांत के डॉक्टर देखभाल को इसमें शामिल नहीं किया गया था. 2014 से, बाल दंत लाभ अनुसूची ने 17 वर्ष तक के बच्चों को अधिकांश निजी क्लीनिकों में मुफ्त दांत के डॉक्टर देखभाल प्राप्त करने में सक्षम बनाया है, यदि वे मेडिकेयर के लिए पात्र हैं और ऐसे परिवार का हिस्सा हैं जो ऑस्ट्रेलियाई सरकार से कुछ निश्चित भुगतान प्राप्त करता है.
महंगी डेंटल सेवाएं और मुश्किलें-
ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी दांतों का इलाज काफी महंगा है और हर किसी को सरकारी सहायता नहीं मिलती. रिपोर्ट्स बताती हैं कि लाखों लोग सिर्फ खर्च ज्यादा होने के कारण दांत के डॉक्टर के पास नहीं जाते. कई लोग सालों तक इलाज के लिए इंतजार करते हैं. इलाज न होने पर छोटी समस्या बड़ी बीमारी बन जाती है और कई बार अस्पताल तक जाना पड़ता है.
"डेंटल केयर को मेडिकेयर में शामिल करना" 2025 के संघीय चुनाव अभियान में ग्रीन्स पार्टी की एक प्रमुख नीति थी. हालांकि कवरेज बढ़ाने की इस प्रतिबद्धता ने हाल के वर्षों में दांतों और गरीबी के मुद्दे पर जनता का ध्यान आकर्षित किया है, ग्रैटन इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने 2024 के अंत में कहा कि "लागत के कारण दो मिलियन से अधिक ऑस्ट्रेलियाई दांत के डॉक्टर देखभाल से बचते हैं" और "दस में से चार से अधिक वयस्क आमतौर पर दांत के डॉक्टर से मिलने से पहले एक वर्ष से अधिक प्रतीक्षा करते हैं"
गरीबी और दांतों से जुड़ी शर्म
गरीबी में जी रहे लोग अक्सर अपने खराब दांतों के कारण शर्म महसूस करते हैं. कुछ लोग मुस्कुराते समय मुंह छिपाते हैं. लेखिका लिंडा तिराडो ने अपनी किताब में बताया कि गरीबी में जीने वालों के लिए दांतों की समस्या सिर्फ स्वास्थ्य नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और सामाजिक जीवन से भी जुड़ी होती है.
गरीब लोगों की अपनी आवाज-
आजकल सोशल मीडिया और किताबों के जरिए गरीब लोग अपनी कहानियां खुद बता रहे हैं. वे बताते हैं कि कैसे आर्थिक संघर्ष, कम आय और कठिन परिस्थितियों के कारण वे अपनी सेहत का ध्यान नहीं रख पाते.
एक उदाहरण
एक विरोध प्रदर्शन में लेखिका की मुलाकात एक बुजुर्ग महिला से हुई जो बहुत कम सरकारी मदद पर जीवन चला रही थी. वह काम करने के लिए मजबूर थी और उसके दांत भी टूटे हुए थे। यह दिखाता है कि कम आय और कठिन जीवन स्थितियां स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती हैं.
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