Trial Room Vs Home Mirror: अक्सर हम सबके साथ ऐसा होता है कि मॉल में शॉपिंग करते वक्त जो टी-शर्ट या ड्रेस ट्रायल रूम में हम पर एकदम परफेक्ट लग रही होती है, घर पहुंचते ही उसका रंग थोड़ा फीका लगने लगता है या फिटिंग वैसी नहीं लगती जैसी स्टोर में दिख रही थी. कभी सोचा है ऐसा क्यों होता है? क्या वो कपड़े बदल जाते हैं? जी नहीं, असल में यह सब 'लाइटिंग' और 'एंगल' का कमाल है.
ट्रायल रूम कपड़े अच्छे लगने के कारण-
1. लाइटिंग का असली खेल-
मॉल के ट्रायल रूम में कभी गौर कीजिएगा, वहां आमतौर पर 'वॉर्म लाइटिंग' का इस्तेमाल किया जाता है. ये लाइटें ऊपर से नहीं बल्कि साइड से या शीशे के पीछे से आती हैं. इसका फायदा यह होता है कि आपके चेहरे और शरीर पर पड़ने वाली परछाइयां (Shadows) कम हो जाती हैं. इससे आपकी स्किन ज्यादा ग्लोइंग दिखती है और कपड़े का रंग बहुत ही वाइब्रेंट और लग्जरी नजर आता है. वहीं घर पर जब हम नॉर्मल ट्यूबलाइट या सफेद रोशनी में वही कपड़ा पहनते हैं, तब असलियत सामने आती है.
2. शीशों की सेटिंग-
मॉल और स्टोर्स में इस्तेमाल होने वाले शीशे कोई साधारण शीशे नहीं होते. कई बार इन्हें हल्का सा 'टिल्ट' (झुका हुआ) करके लगाया जाता है. जब शीशा नीचे से थोड़ा बाहर की तरफ निकला होता है, तो आपकी हाइट थोड़ी ज्यादा लगती है और आप थोड़े पतले नजर आते हैं. इसके अलावा, आजकल कई ब्रांड्स 'स्लिमिंग मिरर्स' का इस्तेमाल करते हैं, जो आपको असलियत से 5 से 10 परसेंट ज्यादा फिट दिखाते हैं. जब आप खुद को इतना स्मार्ट देखते हैं, तो आपका दिमाग तुरंत उस कपड़े को खरीदने का सिग्नल दे देता है.
3. साफ-सफाई-
ट्रायल रूम को हमेशा बहुत साफ और खुशबूदार रखा जाता है. वहां का तापमान भी एकदम परफेक्ट (AC की ठंडक) रखा जाता है. जब आप बाहर की गर्मी और शोर से आकर उस शांत और ठंडे माहौल में खुद को एक बेहतरीन शीशे के सामने देखते हैं, तो आपका 'फील गुड' फैक्टर बढ़ जाता है. इस मानसिक स्थिति में हमें साधारण कपड़े भी बहुत अच्छे लगने लगते हैं.
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