Relationship Tips: एक गलती जो शादियों को बर्बाद कर देती है, सद्गुरु ने बताया शादी को बचाने वाले एक साधारण सा मंत्र

Sadhguru Relationship Tips: सद्गुरु के मुताबिक, मानव की सबसे बड़ी गलती यह थी कि उन्होंने कहना शुरू किया. शादियां स्वर्ग में बनती हैं और इसी वजह से यह गड़बड़ है. अक्सर लोग शादी में सपनों और उम्मीदों के साथ प्रवेश करते हैं, लेकिन सच कुछ और है.

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Sadhguru Relationship Tips: शादी दो लोगों के बीच एक सामाजिक, कानूनी और सांस्कृतिक रूप से मान्यता प्राप्त रिश्ता है, जो प्यार, साथ, सुरक्षा और परिवार बनाने के लिए होता है, लेकिन यह अक्सर दो परिवारों, उनकी संस्कृतियों और परंपराओं का भी मिलन होता है. यह प्रेम, समझदारी और आपसी सम्मान पर टिकी होती है. “शादियां स्वर्ग में बनती हैं” यह कहावत आपने कई बार सुनी होगी, लेकिन मशहूर आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु इसे सबसे बड़ा भ्रम बताते हैं. सद्गुरु के अनुसार, यही सोच कई शादियों को बर्बाद कर देती है. सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में सद्गुरु ने बताया कि क्यों कई रिश्ते समय की कसौटी पर टिक नहीं पाते और कैसे एक साधारण सा मंत्र आपकी शादी को बचा सकता है.

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स्वर्ग का भ्रम, धरती पर संकट

सद्गुरु के मुताबिक, मानव की सबसे बड़ी गलती यह थी कि उन्होंने कहना शुरू किया. शादियां स्वर्ग में बनती हैं और इसी वजह से यह गड़बड़ है. अक्सर लोग शादी में सपनों और उम्मीदों के साथ प्रवेश करते हैं, लेकिन हकीकत में बिल, बच्चों की जिम्मेदारी, ससुराल और झगड़े सामने आते हैं. तब लोग अपने साथी को दोष देने लगते हैं कि वह उन्हें खुश क्यों नहीं कर रहा. यही सोच रिश्तों को कड़वा बना देती है और फिर धीरे-धीरे रिश्ते की डोर को कमजोर तक कर देती है.

इंसान जरूरतों की मशीन

सद्गुरु बताते हैं कि इंसान जरूरतों की मशीन है. हर इंसान की कई जरूरतें होती हैं. जैसे शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक, आर्थिक और भी बहुत सी. इन जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग एक व्यक्ति पर निर्भर हो जाते हैं, लेकिन एक ही इंसान से सारी जरूरतें पूरी होने की उम्मीद करना गलत है. यही नाराजगी और रिश्ते के टूटने की वजह बनती है.

रिश्ते को कैसे बचाएं

सद्गुरु का समाधान कृतज्ञता है. सद्गुरु कहते हैं, “अगर आप समझते हैं और हमेशा आभारी रहते हैं कि कोई आपकी जरूरतें पूरी कर रहा है, तो आप रिश्ते को अच्छे से निभा पाएंगे.” समस्या तब आती है जब लोग सोचने लगते हैं कि दूसरा व्यक्ति उन्हें ज्यादा जरूरतमंद है और आभार जताना बंद कर देते हैं. यही रिश्ते को बिगाड़ देता है.

सद्गुरु का स्वर्णिम नियम

यह किसी से खुशी निचोड़ने का खेल नहीं है. अगर दो खुश लोग मिलते हैं, तो कुछ अद्भुत हो सकता है, लेकिन अगर आप दुखी हैं और सोचते हैं कि दूसरा आपकी खुशी का स्रोत बनेगा, तो दुख कई गुना बढ़ जाएगा.

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

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