क्या आप कबूतरों को रोज दाना डालते हैं तो रुक जाएं, जानिए ऐसा करने से क्या है नुकसान

Pigeon Droppings: कर्नाटक में कबूतर को दाना डालने पर रोक लगाने की पहल की है, क्योंकि कबूतर की बीट से सांस संबंधी समस्याओं और कई अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है.

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कबूतर को दाना डालने से क्या होता है?
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Pigeon Droppings: भारत के कई शहरों खासकर मुंबई और बेंगलुरु में सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक लग रही है या इस पर विचार किया जा रहा है, क्योंकि कबूतरों की बीट से सांस की बीमारियां का खतरा बढ़ रहा है. पक्षियों की बीट से जुड़े श्वसन संबंधी मामलों में बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए कर्नाटक के स्वास्थ्य विभाग ने सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना खिलाने पर कंट्रोल बढ़ाने के प्रयास तेज कर दिए हैं. बेंगलुरु जैसे व्यस्त शहरों में अनियंत्रित रूप से दाना खिलाने से कबूतरों की आबादी बढ़ जाती है, जिससे बेंचों, मूर्तियों और फुटपाथों पर बीट जम जाती है. समस्या यह है कि सूखने पर ये छोटे-छोटे कण हवा में छोड़ देते हैं, जिससे राहगीरों, भीड़भाड़ वाले बाजारों और पार्कों में जहां हर वर्ग के लोग आते-जाते हैं, गंभीर खतरा पैदा हो जाता है.

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कर्नाटक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी एक नोट में सरकार ने कहा कि कबूतरों को अनियंत्रित रूप से दाना खिलाने से पक्षियों के बड़े-बड़े समूह बन गए हैं, अत्यधिक मात्रा में बीट गिर रही है और स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं, विशेष रूप से श्वसन संबंधी बीमारियां जो कबूतरों की बीट और पंखों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से जुड़ी हैं. बेंगलुरु जैसे शहरों में कबूतरों की संख्या बढ़ रही है, जिससे मल के कारण स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं.

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कबूतरों की बीट से क्या खतरा?

कबूतरों के मल में फंगी जैसे कि क्रिप्टोकोकस नियोफॉर्मन्स और हिस्टोप्लास्मा कैप्सुलटम होते हैं, जो हवा में फैलकर श्वसन रोग का कारण बनते हैं. इनसे क्रिप्टोकोकॉसिस, हिस्टोप्लास्मोसिस जैसे रोग हो सकते हैं. कबूतरों के मल में साल्मोनेला, ई. कोली और कैम्पिलोबैक्टर जैसे बैक्टीरिया होते हैं, जो भोजन और पानी को दूषित कर सकते हैं.

कर्नाटक सरकार के कदम

कर्नाटक सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को खाना खिलाने पर रोक लगाने के लिए निर्देश दिए हैं. बेंगलुरु में उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है.

  • कबूतरों को खाना न खिलाएं
  • सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनें
  • कबूतरों के मल को साफ करते समय सावधानी बरतें
  • श्वसन रोग के लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करें

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अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

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