पेरेंट्स को बच्चों के लिए जरूर बनाने चाहिए ये 6 Rules, साइकोलोजिस्ट ने बताया कभी नहीं बिगड़ेगा बच्चा, खुश रहेगा परिवार

Parenting Tips: आज के समय में बच्चों की परवरिश आसान नहीं रह गई है. बदलता माहौल, मोबाइल, सोशल मीडिया और बढ़ता तनाव बच्चों के व्यवहार पर सीधा असर डालता है. ऐसे में सिर्फ डांटना या सख्ती करना सही तरीका नहीं होता. इसके साथ कुछ सही फैसले लेने भी जरूरी हैं.

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बच्चे के लिए जरूर बनाएं ये 6 रूल

Parenting Tips: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा समझदार बने, संस्कारी हो और जीवन में सही फैसले ले सके. लेकिन आज के समय में बच्चों की परवरिश आसान नहीं रह गई है. बदलता माहौल, मोबाइल, सोशल मीडिया और बढ़ता तनाव बच्चों के व्यवहार पर सीधा असर डालता है. ऐसे में सिर्फ डांटना या सख्ती करना सही तरीका नहीं होता. इसके साथ कुछ सही फैसले लेने भी जरूरी हैं. इसी कड़ी में चाइल्ड साइकोलोजिस्ट श्वेता गांधी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है. इस पोस्ट में उन्होंने 6 रूल्स बताए हैं. साइकोलोजिस्ट कहती हैं, अगर आप अपने बच्चे के लिए ये 6 रूल्स बना दें, तो न केवल आपका बच्चा शांत और समझदार बनेगा, बल्कि आपके परिवार का माहौल भी खुशहाल बना रहेगा. 

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बच्चे के लिए जरूर बनाएं ये 6 रूल

रूल नंबर 1- सम्मान से बात करना जरूरी है

सबसे पहले घर में बात करने के तरीके पर ध्यान दें. रूल बनाएं कि आपके घर में कोई भी चिल्लाकर या एक-दूसरे का नाम लेकर बात नहीं करेगा. लड़ाई या मतभेद होने पर भी चिल्लाने से बचें. इससे अलग हर बात को शांति से करें. इससे बच्चा भी ये व्यहवार सिखेगा.  

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रूल नंबर 2- भावनाएं ठीक हैं लेकिन गलत व्यवहार नहीं

बच्चे को सिखाएं कि किसी बात पर गुस्सा आना, रोना या उदास होना बिल्कुल सामान्य है. लेकिन मारना, चीजें तोड़ना या किसी को चोट पहुंचाना गलत है. इस नियम से बच्चा बिना गलत बर्ताव के अपनी भावनाओं को व्यक्त करना सीखता है.

रूल नंबर 3- झगड़े के बाद सुधार जरूरी है

कभी-कभी बहस होना आम बात है. लेकिन इस बहस में अगर किसी की भावना को ठेस पहुंचे, तो माफी मांगना भी बहुत जरूरी है. इससे बच्चा जवाबदेही सीखता है और समझता है कि गलती के बाद सुधार कैसे किया जाता है.

रूल नंबर 4- रोज का रूटीन फॉलो करें

बच्चे को सिखाएं कि रोज रूटीन फॉलो करना जरूरी है. सोने का समय, खाने का समय और खेलने का समय तय होना चाहिए. रोज एक जैसा रूटीन बच्चों के दिमाग को शांत और संतुलित रखता है. 

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रूल नंबर 5- बड़ों की एकजुटता

माता-पिता और दादा-दादी को बच्चे के सामने एक-दूसरे की बात नहीं काटनी चाहिए. अगर किसी बात पर मतभेद है, तो उसे अकेले में सुलझाएं. जब बड़े एकजुट होते हैं, तो बच्चा भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस करता है. साथ ही बड़ों का सम्मान भी दिल से करता है.

रूल नंबर 6- कंट्रोल नहीं, कनेक्शन चुनें

इन सब से अलग साइकोलोजिस्ट कहती हैं, एक रूल आपको भी अपनाना है. बच्चे के व्यवहार को सुधारने से पहले उससे जुड़ना जरूरी है. इसके लिए बच्चे से खुलकर बात करें और उसकी बातों पर पूरा ध्यान दें. 

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इन 6 आसान नियमों को अपनाकर माता-पिता न सिर्फ बच्चों को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि परिवार को भी खुशहाल रख सकते हैं.

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अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

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