बिना कोचिंग के बच्चे को टॉपर कैसे बनाएं? Parenting Coach ने बताया सबसे आसान तरीका

Parenting Tips: अगर बच्चा सही तरीके से पढ़े, अच्छी आदतें डाले और माता-पिता सही गाइडेंस दें, तो बिना कोचिंग भी बच्चा टॉपर बन सकता है. इनके लिए पैरेंटिंग कोच ने 6 आसान टिप्स शेयर की हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में-

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बिना कोचिंग के बच्चे को टॉपर कैसे बनाएं?

Parenting Tips: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा टॉपर बनें और क्लास में सबसे आगे रहे. इसके लिए वे कम उम्र से ही बच्चे की महंगी कोचिंग या ट्यूशन क्लास लगा देते हैं. हालांकि, कई बार इसके बाद भी बच्चा उतना अच्छा पर्फोर्म नहीं कर पाता है. इसी विषय पर पैरेंटिंग कोच संदीप ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में वे बताते हैं, बच्चे को टॉपर बनाने के लिए महंगी कोचिंग की जरूरत नहीं होती है.   अगर बच्चा सही तरीके से पढ़े, अच्छी आदतें डाले और माता-पिता सही गाइडेंस दें, तो बिना कोचिंग भी बच्चा टॉपर बन सकता है. इनके लिए पैरेंटिंग कोच ने 6 आसान टिप्स शेयर की हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में- 

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नंबर 1- बच्चे को खुद टाइम टेबल बनाने दें

संदीप बच्चे को खुद उसका टाइम टेबल बनाने की सलाह देते हैं. वे कहते हैं, कई बार पैरेंट्स अपना प्लान बच्चे पर थोप देते हैं, जिससे बच्चा पढ़ाई को बोझ समझने लगता है. अगर बच्चा खुद अपना शेड्यूल बनाता है, तो वह उसे जिम्मेदारी से फॉलो भी करता है. इससे उसमें अनुशासन और समय की कद्र करने की आदत बनती है. ऐसे में बच्चे को खुद उसका टाइम टेबल बनाने दें. 

नंबर 2- रटना नहीं, समझना सिखाएं

बच्चे को रटने की नहीं, समझने की आदत डलवाएं. जब बच्चा किसी चीज को समझकर पढ़ता है, तो वह ज्यादा समय तक याद रहती है. ऐसे में उसे चीजें आराम से समझाएं फिर वही चीजें उसे अपने आप को समझाने के लिए कहें. यानी थोड़ी देर के आप स्टूडेंट बन जाएं और बच्चे को टीचर बनने के लिए कहें. इससे उसे पढ़ा हुआ लंबे समय तक याद रहेगा. 

नंबर 3-  नोट्स बनाने की आदत डालें

बच्चे को छोटे-छोटे नोट्स बनाने की आदत डालें. हर चैप्टर के इम्पोर्टेंट पॉइंट्स, कीवर्ड्स और डायग्राम बनवाएं. इससे रिवीजन बहुत आसान हो जाता है और बच्चा जल्दी तैयारी कर पाता है.

नंबर 4- सेल्फ टेस्ट 

बच्चे को हर हफ्ते सेल्फ टेस्ट देने की आदत डालें. इससे वह खुद अपनी कमजोरियों को पहचानता है और सुधार कर सकता है. साथ ही एग्जाम का डर भी कम होता है.

नंबर 5-  सही ब्रेक देना बहुत जरूरी

पढ़ाई के बीच सही ब्रेक देना बहुत जरूरी है. लगातार कई घंटों तक पढ़ाने से बच्चा थक जाता है और ध्यान कम होने लगता है. बेहतर है कि 30 मिनट पढ़ाई के बाद 5 मिनट का ब्रेक दें. हालांकि, इस दौरान बच्चे को मोबाइल और स्क्रीन से दूर रखें ताकि दिमाग सच में आराम कर सके.

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नंबर 6- पॉजिटिव माइंडसेट

छठा और सबसे जरूरी पॉइंट है पॉजिटिव माइंडसेट. बच्चे को यह सिखाएं कि गलती होना गलत नहीं है. गलती से सीखकर आगे बढ़ना असली सफलता है. अगर बच्चा खुद पर भरोसा रखना सीख गया, तो वह हर चुनौती से निपट सकता है.

पैरेंटिंग कोच कहते हैं, माता-पिता का प्यार, सपोर्ट और सही गाइडेंस बच्चे के लिए सबसे बड़ी ताकत होती है. अगर घर का माहौल पॉजिटिव हो, तनाव न हो और बच्चे को भरोसा मिले कि उसके साथ परिवार खड़ा है, तो बच्चा खुद ही मेहनत करने लगता है. इसलिए कोचिंग पर निर्भर होने के बजाय सही आदतें डालें, बच्चे को मोटिवेट करें और उस पर भरोसा रखें. ऐसा करने से बच्चा न केवल टॉपर बनेगा, बल्कि उसका आत्मविश्वास भी बढ़ जाएगा.

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अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

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