Genetics and Lifespan: अक्सर हमें यह बताया जाता है कि अगर हम सही खाएं, रोजाना एक्सरसाइज करें और बुरी आदतों से दूर रहें, तो हम लंबी और हेल्दी लाइफ जी सकते हैं. इसमें कोई शक नहीं कि अच्छी लाइफस्टाइल सेहत के लिए बेहद जरूरी है. लेकिन, एक नई और बड़ी वैज्ञानिक स्टडी ने इस सोच को चुनौती दी है. इस रिसर्च के मुताबिक, इंसान कितने साल जिएगा इसका फैसला काफी हद तक उसके जीन (Genes) करते हैं, न कि सिर्फ लाइफस्टाइल.
यह स्टडी मशहूर साइंटिफिक जर्नल साइंस में प्रकाशित हुई है. शोध के अनुसार, जब एक्सीडेंट, संक्रमण, हिंसा और दूसरी बाहरी वजहों से होने वाली मौतों को हटा दिया जाता है, तो इंसान की उम्र का करीब 55% हिस्सा जेनेटिक होता है. यानी किसी आबादी में लोगों की उम्र में जो फर्क दिखाई देता है, उसका आधे से ज्यादा कारण जीन होते हैं. यह आंकड़ा पहले के अनुमानों (10-25%) से कहीं ज्यादा है. यह रिसर्च 29 जनवरी को प्रकाशित हुई.
स्टडी में क्या किया गया?
इस शोध में डेनमार्क और स्वीडन के बड़े स्कैंडिनेवियन ट्विन (जुड़वां) समूहों के 100 साल से भी ज्यादा पुराने डेटा का विश्लेषण किया गया. इसमें एक जैसे (Identical) और अलग-अलग (Non-identical) जुड़वां, साथ पले-बढ़े और अलग-अलग पले-बढ़े जुड़वां, साथ ही अमेरिका के 100 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों (Centenarians) के भाई-बहन शामिल थे. ज्यादातर प्रतिभागी 1870 से 1935 के बीच पैदा हुए थे, एक ऐसा दौर जब संक्रमण और हादसों से मौतें बहुत ज्यादा होती थीं.
असली असर कैसे सामने आया?
शोधकर्ताओं ने पाया कि बाहरी कारणों (जैसे एक्सीडेंट और संक्रमण) से हुई मौतों को जब अलग किया गया, तब जैविक उम्र बढ़ने (Biological Ageing) में जीन की असली भूमिका साफ दिखाई दी. ऐसे में एक जैसे जुड़वां बच्चों की उम्र में समानता कहीं ज्यादा मजबूत नजर आई. यह भी समझ में आया कि आज के समय में जीन का असर ज्यादा साफ क्यों दिखता है, क्योंकि अब संक्रमण, हिंसा और हादसों से मौतें कम हो गई हैं, इसलिए उम्र पर जीन का प्रभाव ज्यादा उभरकर सामने आ रहा है.
जीन बनाम लाइफस्टाइल: कौन कितना जिम्मेदार?
- 50-55 प्रतिशत : जीन
- 45-50 प्रतिशत: लाइफस्टाइल और पर्यावरण
(पहले जीन का अनुमान सिर्फ 6-25 प्रतिशत माना जाता था)
भारतीय विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज पब्लिक हेल्थ के लिए बहुत अहम है. उनका मानना है कि जीन उम्र की ऊपरी सीमा तय करते हैं, लेकिन खराब पोषण, वायु प्रदूषण, डायबिटीज और मोटापा जैसे कारक इस जेनेटिक फायदे को कमजोर कर सकते हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं. विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि एपिजेनेटिक्स के जरिए पर्यावरण और जीवनशैली जीन को “ऑन” या “ऑफ” कर सकती है—बिना डीएनए बदले.
क्या उम्र जन्म से तय होती है?
वैज्ञानिक साफ कहते हैं कि इसका मतलब यह नहीं है कि उम्र जन्म के साथ ही पूरी तरह तय हो जाती है. अभी भी करीब आधी उम्र लाइफस्टाइल, इलाज की सुविधा और रहने की परिस्थितियों पर निर्भर करती है.
कुल मिलाकर यह है कि जीन उम्र की छत तय करते हैं और लाइफस्टाइल यह तय करती है कि आप उस छत तक कितने करीब पहुंच पाते हैं. यही वजह है कि अच्छी आदतें आज भी उतनी ही जरूरी हैं ताकि आप अपनी जेनेटिक क्षमता का पूरा फायदा उठा सकें.