चाणक्य नीति के इन 7 नियमों को अपनाएं और सीखें पैसे खर्च करने का सही तरीका, हमेशा रहेंगे मालामाल

How To Save Money: चाणक्य नीति के अनुसार चलने पर जेब कभी भी खाली नहीं होगी. पैसा कब कैसे, कितना और कहां खर्च करना है चाणक्य नीति में यह सब लिखा है.

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चाणक्य नीति में ये हैं पैसे खर्च करने के 7 नियम.

How To Save Money: सांसारिक नियम है कि हर चीज का इस्तेमाल तरीके से करना चाहिए. लेकिन जब बात आती है धन के उपयोग की तो इंसान को यहां ज्यादा संभलकर चलने की जरुरत होती है. क्योंकि पैसा हाथ का मेल है, जो आता तो देर से है, लेकिन जाने में देरी नहीं लगाता है. पैसों को बड़ी समझदारी से खर्च करना चाहिए, क्योंकि पैसा ही हमारी जिंदगी को सुरक्षित और खुशहाल रखने की एकमात्र गारंटी है. पैसा है तो समाज में सम्मान है. इसलिए इसकी कद्र करनी चाहिए और इसका इस्तेमाल बहुत ही सोच समझकर करना चाहिए. क्योंकि फिजूलखर्ची इंसान को कर्ज और कंगाली की ओर धकेलती है और फिर इंसान के सामने मौत का खुला दरवाजा नजर आता है. ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं पैसे खर्च के करने के चाणक्य के वो 7 नियम, जिन्हें हर किसी को गांठ बांधकर रख लेने चाहिए.

जरूरत पर ही पैसा खर्च करें

चाणक्य की मानें तो धन का नाश उस दिन से शुरू हो जाता है, जब इंसान बिना किसी जरूरत का सामान खरीदता है. इंसान को पहले अपनी जरूरतों को प्राथमिकता देना चाहिए और उसके बाद अपने बजट अनुसार इच्छाओं को पूरा करना चाहिए.

इमरजेंसी फंड रखें

चाणक्य नीति में कहा जाता है कि भविष्य को ध्यान में रखकर ही जेब से पैसा निकालना चाहिए, क्योंकि जीवन अनिश्चित है, कभी भी कोई भी मुसीबत आ सकती है. बचत करना बहुत जरूरी है.

शो ऑफ के लिए पैसे ना उड़ाएं

कई लोग दिखावे के चक्कर में लोगों से उधार ले लेते हैं और यहां तक कि अपनी सेविंग भी उड़ा देते हैं. इस पर चाणक्य नीति कहती है, दिखावे के लिए लिया कर्ज आर्थिक तंगी की ओर ले जाता है और इससे सम्मान खत्म हो जाता है. इसलिए दिखावे के लिए फिजूलखर्ची से बचें.

चादर देखकर पैर पसारें

चाणक्य नीति की मानें तो उतना ही खर्च करें जितना जेब इजाजत दे. नीति के मुताबिक, आय से अधिक खर्च बर्बादी की ओर ले जाता है.

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प्रॉफिट प्वाइंट पर खर्च करें

चाणक्य नीति कहती है कि जहां लाभ ना हो, वहां पैसा खर्च करना बेकार है. सोच-समझकर निवेश किया गया पैसा भविष्य में सुख-शांति देगा.

सही काम के लिए करें खर्च

कई दफा लोग बिना सोचे समझे गलत जगह पैसा खर्च कर देते हैं, लेकिन चाणक्य नीति इसके खिलाफ है. इसका मानना है कि सही उद्देश्य के लिए ही पैसा खर्च करना फाय़दे का सौदा होता है.

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उधार देने से बचें

चाणक्य नीति के अनुसार उधार दिया पैसा भी एक तरह से कर्ज है. क्योंकि उधार चुकाना बहुत मुश्किल होता है और उधार का पैसा बहुत कम वापस आता है. उधार ऐसे लोगों को ही दें, जिसकी आर्थिक स्थिति आप अच्छे से जानते हों.

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