अक्सर आपने देखा होगा कि स्टेशन पर खड़ी पैसेंजर ट्रेन या लंबी दूरी की ट्रेन का इंजन घंटों तक चालू रहता है. लोगों के मन में सवाल आता है कि जब ट्रेन चल नहीं रही, तो इंजन बंद क्यों नहीं कर दिया जाता? क्या इससे ईंधन की बचत नहीं होगी? खासकर डीजल इंजन वाली ट्रेनों में ये सवाल और भी ज्यादा उठता है. दरअसल इसके पीछे सिर्फ एक वजह नहीं, बल्कि कई तकनीक और सुरक्षा से जुड़े कारण होते हैं. जिनके चलते इंजन को चालू रखना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है.
इंजन स्टार्ट करने में समय और ज्यादा ईंधन
डीजल लोकोमोटिव कार के इंजन जैसा नहीं होता. इसे पूरी तरह से स्टार्ट होकर काम करने लायक बनने में 15 से 20 मिनट तक लग सकते हैं. इस दौरान काफी मात्रा में डीजल खर्च होता है. कई बार जितना डीजल स्टार्ट करने में लगता है. उतने में इंजन घंटों तक आराम से चल सकता है. इसलिए थोड़ी देर के स्टॉप के लिए इंजन बंद करना नुकसान का सौदा हो जाता है.
एयर ब्रेक सिस्टम का दबाव बनाए रखना
ट्रेन के ब्रेक एयर प्रेशर पर काम करते हैं. ये प्रेशर इंजन से जुड़े एयर कंप्रेसर के जरिए बनता है. अगर इंजन बंद कर दिया जाए, तो ब्रेक पाइप में हवा का दबाव धीरे धीरे खत्म हो जाता है. दोबारा प्रेशर बनाने में समय लगता है और इस दौरान ट्रेन के लुढ़कने जैसी जोखिम भरी स्थिति बन सकती है.
बैटरी चार्ज रहना जरूरी
डीजल इंजन वाली ट्रेनों में बड़ी बड़ी बैटरियां होती हैं. जो इंजन चालू रहने पर ही चार्ज होती हैं. इंजन बंद होने पर बैटरी डिस्चार्ज हो सकती है. अगर बैटरी डाउन हो गई तो लोकोमोटिव के कई जरूरी सिस्टम काम करना बंद कर सकते हैं.
बार-बार बंद और चालू करने से खतरा
लोकोमोटिव की तकनीक काफी कॉम्प्लेक्स होती है. बार बार इंजन बंद और चालू करने से सिस्टम पर ज्यादा दबाव पड़ता है और इंजन फेल होने का खतरा भी बढ़ जाता है.
ठंडे इलाकों में ज्यादा समस्या
कुछ ठंडे इलाकों में इंजन का कूलेंट जमने का खतरा रहता है. कई जगहों पर एंटी फ्रीज का इस्तेमाल नहीं होता. इसलिए इंजन चालू रखना जरूरी हो जाता है.














