मुख्यमंत्री की सुपारी लेने वाले श्रीप्रकाश शुक्ला को किया था ढेर, इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा कौन थे?

Inspector Avinash Mishra Real Story: वेब सीरीज इंस्पेक्टर अविनाश के पीछे यूपी पुलिस के चर्चित अफसर अविनाश मिश्रा की कहानी बताई जाती है. हमीरपुर में जन्मे इस अधिकारी ने 150 से ज्यादा एनकाउंटर किए थे.

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Inspector Avinash Mishra की कहानी

Inspector Avinash Real Story: ओटीटी पर आई वेब सीरीज इंस्पेक्टर अविनाश एक बार फिर यूपी पुलिस के उस दौर की याद दिला रही है. जब अपराधियों का खौफ पूरे राज्य में फैला हुआ था. इस सीरीज में रणदीप हुड्डा ने जिस पुलिस अफसर का किरदार निभाया. वो असल जिंदगी के तेजतर्रार अफसर अविनाश मिश्रा से इंस्पायर्ड माना जाता है. अविनाश मिश्रा वही अधिकारी हैं. जिन्होंने कुख्यात गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला के खिलाफ चले ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई थी. यही वो अपराधी था. जिसने तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी लेकर पूरे देश में सनसनी फैला दी थी.

हमीरपुर से यूपी एसटीएफ तक का सफर

अविनाश मिश्रा का जन्म उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में हुआ था. उन्होंने फिजिकल एजुकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और साल 1982 में यूपी पुलिस में भर्ती हुए. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग मेरठ में हुई. उसी दौरान यूपी में अपराध तेजी से बढ़ रहा था और पुलिस को एक स्पेशल फोर्स की जरूरत महसूस हुई. जब यूपी एसटीएफ का गठन हुआ, तब अविनाश मिश्रा उसकी फाउंडिंग टीम का हिस्सा बने.

बताया जाता है कि वो साल 2009 तक एसटीएफ में एक्टिव रहे. इस दौरान उन्होंने एटीएस में भी काम किया और कई बड़े ऑपरेशन लीड किए. बाद में वो डिप्टी एसपी की पोस्ट से रिटायर हुए. फिलहाल वो लखनऊ में रहते हैं. यूपी पुलिस में उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी की रही, जो मुश्किल से मुश्किल मिशन को भी बखूबी अंजाम देते थे.

150 से ज्यादा एनकाउंटर, कई माफिया ढेर

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अविनाश मिश्रा ने अपने करियर में 150 से ज्यादा एनकाउंटर किए. इनमें श्रीप्रकाश शुक्ला, सत्तू पांडेय, सचिन पहाड़ी, अवधेश शुक्ला, अशोक सिंह, महेंद्र फौजी, निर्भय गुर्जर और हसन पुड़िया जैसे कई कुख्यात गैंगस्टर शामिल थे. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा श्रीप्रकाश शुक्ला एनकाउंटर की हुई.

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असल में श्रीप्रकाश शुक्ला ने उस दौर में ऐसा आतंक फैला रखा था कि सरकार तक अलर्ट हो गई थी. जब मुख्यमंत्री की हत्या की सुपारी लेने की खबर सामने आई. तब यूपी एसटीएफ को उसे खत्म करने की जिम्मेदारी दी गई. लंबे ऑपरेशन के बाद पुलिस ने उसे मुठभेड़ में मार गिराया. इस सफल ऑपरेशन के लिए एसटीएफ टीम को प्रेसिडेंट मेडल से सम्मानित किया गया था. उसी टीम में अविनाश मिश्रा भी शामिल थे. 

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