Holi Not Celebrated In India: होली का नाम सुनते ही रंग, गुलाल और मस्ती की तस्वीर सामने आ जाती है. देश के ज्यादातर हिस्सों में ये त्योहार पूरे जोश के साथ मनाया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जहां सालों से होली नहीं खेली जाती है. कहीं किसी संत के श्राप की कहानी है, तो कहीं किसी पुरानी घटना का डर आज भी लोगों के दिल में बैठा है. इन गांवों में होली के दिन सन्नाटा रहता है और लोग इस परंपरा को आज भी निभा रहे हैं.
हरियाणा का दुसरपुर गांवहरियाणा के दुसरपुर गांव में करीब 300 सालों से होली नहीं मनाई जाती है. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि बहुत पहले होली के दिन गांववालों ने एक साधु का अपमान कर दिया था. गुस्से में साधु ने गांव को श्राप दे दिया कि यहां कभी होली नहीं खेली जाएगी. तभी से गांव के लोग इस परंपरा को मानते आ रहे हैं और होली के दिन रंग से दूरी बनाए रखते हैं.
उत्तराखंड के खुरजान और किवली गांव में भी करीब 150 सालों से होली नहीं मनाई जाती है. यहां के लोगों का विश्वास है कि उनकी कुलदेवी त्रिपुर सुंदरी को शोर और हंगामा पसंद नहीं है. अगर गांव में होली खेली गई तो देवी नाराज हो सकती हैं. इसी आस्था के कारण आज भी इन गांवों में होली का त्योहार नहीं मनाया जाता है.
झारखंड का दुर्गापुरझारखंड के दुर्गापुर में भी होली न मनाने की परंपरा है. कहा जाता है कि होली के दिन यहां के राजा दुर्गा प्रसाद की हत्या हो गई थी. इस घटना के बाद गांव में होली बंद कर दी गई. सालों बाद कुछ लोगों ने होली मनाने की कोशिश की, लेकिन उसी दिन दो लोगों की मौत हो गई. तब से लोग इसे अशुभ मानते हैं और होली नहीं खेलते हैं.
गुजरात के रामसन गांव में करीब 200 सालों से होली नहीं मनाई जाती है. मान्यता है कि होलिका दहन के दिन गांव में भीषण आग लग गई थी और कई घर जलकर राख हो गए थे. इस हादसे के बाद गांववालों ने होली मनाना बंद कर दिया और आज तक ये परंपरा जारी है.
मध्य प्रदेश का कूचीपुरा गांवमध्य प्रदेश के भिंड जिले के कूचीपुरा गांव में भी होली नहीं खेली जाती है. लोगों का कहना है कि सदियों पहले एक संत ने नाराज होकर गांव को श्राप दिया था कि अगर यहां होली मनाई गई तो परिवारों पर संकट आएगा. इसी डर और आस्था के कारण आज भी यहां रंगों का त्योहार नहीं मनाया जाता है.














