Wet-Bulb Temperature: गर्मी बढ़ते ही लोग बाहर के ट्रेंप्रेचर पर भी नजर रखने लगते हैं. ताकि तेज तापमान से होने वाली मुश्किलों से बच सकें. लेकिन अब सिर्फ पारा चढ़ना ही खतरे की बात नहीं रह गई है. कई बार ऐसा होता है कि टेंप्रेचर उतना ज्यादा नहीं होता. फिर भी लोगों को घुटन, बेचैनी और चक्कर आने लगते हैं. इसकी वजह होती है वेट-बल्ब टेंप्रेचर. आसान भाषा में कहें तो जब गर्मी के साथ हवा में मॉइश्चर यानी उमस भी बहुत ज्यादा हो जाए. तो शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता. यही स्थिति इंसानों के लिए खतरनाक बन सकती है. साइंस की मानें तो आने वाले समय में हीटवेव से ज्यादा खतरा इसी वेट-बल्ब टेंप्रेचर से हो सकता है.
आखिर क्या होता है वेट-बल्ब टेंप्रेचर?
वेट-बल्ब टेंप्रेचर को समझना बहुत मुश्किल नहीं है. जब हमें गर्मी लगती है. तो शरीर से पसीना निकलता है. यही पसीना सूखकर शरीर को ठंडा करता है. लेकिन अगर हवा में नमी ज्यादा हो. तो पसीना जल्दी सूख नहीं पाता. यानी बाहर का तापमान भले 38 या 40 डिग्री हो. लेकिन उमस ज्यादा होने पर शरीर को ये 45 डिग्री जैसी गर्मी महसूस हो सकती है. इसलिए अक्सर लोग ये कहते सुने जाते हैं कि आज तो बहुत चिपचिपी गर्मी है. यही वेट-बल्ब टेंप्रेचर का असर होता है.
क्यों हो सकता है जानलेवा?
जब शरीर का पसीना सूखना बंद हो जाता है. तो शरीर अंदर से लगातार गर्म होने लगता है. इससे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अगर ये स्थिति ज्यादा देर तक बनी रहे तो इंसान बेहोश भी हो सकता है. सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को होता है जो लंबे समय तक बाहर काम करते हैं, जैसे मजदूर, किसान, ट्रैफिक पुलिस या डिलीवरी बॉय.
भारत में क्यों बढ़ रही चिंता?
भारत में अब सिर्फ गर्मी ही नहीं, उमस भी तेजी से बढ़ रही है. कई शहरों में बारिश से पहले वाली चिपचिपी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है. क्लाइमेट चेंज की वजह से मौसम का पैटर्न बदल रहा है और यही कारण है कि वेट-बल्ब टेंप्रेचर को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है.
बचने के लिए क्या करें?
तेज गर्मी और उमस में ज्यादा देर बाहर रहने से बचें. खूब पानी पिएं और हल्के कपड़े पहनें. अगर बहुत ज्यादा घुटन, चक्कर या कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत ठंडी जगह पर जाएं. कोशिश करें कि दोपहर की तेज धूप में बाहर कम निकलें.
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